Iran War updates Not just oil and gas Iran could also put brakes on internet India too would not be spared तेल और गैस ही नहीं, इंटरनेट पर भी ब्रेक लगा सकता है ईरान; भारत भी नहीं बचेगा, India News in Hindi - Hindustan
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तेल और गैस ही नहीं, इंटरनेट पर भी ब्रेक लगा सकता है ईरान; भारत भी नहीं बचेगा

अमेजन, माइक्रोसॉफ्ट और गूगल ने यूएई और सऊदी जैसे देशों में विशाल डाटा सेंटर बनाए हैं। वे सभी सक्रिय हैं। ये सब इन्हीं समुद्री केबलों से जुड़े हुए हैं। यानी दुनिया की डिजिटल जिंदगी इन्हीं पर टिकी हैं।

Fri, 20 March 2026 07:05 AMHimanshu Jha हिन्दुस्तान टीम
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तेल और गैस ही नहीं, इंटरनेट पर भी ब्रेक लगा सकता है ईरान; भारत भी नहीं बचेगा

Iran War Updates: मध्य पूर्व में चल रहे युद्ध ने अब एक नई चिंता खड़ी कर दी है। ईरान ने हॉर्मुज से गुजरने वाली ऊर्जा आपूर्ति को रोककर दुनिया में तेल और गैस का संकट पैदा किया। अब इसी रास्ते से समुद्र के नीचे बिछी इंटरनेट केबलों पर भी खतरा मंडरा रहा हैं। अगर इन्हें नुकसान हुआ तो दुनियाभर में इंटरनेट ठप हो सकता है। भारत सहित दुनिया में कई देशों की बैंकिंग-डिजिटल सेवाएं भी प्रभावित हो सकती हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया के लिए दो अहम जगहें सबसे ज्यादा खतरे में हैं। पहली हॉर्मुज और दूसरी लाल सागर का बाब-अल-मंदेब मार्ग। इनके नीचे फाइबर केबलों का बड़ा जाल बिछा हुआ है। दावा किया जा रहा है कि ईरान ने हॉर्मुज में समुद्री सुरंगें बिछा दी हैं, जिससे शिपिंग कंपनियां और बीमा कंपनियां डरी हुई हैं। वहीं, लाल सागर में ईरान समर्थित हुथी समूह जहाजों पर हमले कर रहे हैं। ये दोनों क्षेत्र समुद्र के तल पर बिछे फाइबर ऑप्टिक केबलों के ऊपर स्थित हैं।

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ये कबलें हजारों किलोमीटर तक फैली हुई हैं। वैश्विक इंटरनेट का लगभग सारा डाटा जैसे वीडियो कॉल, ईमेल से लेकर बैंकिंग,एआई सेवाओं तक इन्हीं के जरिए चलता है। हॉर्मुज के सबसे संकरे हिस्से में पानी केवल 200 फीट गहरा है। इसलिए इन्हें आसानी से निशाना बनाया जा सकता हैं।

लाल सागर और हॉर्मुज में 20 केबल

लाल सागर और हॉर्मुज में कम से कम 20 केबल हैं। लाल सागर से 17 केबल गुजरती हैं, जो यूरोप, एशिया और अफ्रीका को जोड़ती हैं। हॉर्मुज से यहां एएई-1, फाल्कन, गल्फ ब्रिज इंटरनेशनल और टाटा-टीजीएन गल्फ जैसे सक्रिय केबल हैं। ये लाइनें सीधे तौर पर भारत के विदेशी डाटा कनेक्शन को मदद करती हैं।

ये केबल बहुत जरूरी

समुद्र के नीचे की ये पतली केबलें ही पूरी दुनिया का इंटरनेट चलाती हैं। इनसे वीडियो कॉल, ईमेल, बैंक ट्रांजैक्शन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता सेवाएं लोगों को मिलती हैं। इतना ही नहीं, अमेजन, माइक्रोसॉफ्ट और गूगल ने यूएई और सऊदी जैसे देशों में विशाल डाटा सेंटर बनाए हैं। वे सभी सक्रिय हैं। ये सब इन्हीं समुद्री केबलों से जुड़े हुए हैं। यानी दुनिया की डिजिटल जिंदगी इन्हीं पर टिकी हैं।