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भारत-पाकिस्तान के बीच जारी है 'ट्रैक-2' वार्ता! कतर में हुई बैठक; क्या है पर्दे के पीछे की कूटनीति?

विवादों और कूटनीतिक गतिरोध के बीच देशों को करीब लाने में 'ट्रैक-2' कूटनीति कैसे काम करती है? भारत-पाकिस्तान, चीन और कनाडा के संदर्भ में पर्दे के पीछे होने वाली इस खामोश बातचीत के महत्व और इतिहास को विस्तार से समझें।

Fri, 3 April 2026 07:35 AMAmit Kumar लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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भारत-पाकिस्तान के बीच जारी है 'ट्रैक-2' वार्ता! कतर में हुई बैठक; क्या है पर्दे के पीछे की कूटनीति?

भारत और पाकिस्तान के बीच आधिकारिक राजनयिक संबंध ठंडे पड़े हुए हैं, लेकिन दोनों देशों के बीच अनौपचारिक 'ट्रैक 2' चैनल पूरी तरह सक्रिय हैं। फरवरी 2026 में दोहा (कतर) में भारतीय और पाकिस्तानी प्रतिनिधियों की एक महत्वपूर्ण बैठक हुई, जिसमें दोनों पक्षों ने अनौपचारिक चर्चा की। भारतीय और पाकिस्तानी प्रतिनिधियों ने 'ट्रैक-2' वार्ता के तहत यह मुलाकात की। पाकिस्तान समर्थित आतंकियों द्वारा किए गए पहलगाम हमले के बाद दोनों देशों के संबंधों में और भी तल्खी देखी गई है। हालांकि, दोहा में हुई यह बातचीत हाल के महीनों में अपनी तरह की पहली वार्ता नहीं थी। भारत और पाकिस्तान के बीच 'बैक-चैनल' यानी ट्रैक-2 कूटनीति का यह सिलसिला दशकों से जारी है। एक समय ऐसा भी था जब दोनों देशों के बीच इस तरह के लगभग 20 संवाद एक साथ चल रहे थे।

ट्रैक-2 कूटनीति क्या है और यह कैसे काम करती है?

WION की रिपोर्ट के मुताबिक, जब आधिकारिक संबंध टूट जाते हैं, तो इन बैठकों से मिलने वाले इनपुट स्थिति का आकलन करने में मदद करते हैं। इन बैठकों के बाद कोई प्रेस विज्ञप्ति या बयान जारी नहीं किया जाता। सबसे बड़ी बात यह है कि कोई भी आधिकारिक तौर पर इनकी पुष्टि या खंडन नहीं करता है। 'ट्रैक-2' शब्द 1981 में अमेरिकी राजनयिक जोसेफ मोंटविले द्वारा गढ़ा गया था। भारत-पाक के बीच अतीत में 'नीमराणा संवाद' सबसे लंबे समय तक चलने वाले ट्रैक-2 संवादों में से एक रहा है।

कौन होता है शामिल, ट्रैक-1 और ट्रैक-1.5 से क्या अलग?

यह गैर-अधिकारियों, जैसे कि पूर्व अधिकारियों, पत्रकारों, व्यापारिक नेताओं और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों के बीच होने वाली अनौपचारिक बातचीत है। राजनीति और मीडिया की चकाचौंध से दूर रहकर विश्वास कायम करना, नए विचारों को परखना और आपसी समझ के लिए जगह बनाना इस वार्ता का लक्ष्य होता है। 'ट्रैक-1' (जैसे कैंप डेविड समझौता) पूरी तरह से औपचारिक सरकार-से-सरकार वार्ता है। 'ट्रैक-1.5' दोनों का मिला-जुला रूप है, जिसमें सेवारत अधिकारी अनौपचारिक रूप से बाहरी लोगों के साथ मिलते हैं।

दुनिया भर में जब भी देशों के संबंध बिगड़ते हैं, तो कूटनीति का यही तरीका अपनाया जाता है। उदाहरण के लिए, 1993 के ओस्लो समझौते के शुरुआती चरण में नॉर्वे के अंदर इजरायली शिक्षाविदों और पीएलओ (PLO) प्रतिनिधियों के बीच ऐसी ही अनौपचारिक बैठकें हुई थीं।

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वैश्विक मंचों पर भारत की ट्रैक-2 कूटनीति के परिणाम

भारत ने न केवल पाकिस्तान, बल्कि अन्य वैश्विक मामलों में भी पर्दे के पीछे की इस कूटनीति का सफलतापूर्वक इस्तेमाल किया है।

चीन के साथ बर्फ पिघलने के संकेत

रिपोर्ट के मुताबिक, 2020 की हिंसक गलवान घाटी झड़प के बाद भारत और चीन ने अधिकांश आधिकारिक संपर्कों को रोक दिया था। लेकिन 'ट्रैक-2' वार्ताओं ने संचार के रास्ते खुले रखे। इसके परिणामस्वरूप 2025 में तियानजिन में एससीओ (SCO) शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात हुई। पांच साल के अंतराल के बाद अक्टूबर 2025 में दोनों देशों के बीच सीधी उड़ानें फिर से शुरू हुईं और सीमा पार व्यापार व जनसंपर्क भी धीरे-धीरे बहाल हो रहे हैं। इस साल ब्रिक्स (BRICS) सम्मेलन के लिए शी जिनपिंग के भारत आने की भी संभावना है।

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रूस-यूक्रेन युद्ध में मध्यस्थता के प्रयास

2022 में यूक्रेन युद्ध शुरू होने पर, भारत ने यूरोपीय देशों, रूसियों और यूक्रेनियन के साथ 'ट्रैक-2' और 'ट्रैक-1.5' मंचों पर चुपचाप बातचीत की। नई दिल्ली ने सार्वजनिक रूप से अपनी 'रणनीतिक स्वायत्तता' बनाए रखी, जबकि पूर्व अधिकारियों ने मानवीय समाधान और तनाव कम करने के विकल्पों की तलाश की।

कनाडा के साथ संबंधों में सुधार

हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के आरोपों के बाद भारत-कनाडा संबंध अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए थे। लेकिन 'ट्रैक-1.5' कूटनीति के बाद दोनों देशों ने व्यावहारिकता दिखाई। जून 2025 में G7 और नवंबर में G20 के दौरान पीएम मोदी और कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की बैठकों ने संबंधों को स्थिर किया। 2026 की शुरुआत में कार्नी की भारत यात्रा से ठोस नतीजे निकले, जिसमें 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 50 अरब डॉलर तक ले जाने के लिए 'व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते' (CEPA) पर चर्चा शामिल है। दोनों देशों ने आर्थिक और रणनीतिक लाभ के लिए राजनीतिक मतभेदों को दरकिनार कर दिया है।