रावी के पानी पर भारत का 100% कंट्रोल, तरस रहा पाकिस्तान; सिंधू के बाद मोहरा से भी झटका
सिंधु बेसिन की तीन नदियों रावी, सतलुज एवं ब्यास से पाकिस्तान को 20 फीसदी पानी मिलता था। सिंधु बेसिन में जल रोकने और बांधों की क्षमता बढ़ाने से भारत में जल विद्युत उत्पादन तेजी से बढ़ रहा है।

पहलगाम की आतंकी घटना को एक साल बीत चुका है। इस कायराना हरकत के बाद पाकिस्तान को सबक सिखाने के लिए सिंधु जल समझौता को स्थगित करने के भारत के फैसले का असर अब स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। सिंधु बेसिन की नदियों के जल उपयोग पर बढ़ते नियंत्रण और तेजी से विकसित हो रही परियोजनाओं ने पाकिस्तान में जल संकट और आर्थिक दबाव को गहरा करना शुरू कर दिया है।
पिछले साल भारत ने फैसला तो लिया था, लेकिन तत्काल पानी रोकना संभव नहीं था। बीते एक साल में इतनी तैयारी हो गई है कि अब पाकिस्तान के लिए एक-एक दिन भारी पड़ने जा रहा है। अब भारत की दया से ही पाकिस्तान को पानी मिल सकेगा।
सिंधु बेसिन की तीन नदियों रावी, सतलुज एवं ब्यास से पाकिस्तान को 20 फीसदी पानी मिलता था। सिंधु बेसिन में जल रोकने और बांधों की क्षमता बढ़ाने से भारत में जल विद्युत उत्पादन तेजी से बढ़ रहा है।
मोहरा परियोजना पर काम
जम्मू-कश्मीर सरकार ने सिंधु, झेलम व चिनाब पर भी काम शुरू किया है। यहां से पाकिस्तान को जाने वाले 80% पानी में से लगभग आधे की गिरावट आ चुकी है। इसमें एक मोहरा परियोजना भी शामिल है। यहां बिजली ज्यादा नहीं बनेगी, लेकिन पानी पाक का रुकेगा।
पंजाब और जम्मू-कश्मीर की सीमा पर बने शाहपुर कंडी बांध के पूरा होने से रावी नदी के जल पर भारत का पूर्ण नियंत्रण स्थापित हो गया है, जिससे पानी को कठुआ और सांबा की ओर मोड़ा जा रहा है।




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