PM मोदी ने एक बार कहा था..., चाबहार पर भारत ने नहीं दिया 1 भी रुपया तो बोला ईरान
भारत पिछले कुछ वर्षों से ईरान के दक्षिणी तट पर स्थित सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत में जारी संपर्क परियोजना पर प्रतिवर्ष 100 करोड़ रुपये खर्च कर रहा है। चाबहार बंदरगाह के विकास में भारत एक प्रमुख साझेदार है।

भारत ने आम बजट में ईरान के चाबहार बंदरगाह परियोजना के लिए कोई भी राशि आवंटित नहीं की थी। अब इस मुद्दे को लेकर ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इस कदम को दिल्ली और तेहरान दोनों के लिए ही निराशाजनक बताया है। पिछले वर्ष के बजट में ईरान में बंदरगाह परियोजना के लिए 100 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे।
ईरान परेशान
इंडिया टुडे से बातचीत में अराघची ने कहा, 'खैर, मुझे लगता है कि यह भारत और ईरान दोनों के लिए ही निराशा की बात है।'
उन्होंने कहा, 'एक बार प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि चाबहार गोल्डन गेट है, जो हिंद महासागर क्षेत्र को मध्य एशिया, कॉकेसस और फिर यूरोप से जोड़ता है। यह बहुत ही रणनीतिक बंदरगाह है। अगर इसे पूरी तरह विकसित किया जाता है, तो यह भारत को ईरान के जरिए मध्य एशिया, कॉकेसस और फिर यूरोप से जोड़ने में अहम भूमिका निभा सकता है।'
भारत ने बजट में नहीं लिया नाम
1 फरवरी को जारी हुए देश के बजट में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ईरान के चाबहार बंदरगाह परियोजना के लिए धनराशि आवंटित नहीं की थी। भारत पिछले कुछ वर्षों से ईरान के दक्षिणी तट पर स्थित सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत में जारी संपर्क परियोजना पर प्रतिवर्ष 100 करोड़ रुपये खर्च कर रहा है। चाबहार बंदरगाह के विकास में भारत एक प्रमुख साझेदार है।
अमेरिका ने लगाया प्रतिबंध
पिछले वर्ष सितंबर में अमेरिका ने ईरान पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए थे, लेकिन चाबहार बंदरगाह परियोजना पर लागू प्रतिबंधों से भारत को छह महीने की छूट दी थी। यह छूट 26 अप्रैल को समाप्त हो जाएगी। भारत और ईरान मिलकर चाबहार बंदरगाह का विकास कर रहे हैं, ताकि संपर्क और व्यापारिक संबंधों को बढ़ावा मिल सके। दोनों देश चाबहार बंदरगाह को अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे (INSTC) का अभिन्न अंग बनाने के लिए भी पुरजोर प्रयास कर रहे हैं।
भारत का मांगा था समर्थन
ईरानी राजदूत मोहम्मद फथाली ने चाबहार बंदरगाह को क्षेत्रीय संपर्क के लिए बेहद जरूरी बताया था। कुछ समय पहले ही उन्होंने कहा था कि ईरान को इस मुद्दे पर भारत और अन्य देशों के साथ अपने संबंधों का विस्तार करना चाहिए। फथाली ने कहा, 'चाबहार बंदरगाह के बारे में, आप जानते हैं कि चाबहार बंदरगाह महत्वपूर्ण है। यह अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुंचने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। हमारे कुछ देशों, विशेष रूप से भारत के साथ अच्छे संबंध हैं। हमारा मानना है कि हमें इस मुद्दे पर अपने संबंधों को मजबूत और विस्तारित करना चाहिए।'




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