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हम अमेरिका-चीन के भरोसे नहीं रहना चाहते, भारत से फ्रांस के राष्ट्रपति का दो टूक संदेश

इमैनुएल मैक्रों ने भारत और फ्रांस की AI सनक का किया खुलासा। जानें कैसे भारत और फ्रांस मिलकर अमेरिका-चीन के AI दबदबे को चुनौती दे रहे हैं और AIIMS में खुले नए 'Indo-French AI Health Centre' के क्या हैं मायने।

Thu, 19 Feb 2026 07:06 AMAmit Kumar लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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हम अमेरिका-चीन के भरोसे नहीं रहना चाहते, भारत से फ्रांस के राष्ट्रपति का दो टूक संदेश

फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने बुधवार को भारत और फ्रांस के बीच मजबूत होते तकनीकी संबंधों पर जोर देते हुए कहा कि दोनों देश AI इनोवेशन को लेकर एक समान सनक रखते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत और फ्रांस अब अमेरिकी और चीनी मॉडलों पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहना चाहते और अपनी संप्रभु क्षमता विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

नई दिल्ली में AI इम्पैक्ट समिट और AIIMS में छात्रों से बातचीत के दौरान मैक्रों ने कहा- मुझे लगता है कि भारत और फ्रांस में एक ही जुनून है - और यूरोप में भी... कि हम अमेरिका या चीन के मॉडल पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहना चाहते। हमें एक व्यापक, संतुलित मॉडल की जरूरत है। हम समाधान का हिस्सा बनना चाहते हैं और हमारे प्लेयर्स को भी समाधान का हिस्सा बनना चाहिए।

रणनीतिक स्वायत्तता पर जोर

मैक्रों ने कहा कि वैश्विक AI परिदृश्य में केवल दर्शक बने रहने के बजाय, दोनों देश समाधान का हिस्सा बनना चाहते हैं। उन्होंने AI पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए तीन मुख्य स्तंभों पर निवेश की आवश्यकता बताई-

  1. कंप्यूटिंग क्षमता: पर्याप्त डेटा सेंटर और हाई-परफॉरमेंस कंप्यूटिंग बुनियादी ढांचे का निर्माण।
  2. टैलेंट: अपने ही देशों में विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों को प्रशिक्षित करना।
  3. पूंजी: नवाचार को गति देने के लिए आवश्यक वित्तीय निवेश।

राष्ट्रपति ने स्वीकार किया कि वर्तमान में अमेरिका और चीन इस दौड़ में आगे हैं, लेकिन भारत और फ्रांस मजबूती से इस प्रतिस्पर्धा में बने हुए हैं।

स्वास्थ्य सेवा में ऐतिहासिक सहयोग: IF-CAIH की शुरुआत

इस दौरे की सबसे बड़ी उपलब्धि 'इंडो-फ्रेंच सेंटर फॉर एआई इन हेल्थ' (IF-CAIH) का उद्घाटन रहा।

स्थान: अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS), नई दिल्ली।

उद्घाटन: केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा और राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों द्वारा।

साझेदार: यह केंद्र AIIMS दिल्ली, सोरबोन यूनिवर्सिटी और पेरिस ब्रेन इंस्टीट्यूट के बीच हुए एक संयुक्त समझौता ज्ञापन (MoU) के तहत स्थापित किया गया है। इसमें IIT दिल्ली का भी शैक्षणिक सहयोग शामिल है।

उद्देश्य: AI-संचालित अनुसंधान, चिकित्सा शिक्षा और क्लिनिकल नवाचार के माध्यम से जटिल स्वास्थ्य चुनौतियों का समाधान करना।

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने इस बात पर जोर दिया कि भारत और फ्रांस को एआई के क्षेत्र में आत्मनिर्भर क्षमता और प्रतिभा विकसित करनी चाहिए, ताकि इसका विकास मानवता के हित में हो और कुछ गिने-चुने वैश्विक शक्तियों पर अत्यधिक निर्भरता न रहे। जिम्मेदारी पूर्ण शासन पर जोर देते हुए मैक्रों ने कहा- बच्चों की मजबूत सुरक्षा, पूर्वाग्रह को दूर करने के लिए एल्गोरिद्म में पारदर्शिता और भाषाई तथा सांस्कृतिक विविधता को बनाए रखने के लिए एक मजबूत प्रतिबद्धता के साथ, एआई से मानवता की सेवा होनी चाहिए। ये ऐसे क्षेत्र हैं जहां भारत और फ्रांस एक जैसा दृष्टिकोण साझा करते हैं।

एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि यह डिजिटल स्वास्थ्य में भारत-फ्रांस के सहयोग में एक अहम मील का पत्थर है और समान तथा प्रौद्योगिकी वाले स्वास्थ्य समाधानों में वैश्विक नेता बनने के भारत के दृष्टिकोण को मजबूत करता है। केंद्र का उद्घाटन 'रेनकॉन्ट्रेस यूनिवर्सिटेयर्स ऐट साइंटिफिक्स डी हौट निव्यू' (रश) के साथ हुआ, जो 18-19 फरवरी को एम्स, दिल्ली में हो रही अकादमिक और वैज्ञानिक बैठकों की एक शृंखला है। इनका आयोजन फ्रांसीसी दूतावास के समन्वय से हो रहा है। 'रश 2026' के तहत मैक्रों और दो भारतीय युवा नवप्रवर्तकों- प्रियंका दास राजकाकती और मनन सूरी के बीच 'रश- कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर बातचीत' नाम की 30 मिनट की विशेष बातचीत हुई।