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गैस की किल्लत के बीच रेलवे का बड़ा फैसला, ट्रेनों में नहीं मिलेगा पका हुआ भोजन?

पश्चिम एशिया संकट के कारण भारत में गैस की कमी हो गई है। इसका असर रेलवे पर पड़ा है; IRCTC ने स्टेशनों पर इंडक्शन और माइक्रोवेव से खाना पकाने के निर्देश दिए हैं और ट्रेनों में भोजन सेवा अस्थायी रूप से बंद हो सकती है।

Wed, 11 March 2026 02:07 PMAmit Kumar लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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गैस की किल्लत के बीच रेलवे का बड़ा फैसला, ट्रेनों में नहीं मिलेगा पका हुआ भोजन?

पश्चिम एशिया (मध्य पूर्व) में चल रहे तनाव और संघर्ष के कारण भारत में तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) और एलपीजी की सप्लाई प्रभावित हुई है। इस संकट को देखते हुए भारतीय रेलवे ने बड़े बदलाव किए हैं और केंद्र सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं को सुरक्षित रखने के लिए कड़े कदम उठाए हैं।

रेलवे का नया निर्देश: इंडक्शन और माइक्रोवेव का होगा इस्तेमाल

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय रेलवे खानपान एवं पर्यटन निगम (IRCTC) ने अपने सभी लाइसेंसधारकों को निर्देश दिया है कि वे खाना पकाने के लिए गैस के बजाय माइक्रोवेव ओवन और इलेक्ट्रिक इंडक्शन सिस्टम जैसे वैकल्पिक तरीकों का इस्तेमाल करें। यह नियम रेलवे स्टेशनों पर मौजूद सभी फूड प्लाजा, रिफ्रेशमेंट रूम और 'जन आहार' आउटलेट्स पर लागू होगा।

ट्रेनों में भोजन सेवा पर असर, रिफंड की तैयारी

ट्रेनों की पैंट्री कार मुख्य रूप से खाना गर्म करने और बांटने का काम करती हैं और सुरक्षा कारणों से वहां एलपीजी सिलेंडर नहीं रखे जाते। लेकिन, स्टेशनों के 'बेस किचन' (जहां असल में भारी मात्रा में खाना बनता है) में एलपीजी की कमी के कारण लंबी दूरी की ट्रेनों के लिए भोजन तैयार करना मुश्किल हो रहा है। रेलवे अधिकारी ट्रेनों में पके हुए भोजन की सेवा को अस्थायी रूप से निलंबित करने पर विचार कर रहे हैं। जिन यात्रियों ने टिकट बुक करते समय भोजन के लिए पहले ही भुगतान कर दिया है, उन्हें पैसे वापस करने की योजना बनाई जा रही है।

सरकार का आश्वासन: घरेलू उपभोक्ताओं के लिए कोई कमी नहीं

केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने मंगलवार को जनता को आश्वस्त किया कि वैश्विक संकट के बावजूद देश में ऊर्जा की कमी नहीं होगी।

CNG और PNG की पूरी गारंटी: मंत्री ने 'X' पर पोस्ट करते हुए बताया कि घरों में इस्तेमाल होने वाली पीएनजी और वाहनों के लिए सीएनजी (CNG) की 100% आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए गए हैं। अन्य उद्योगों को भी उनकी जरूरत का 70-80% ईंधन मिलता रहेगा, इसलिए देश में घबराने (Panic) की कोई आवश्यकता नहीं है। ऊर्जा का आयात अलग-अलग स्रोतों और वैकल्पिक रास्तों से लगातार जारी है।

'आवश्यक वस्तु अधिनियम' लागू

घरेलू ऊर्जा बाजार को सुरक्षित रखने और सप्लाई की कमी को मैनेज करने के लिए केंद्र सरकार ने 'आवश्यक वस्तु अधिनियम' लागू कर दिया है। इस नई व्यवस्था के तहत घरेलू और वाहन उपयोग (PNG/CNG) के लिए तो पूरी गैस मिलेगी, लेकिन अन्य सेक्टर्स को पिछले 6 महीनों की उनकी औसत खपत के आधार पर एक तय सीमा में ही ईंधन दिया जाएगा।

संकट का मुख्य कारण

भारत अपनी प्राकृतिक गैस का लगभग 30% हिस्सा 'होर्मुज जलडमरूमध्य' के रास्ते से मंगाता है। पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध और क्षेत्रीय संघर्ष के कारण इस रूट पर आवाजाही में भारी लॉजिस्टिक चुनौतियां आ रही हैं, जिस वजह से यह सप्लाई चेन प्रभावित हुई है।

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