बांग्लादेश के चटगांव में पहुंच गए 'मेड इन इंडिया' हथियार? भारत सरकार का जवाब जानिए
बांग्लादेश के चटगांव हिल ट्रैक्स में भारतीय गोला-बारूद मिलने के मीडिया दावों पर भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने प्रतिक्रिया दी है। जानिए इस असत्यापित रिपोर्ट की पूरी सच्चाई और भारतीय आयुध कारखानों पर भारत का आधिकारिक बयान।

हाल ही में, बांग्लादेश की मीडिया में ऐसी खबरें आई हैं जिनमें दावा किया गया है कि बांग्लादेश के संवेदनशील इलाके चटगांव हिल ट्रैक्स में ऐसा गोला-बारूद मिला है जो भारत में बना है। इन दावों पर भारत सरकार ने बहुत ही सतर्क और सधी हुई प्रतिक्रिया दी है। भारत ने इसे असत्यापित मीडिया रिपोर्ट करार देते हुए इस पर सीधे तौर पर कुछ भी कहने से इनकार कर दिया है।
भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) का आधिकारिक बयान
गुरुवार को आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इस मुद्दे पर भारत का रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा, 'असत्यापित मीडिया रिपोर्टों पर टिप्पणी करना उचित नहीं होगा। यह ध्यान में रखा जाना चाहिए कि सभी भारतीय ऑर्डिनेंस फैक्ट्रियां सख्त नियमों के तहत काम करती हैं और कड़े जवाबदेही मानदंडों द्वारा संचालित होती हैं।'
भारतीय हथियार निर्माण की सख्त व्यवस्था
भारतीय अधिकारियों ने इस बात पर जोर दिया है कि भारत का ऑर्डिनेंस (हथियार और गोला-बारूद) निर्माण इकोसिस्टम बहुत ही कड़ी विनियामक निगरानी में काम करता है। इसके उत्पादन, हिसाब-किताब और वितरण के स्तर पर सख्त नियंत्रण रखा जाता है। अधिकारियों का सीधा संकेत यह था कि यदि कोई गोला-बारूद अवैध रूप से कहीं पहुंचता भी है, तो वह भारत के आधिकारिक और अधिकृत सिस्टम के बाहर की गतिविधि है।
चटगांव हिल ट्रैक्स की भौगोलिक और सुरक्षा स्थिति
चटगांव हिल ट्रैक्स एक बेहद संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्र है, जिसकी सीमाएं भारत और म्यांमार से लगती हैं। हालांकि 1997 में इस क्षेत्र के लिए एक शांति समझौता हुआ था, लेकिन इसके बावजूद यहां छिटपुट विद्रोही गतिविधियां होती रहती हैं। बांग्लादेश के सुरक्षा बलों ने इस क्षेत्र में काम करने वाले कई उग्रवादी संगठनों, जिनमें कुकी-चिन नेशनल फ्रंट (KNF) जैसे समूह शामिल हैं, के पास से समय-समय पर हथियार और गोला-बारूद बरामद किए हैं।
भारत और बांग्लादेश के बीच सुरक्षा सहयोग
भारत और बांग्लादेश के बीच सुरक्षा के मोर्चे पर, विशेषकर उग्रवाद से निपटने और सीमा पार की उग्रवादी गतिविधियों को रोकने के लिए, बहुत करीबी सहयोग है। दोनों देशों ने हमेशा से इस बात को दृढ़ता से दोहराया है कि वह अपनी धरती का इस्तेमाल कभी भी ऐसी किसी गतिविधि के लिए नहीं होने देंगे जो भारत-बांग्लादेश के हितों के खिलाफ हो या उसे नुकसान पहुंचाए।




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