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बंगाल चुनाव खत्म होते ही I-PAC डायरेक्टर विनेश चंदेल को मिली बेल, ED ने नहीं किया विरोध

बंगाल चुनाव खत्म होने के ठीक एक दिन बाद I-PAC डायरेक्टर विनेश चंदेल को मनी लॉन्ड्रिंग और कोयला घोटाला मामले में अदालत से जमानत मिल गई है। गिरफ्तारी और रिहाई की टाइमिंग पर उठ रहे सवालों के बीच पढ़ें पूरी खबर।

Thu, 30 April 2026 11:01 AMAmit Kumar लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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बंगाल चुनाव खत्म होते ही I-PAC डायरेक्टर विनेश चंदेल को मिली बेल, ED ने नहीं किया विरोध

इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (I-PAC) के डायरेक्टर विनेश चंदेल को गुरुवार को दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जमानत दे दी। कोर्ट ने यह भी कहा कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने चंदेल की जमानत का विरोध नहीं किया है। कोर्ट ने उन्हें नियमित जमानत दे दी है। इस पूरे घटनाक्रम में सबसे अधिक ध्यान खींचने वाली बात जमानत की टाइमिंग है। चंदेल को यह राहत पश्चिम बंगाल में मतदान खत्म होने के ठीक अगले दिन मिली है।

ED ने नहीं किया विरोध

अदालत ने सुनवाई के दौरान इस बात पर गौर किया कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने चंदेल की जमानत याचिका का विरोध नहीं किया। मामले के जांच अधिकारी ने अदालत को बताया कि विनेश चंदेल जांच के दौरान 'स्वेच्छा से और उद्देश्यपूर्ण तरीके से' जांच एजेंसी का सहयोग कर रहे हैं। हालांकि, ईडी ने अदालत से यह जरूर कहा कि जमानत देते समय चंदेल पर कुछ शर्तें लगाई जानी चाहिए।

अदालत द्वारा लगाई गई शर्तें

जमानत देते हुए अदालत ने विनेश चंदेल पर कुछ शर्तें लगाई हैं:

  • वह मामले से जुड़े सबूतों के साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ नहीं करेंगे।
  • वह गवाहों को डराने या प्रभावित करने की कोई कोशिश नहीं करेंगे।
  • उन्हें जांच में पूरी तरह सहयोग करना होगा और मांगे जाने पर सभी जरूरी विवरण (डिटेल्स) मुहैया कराने होंगे।
  • उन्हें हमेशा जांच एजेंसी की पहुंच में रहना होगा।

विनेश चंदेल को नियमित जमानत मिलने से ठीक पहले कानूनी मोर्चे पर एक झटका लगा था। बीते मंगलवार (28 अप्रैल) को दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट की अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश शेफाली बरनाला टंडन ने उनकी अंतरिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी। चंदेल ने अपनी 74 वर्षीय मां (जो डिमेंशिया से पीड़ित हैं) की बिगड़ती सेहत का हवाला देते हुए अंतरिम राहत मांगी थी, लेकिन कोर्ट ने कहा था कि पीएमएलए जैसे गंभीर आर्थिक अपराधों में केवल सामान्य मानवीय आधार राहत के लिए पर्याप्त नहीं हैं। हालांकि, उनकी नियमित जमानत याचिका अदालत में लंबित थी, जिस पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने अब उन्हें जमानत दे दी है।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला पश्चिम बंगाल में ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ECL) के लीज क्षेत्रों में अवैध कोयला खनन और बिक्री से जुड़ा है। मूल रूप से सीबीआई द्वारा दर्ज किए गए मामले के आधार पर ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की थी।

ईडी का आरोप है कि राजनीतिक परामर्श फर्म आई-पैक करोड़ों रुपये की 'अपराध आय' की लॉन्ड्रिंग में शामिल थी, जिसमें अब तक लगभग 50 करोड़ रुपये के सुराग मिले हैं। जांच एजेंसी का दावा है कि कंपनी ने औपचारिक बैंकिंग चैनलों और बेहिसाब कैश के बीच रसीदों को बांटकर एक स्ट्रक्चर्ड वित्तीय लेनदेन किया। ईडी के मुताबिक, इस बेहिसाब पैसे का इस्तेमाल कथित तौर पर चुनाव संबंधी खर्चों और राजनीतिक लाभ के लिए जनधारणा को प्रभावित करने में किया गया। नेशनल लॉ इंस्टीट्यूट यूनिवर्सिटी (NLIU) भोपाल से कानून के स्नातक विनेश चंदेल की इस कंपनी में 33 प्रतिशत की हिस्सेदारी है।

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विनेश चंदेल को 13 अप्रैल की देर शाम कई घंटों की पूछताछ के बाद गिरफ्तार किया गया था। यह गिरफ्तारी ऐसे समय में हुई थी जब पश्चिम बंगाल में चुनाव बिल्कुल सिर पर थे। उनकी गिरफ्तारी को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई थी; तृणमूल कांग्रेस (TMC) सहित कई राजनीतिक दलों ने इसे "चुनावी तोड़फोड़" और चुनाव से पहले दबाव बनाने की रणनीति करार दिया था।