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जय हो! भारत ने वो कर दिखाया जो कोई और ना कर सका; किसके मुरीद हुए फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों?

इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट में मैक्रों ने भारत के डिजिटल बुनियादी ढांचे की जमकर तारीफ की। मुंबई के स्ट्रीट वेंडर से लेकर 20 अरब UPI लेनदेन तक, जानें कैसे मैक्रों ने भारत को एआई और डिजिटल क्रांति का नया वैश्विक चेहरा बताया।

Thu, 19 Feb 2026 12:18 PMAmit Kumar लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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जय हो! भारत ने वो कर दिखाया जो कोई और ना कर सका; किसके मुरीद हुए फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों?

फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने दिल्ली में आयोजित 'इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट' में भारत की डिजिटल क्रांति और समावेशी विकास की जमकर तारीफ की। गुरुवार सुबह शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए मैक्रों ने अपने भाषण की शुरुआत 'नमस्ते' के साथ की और अंत 'जय हो' के साथ किया। उन्होंने भारत की तारीफ करते हुए कहा कि भारत ने वह कर दिखाया है जो दुनिया का कोई दूसरा देश नहीं कर सका।

मैक्रों ने मुंबई के एक सड़क किनारे रेहड़ी-पटरी लगाने वाले विक्रेता का उदाहरण देते हुए कहा कि यह केवल तकनीक की सफलता नहीं, बल्कि एक 'सभ्यता की कहानी' है। उन्होंने कहा- 10 साल पहले मुंबई के एक स्ट्रीट वेंडर के पास न बैंक खाता था, न पता और न ही कोई दस्तावेज। लेकिन आज वही विक्रेता अपने फोन पर डिजिटल पेमेंट स्वीकार करता है। यह बदलाव अद्भुत है।"

इंडिया स्टैक और डिजिटल बुनियादी ढांचा

मैक्रों ने भारत के 'इंडिया स्टैक' की ताकत का जिक्र करते हुए कुछ बड़े आंकड़े पेश किए। उन्होंने कहा कि 140 करोड़ लोगों के लिए डिजिटल पहचान (आधार) सुनिश्चित हुई है। मैक्रों भारत के यूपीआई सिस्टम के मुरीद दिखे। UPI की सफलता का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि भारत ने हर महीने 20 अरब से अधिक लेनदेन करने वाला भुगतान तंत्र तैयार किया है। इसके अलावा, 50 करोड़ से अधिक डिजिटल हेल्थ आईडी जारी किए गए हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित करते हुए कहा कि भारत ने दुनिया के उस भ्रम को तोड़ दिया है कि इतने बड़े देश को डिजिटल अर्थव्यवस्था से जोड़ना असंभव है।

AI का लोकतांत्रीकरण: "सबके लिए एआई"

मैक्रों ने इस बात पर जोर दिया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) केवल बड़े तकनीकी दिग्गजों या अमीर देशों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। भविष्य उन लोगों का है जो तकनीक को मानवता और जिम्मेदारी के साथ जोड़ेंगे। उन्होंने कहा कि भारत और फ्रांस एक ऐसी 'सॉवरेन एआई' के विजन को साझा करते हैं जो ग्रह की रक्षा करे और सभी की समृद्धि को बढ़ावा दे। उन्होंने कहा कि चर्चा को 'चलो और अधिक करें' से बदलकर 'चलो मिलकर बेहतर करें' पर ले जाने की जरूरत है। पिछले साल पेरिस में इसे 'ऐक्शन' कहा गया था, इस साल दिल्ली में इसे 'इम्पैक्ट' कहा जा रहा है, लेकिन इसका असली नाम 'एआई टुगेदर' है।

यह छह दिवसीय सम्मेलन 'सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय' के विषय पर आधारित है। यह अब तक का सबसे बड़ा एआई सम्मेलन है, जिसमें:

  • 20 से अधिक राष्ट्राध्यक्ष शामिल हुए हैं।
  • 500 से ज्यादा वैश्विक एआई लीडर्स और लगभग 100 सीईओ हिस्सा ले रहे हैं।
  • दर्शकों में सैम ऑल्टमैन (OpenAI), सुंदर पिचाई (Google), डेमिस हसाबिस (Google DeepMind), और शांतनु नारायण (Adobe) जैसे दिग्गज शामिल थे।

फ्रांसीसी राष्ट्रपति का यह बयान भारत की उस छवि को पुख्ता करता है जहां तकनीक का इस्तेमाल केवल लाभ के लिए नहीं, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति के सशक्तिकरण के लिए किया जा रहा है।

भारत एआई क्रांति का केवल हिस्सा नहीं है बल्कि वह इसका नेतृत्व कर रहा है : प्रधानमंत्री मोदी

मैक्रों के अलावा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि एआई की पहुंच सभी तक होनी चाहिए और इसे खासकर 'ग्लोबल साउथ' के लिए समावेशिता तथा सशक्तीकरण का साधन बनाया जाना चाहिए। 'ग्लोबल साउथ' से तात्पर्य उन देशों से है जिन्हें अक्सर विकासशील, अल्प विकसित अथवा अविकसित माना जाता है और ये मुख्य रूप से अफ्रीका, एशिया एवं लातिन अमेरिका में स्थित हैं। मोदी ने 'इंडिया एआई इम्पैक्ट' शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि यह प्रदर्शनी भारत में हो रही है, जो मानवता के छठे हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है, जहां दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी है और जो प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में प्रतिभा के सबसे बड़े भंडार का केंद्र है।