India will build its own space station ISRO has started working on it when it will be ready भारत बनाएगा अपना स्पेस स्टेशन, ISRO ने शुरू किया काम; जानें कब तक होगा तैयार, India News in Hindi - Hindustan
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भारत बनाएगा अपना स्पेस स्टेशन, ISRO ने शुरू किया काम; जानें कब तक होगा तैयार

जो कंपनियां इस ऐतिहासिक प्रोजेक्ट का हिस्सा बनना चाहती हैं उनके लिए कुछ शर्तें रखी गई हैं। कम से कम 5 साल का एरोस्पेस निर्माण का अनुभव हो। पिछले 3 वर्षों में औसत वार्षिक टर्नओवर कम से कम 50 करोड़ हो।

Sat, 24 Jan 2026 11:11 AMHimanshu Jha लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली।
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भारत बनाएगा अपना स्पेस स्टेशन, ISRO ने शुरू किया काम; जानें कब तक होगा तैयार

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) अंतरिक्ष विज्ञान की दुनिया में एक और छलांग लगाने की तैयार कर रहा है। स्पेस एजेंसी ने अपनी अब तक की सबसे महत्वाकांक्षी परियोजना भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (BAS) की नींव रख दी है। भारतीय उद्योग जगत को साथ आने का न्योता दिया है। यह कदम भारत को उन चुनिंदा देशों की कतार में खड़ा कर देगा जिनके पास अंतरिक्ष में अपना स्थायी ठिकाना (स्टेशन) है। विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र (VSSC) ने भारतीय कंपनियों के लिए 'एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट' (EoI) जारी किया है। इसके जरिए निजी क्षेत्र की कंपनियों को अंतरिक्ष स्टेशन के पहले मॉड्यूल, BAS-01 के निर्माण के लिए आमंत्रित किया गया है।

सीएनएन न्यूज-18 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पहले चरण की शुरुआत 2028 में होगी। इसमें अंतरिक्ष स्टेशन के पहले मॉड्यूल (BAS-01) को लॉन्च करने का लक्ष्य रखा गया है। 2035 तक इसे पूर्ण कर लिया जाएगा। सभी 5 मॉड्यूल्स के साथ स्टेशन पूरी तरह तैयार हो जाएगा। यह पृथ्वी की निचली कक्षा में लगभग 400-450 किमी की ऊंचाई पर स्थापित होगा। शुरुआत में यह 3-4 अंतरिक्ष यात्रियों को ठहराने और वहां वैज्ञानिक प्रयोग करने में सक्षम होगा।

ISRO ने भारतीय कंपनियों के लिए कड़े मानक तय किए हैं, क्योंकि यह मॉड्यूल इंसानों के रहने योग्य होगा। प्रत्येक मॉड्यूल 3.8 मीटर व्यास और 8 मीटर ऊंचा होगा। इसका निर्माण उच्च शक्ति वाले एल्युमिनियम मिश्र धातु (AA-2219) से किया जाएगा। निर्माण में 0.5 मिलीमीटर की भी गलती स्वीकार्य नहीं होगी। कंपनियों को विशेष वेल्डिंग और फैब्रिकेशन तकनीक विकसित करनी होगी। ISRO ने स्पष्ट किया है कि यह पूरी तरह भारतीय प्रयास होगा। इसमें किसी भी विदेशी सहायता या आउटसोर्सिंग की अनुमति नहीं होगी।

जो कंपनियां इस ऐतिहासिक प्रोजेक्ट का हिस्सा बनना चाहती हैं उनके लिए कुछ शर्तें रखी गई हैं। कम से कम 5 साल का एरोस्पेस निर्माण का अनुभव हो। पिछले 3 वर्षों में औसत वार्षिक टर्नओवर कम से कम 50 करोड़ हो। आवेदन करने की अंतिम तिथि 8 मार्च 2026 तय की गई है।

यह परियोजना केवल एक स्टेशन बनाने तक सीमित नहीं है। यह भारत के गगनयान मिशन का अगला चरण है। इसके जरिए भारत माइ्रोग्रैविटी रिसर्च के क्षेत्र में आगे बढ़ेगा। इसके तहत दवाओं, कृषि और सामग्री विज्ञान में उन्नत शोध कर सकेगा। वर्तमान में दुनिया ISS (International Space Station) पर निर्भर है, लेकिन BAS भारत को रणनीतिक स्वायत्तता देगा। यह स्टेशन भविष्य में चंद्रमा पर मानव भेजने के मिशन के लिए एक 'ट्रांजिट हब' के रूप में काम करेगा।