ईरान ने चंदा जुटाकर खरीदीं 40 टन दवाएं, भारत में फंसी; अमेरिका ने विमान ही उड़ा दिया
भारत में खरीदी गई 40 टन जीवनरक्षक दवाएं दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास में फंसी हैं। मशहद एयरपोर्ट पर अमेरिकी-इजरायली हमले में कार्गो विमान के नष्ट होने से यह खेप रुक गई है। जानिए पूरा मामला।

ईरानी दूतावास ने भारत में जुटाए गए दान का इस्तेमाल कर 40 टन दवाएं खरीद ली हैं, लेकिन युद्ध की वजह से इन्हें ईरान भेजने का रास्ता बंद हो गया है। इन दवाओं का कंसाइनमेंट फिलहाल नई दिल्ली में ईरानी दूतावास के पास पड़ा है। पिछले कई दिनों से जम्मू और कश्मीर सहित भारत के अन्य हिस्सों से ईरान के लिए भारी चंदा जुटाया गया है।
'द इंडियन एक्सप्रेस' को एक अधिकारी ने बताया कि पिछले हफ्ते मशहद हवाई अड्डे पर हुए एक हवाई हमले में 'महान एयर' का वह विमान क्षतिग्रस्त हो गया था। इस विमान को दवाइयों की खेप को लेने के लिए भारत आना था। इस घटना के बाद से दूतावास लगातार इन दवाओं को अपने देश भेजने का कोई वैकल्पिक रास्ता तलाश रहा है।
हमले और वैकल्पिक मार्ग की तलाश
अधिकारी ने बताया- अमेरिकी-इजरायली बलों द्वारा जिस विमान पर हमला किया गया, उसे दूतावास द्वारा खरीदी गई 40 टन दवाओं का कार्गो लेने के लिए नई दिल्ली आना था। हम अब कोई दूसरी व्यवस्था करने की कोशिश कर रहे हैं, जो मौजूदा परिस्थितियों में बिल्कुल भी आसान नहीं है। उन्होंने आगे जानकारी दी कि इससे पहले भारत में खरीदी गई दवाओं की दो छोटी खेप अर्मेनियाई मार्ग से तेहरान भेजी गई थीं। 40 टन वाली यह खेप दवाओं की सबसे बड़ी शिपमेंट है, जिसकी इस वक्त देश (ईरान) को तत्काल आवश्यकता है।
ईरान में दवाओं की कमी का संकट
अधिकारी के मुताबिक, युद्ध के बीच भारत में जुटाए गए चंदे का इस्तेमाल इन दवाओं की खरीद के लिए किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि पिछले कुछ दिनों में ईरान में दवा कंपनियों (फार्मास्युटिकल कंपनियों) और इससे जुड़ी सुविधाओं को निशाना बनाया गया है, जिसकी वजह से वहां दवाओं की भारी किल्लत होने की चिंता सता रही है।
ईरान ने इसे बताया 'युद्ध अपराध'
30 मार्च को, ईरानी दूतावास ने तेहरान के नागरिक उड्डयन संगठन के हवाले से एक बयान में कहा कि दवाओं और चिकित्सा उपकरणों को ले जाने वाले ईरानी विमान पर हमला करना एक युद्ध अपराध है और यह अंतरराष्ट्रीय कानून का स्पष्ट रूप से उल्लंघन है।
चंदा इकट्ठा करने के नियम और भारत की भूमिका
नई दिल्ली में एक आधिकारिक सूत्र ने बताया कि ईरान ने इन फंड्स का इस्तेमाल भारत में दवाएं खरीदने के लिए करने की इच्छा जताई थी, जिसके लिए उन्हें अनुमति दे दी गई थी। दरअसल 'वियना कन्वेंशन' विदेशी मिशनों द्वारा चंदा इकट्ठा करने के मुद्दे पर स्पष्ट रूप से कुछ नहीं कहता, लेकिन यह मेजबान देश को उन्हें बैंकिंग अधिकार देने का निर्देश जरूर देता है।
नियमों के तहत दूतावासों को दान प्राप्त करने के लिए अपने मुख्य (प्राइमरी) बैंक खातों का इस्तेमाल करने की मनाही होती है। जिसके बाद शुरुआत में, ईरानी दूतावास ने अपने मुख्य बैंक खाते के माध्यम से ही दान मांगा था, लेकिन बाद में नियमों का पालन करते हुए इस विशेष उद्देश्य के लिए भारतीय स्टेट बैंक (SBI) में एक अलग खाता खोला गया। इसके अलावा, भारत सरकार ने भी हाल ही में मानवीय दृष्टिकोण दिखाते हुए अपनी तरफ से ईरान को दवाओं की एक खेप भेजी है।




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