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ईरान युद्ध के बीच भारतीय सेना ने तैयार कर लिया बड़ा प्लान, तेल और गैस की कमी यूं निपटेगी आर्मी

ईरान युद्ध के बीच पैदा हुए गैस और तेल संकट को देखते हुए सेना ने बड़ा प्लान तैयार कर लिया है। पहले के मुताबिक गैस के खर्च में भी कटौती की गई है और बायोगैस का इस्तेमाल बढ़ाया गया है। इसके अलावा सेना के वाहनों के शेड्यूल में भी परिवर्तन किया जा रहा है।

Mon, 20 April 2026 08:03 AMAnkit Ojha लाइव हिन्दुस्तान
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ईरान युद्ध के बीच भारतीय सेना ने तैयार कर लिया बड़ा प्लान, तेल और गैस की कमी यूं निपटेगी आर्मी

ईरान युद्ध के चलते तेल और गैस संकट के बीच भारतीय सेना ने आगे का पूरा प्लान तैयार कर लिया है। भारतीय सेना एलपीजी और फ्यूल में काफी कटौती करके वैकल्पिक रास्ता अपना रही है। अगले महीने से यह एक मिशन के स्तर पर शुरू हो जाएगा। सेना बायोगैस और सोलर जैसे वैकल्पिक ऊर्जा के साधनों का उपयोग कर रही है।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक सेना ने बायोगैस स्टोव्स खरीदने का ऑर्डर जारी कर दिया है। इसके अलावा सेना के जवानों का मूवमेंट 400 किलोमीटर के अंदर ही सीमित किया जाएगा जिससे फ्यूल बचाया जा सके। अधिकारी ने बताया. बिना किसी ऑपरेशनल क्षमता को कम किए सेना के वाहनों का आवागमन सीमित किया जा रहा है। वाहनों की पूलिंग, एक साथ कई काम निपटाने की योजना भी तैयार की गई है। जिससे कि फ्यूल के खर्च को कम किया जा सके।

अधिकारियों ने बताया कि इलेक्ट्रिक गाड़ियों और सीएनजी का इस्तेमाल बढ़ाया जाएगा। कुछ चीजें लागू हो गई हैं और वहीं फ्यूल बचाने के लिए कुछ नियम अगले एक दो हफ्ते में लागू हो जाएंगे। अधिकारियों ने बाताया कि सेना से संबंधित उड़ानों को भी सीमित किया जाएगा। जिससे सेना की क्षमता को प्रभावित किए बिना फ्यूल बचाया जा सके।

बड़ी संख्या में सोलर प्लांट और पवन चक्की लगाएगी सेना

आंकड़ों के मुताबिक सेना में रोज करीब 1,56,000 किलो कुकिंग गैस खर्च होती है। बायोगैस के इस्तेमाल से इसमें से 20 फीसदी गैस को बचाया जा सकता है। इसके अलावा सेना के पास करीब 2 लाख वाहन हैं। ऐसे में बड़ी मात्रा में फ्यूल रोज वाहनों में भी खर्च होता है। इसके अलावा सेना का प्लान है कि खाली पड़े इलाके में अगले पांच साल में बड़ी संख्या में पवन चक्की और सोलर प्लांट लगाए जाएं।

होर्मुज पार कर निकाल भारतीय टैंकर

भारत के ध्वज वाले एक तेल के टैंकर ने होर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित पार कर लिया। भारतीय टैंकर ने इस तनाव ग्रस्त जलमार्ग को ऐसे समय पार किया है, जब दो अन्य भारतीय जहाजों को गोलीबारी के बाद वापस लौटने के लिए मजबूर होना पड़ा था और भारत ने वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा को लेकर अपनी चिंता को ईरान के साथ साझा किया था। पश्चिम एशिया में हो रहे घटनाक्रमों पर सरकार द्वारा दी गई अद्यतन जानकारी के मुताबिक, कच्चे तेल से भरा टैंकर देश गरिमा 18 अप्रैल को रणनीतिक जलमार्ग को पार कर गया और 22 अप्रैल को मुंबई पहुंचने की उम्मीद है। इस जहाज पर 31 भारतीय नाविक सवार थे।