Indian Navy issues statement on Iris Dena says ship sent for help after emergency call श्रीलंका के पास अमेरिकी हमले में डूबे ईरानी जहाज की भारतीय नेवी ने की थी मदद, भेजा था जहाज, India News in Hindi - Hindustan
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श्रीलंका के पास अमेरिकी हमले में डूबे ईरानी जहाज की भारतीय नेवी ने की थी मदद, भेजा था जहाज

ईरानी जहाज के डूबने पर भारतीय नौसेना ने बयान जारी किया है। नौसेना की तरफ के कहा गया कि ईरानी युद्धपोत से मिले इमरजेंसी संदेश के बाद एक बचाव दल को भेजा गया था।

Thu, 5 March 2026 08:26 PMUpendra Thapak लाइव हिन्दुस्तान
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श्रीलंका के पास अमेरिकी हमले में डूबे ईरानी जहाज की भारतीय नेवी ने की थी मदद, भेजा था जहाज

अमेरिकी पनडुब्बी के हमले के बाद हिंद महासागर की गहराइयों में समाए ईरानी युद्धपोत को लेकर भारतीय नौसेना ने बचाव अभियान शुरू किया था। नौसेना द्वारा कहा गया कि इस घटना की सूचना मिलते ही भारतीय नौसेना ने तुरंत खोज और बचाव अभियान (SAR) शुरू किया। इसके तहत 4 मार्च 2026 को सुबह 10 बजे एक लंबी दूरी का समुद्री गश्ती विमान भेजा गया, ताकि श्रीलंका के नेतृत्व में चल रहे खोज अभियान में मदद मिल सके।

नौसेना की तरफ से जारी बयान में कहा गया कि गश्ती जहाज को भेजने के अलावा हवा से गिराए जा सकने वाली लाइफ राफ्ट के साथ-साथ एक एयरफ्राफ्ट को भी तैयार रखा गया था। घटनास्थल के पास मौजूद आईएनएस ताराणगिनी को भी बचाव कार्य को तेजी के साथ पूरा करने के लिए भेजा गया था, हमारा यह जहाज शाम को 4 बजे घटनास्थल पर पहुंच गया था। घटना की गंभीरता को देखते हुए इन बचाव अभियानों के अलावा नौसेना ने कोच्चि तट पर मौजूद आईएनएस इच्छक को भी रवाना किया था, ताकि जो ईरानी नाविक लापता हैं, उनको ढूंढ़ने के अभियान में और भी ज्यादा तेजी लाई जा सके। यह जहाज अभी भी इस दुर्घटना में लापता हुए लोगों की तलाश को जारी रखे हुए है।

नौसेना ने बताया कि घटनास्थल से श्रीलंकाई नौसेना की मौजूदगी नजदीक थी। इसलिए इमरजेंसी कॉल मिलने के बाद, जब तक हमारी मदद वहां पर पहुंचती उसके पहले ही श्रीलंका ने अभियान शुरू कर दिया था। हमारे जहाजों ने भी वहां पहुंचकर अभियान को तेजी से पूरा करने में मदद की। अभी भी लापता लोगों की खोज के लिए अभियान चलाया जा रहा है।

गौरतलब है कि ईरान के युद्धपोत आईआरआईएस डेना विशाखापट्टनम में फ्लीट रिव्यू अभ्यास का हिस्सा लेने के लिए भारत आया था। इसी दौरान अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान पर हमला करके जंग शुरू कर दी। यह युद्धपोत भारत की जल सीमा से निकल अंतर्राष्ट्रीय जल क्षेत्र में घूम रहा था। इसी दौरान अमेरिकी पनडुब्बी की तरफ से टॉपपीडो दागकर इसे हिंद महासागर की गहराइयों में समाने के लिए मजबूर कर दिया। इस हमले में 80 से ज्यादा लापता ईरानी नौसैनिकों के मृत मान लिया गया है। हालांकि, अभी भी तलाश अभियान जारी है।

अमेरिका की तरफ से पीथ हेगसेथ ने इस हमले की जिम्मेदारी ली और इसे अमेरिकी नौसेना की जीत करार दिया। हालांकि ईरानी विदेश मंत्री ने इस युद्धपोत को भारत का मेहमान बताते हुए कहा कि इस पर हमला करना अमेरिका का समुद्र में किया गया अत्याचार है। इसके साथ ही अराघची ने चेतावनी देते हुए कहा कि जल्दी ही अमेरिका को अपने इस कारनामे का पछतावा होगा।

भारत में भी विपक्ष ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर इस घटना को लेकर जमकर निशाना साधा। विपक्ष की तरफ से कहा गया कि वह युद्धपोत भारत में हुए युद्धाभ्यास में हिस्सा लेने के लिए आया था। उसको हमारे प्रभुत्व वाले क्षेत्र में डुबोया गया है। इसके बाद भी भारत सरकार इस पर चुप्पी क्यों साधे हुए है? इस घटनाक्रम के बाद विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अपने ईरानी समकक्ष से बात की और विदेश सचिव ने नई दिल्ली की ईरानी एम्बेसी में जाकर मृत ईरानी सुप्रीम लीडर को श्रद्धांजलि दी।