ईरान युद्ध का आम आदमी की जेब पर जल्द दिखेगा असर, भारत में महंगे होंगे ये सामान
कंपनियां बढ़ती लागत, सप्लाई चेन में बाधा और आयात महंगा होने का हवाला देकर दाम बढ़ाने की तैयारी कर रही हैं। ऑटोमोबाइल कंपनियां 0.5% से लेकर चार प्रतिशत तक वाहनों की कीमतें बढ़ा सकती हैं।

Iran War Impacts: अमेरिका-इजरायल और ईरान युद्ध का असर जल्द ही आम भारतीय की जेब पर देखने को मिल सकता है। पेट्रोलियम उत्पादों को छोड़ दिया जाए तो आम आदमी की जरूरत से जुड़े सामान की कीमतें बढ़ने जा रही हैं। कई ऑटोमोबाइल कंपनियां एक अप्रैल से अपनी गाड़ियों की कीमत बढ़ाने जा रही हैं। इसके साथ ही, कई कंपनियों ने पेंट की कीमतें बढ़ाने का ऐलान कर दिया है। इसी तरह से आम आदमी के खाने-पीने व अन्य जरूरी चीजों दाम भी अब बढ़ सकते हैं।
कंपनियां बढ़ती लागत, सप्लाई चेन में बाधा और आयात महंगा होने का हवाला देकर दाम बढ़ाने की तैयारी कर रही हैं। ऑटोमोबाइल कंपनियां 0.5% से लेकर चार प्रतिशत तक वाहनों की कीमतें बढ़ा सकती हैं। इसके पीछे स्टील, एल्युमिनियम और इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स की लागत बढ़ना मुख्य कारण बताया जा रहा है। कीमतों में बढ़ोतरी से पेंट इंडस्ट्री भी अछूती नहीं है।
कई कंपनियों ने अप्रैल के पहले हफ्ते से कीमतों में इजाफा करने का मन बना लिया है। पेंट बनाने में प्रयोग होने वाले पेट्रोकेमिकल उत्पाद और रेजिन की कीमतों में उछाल इसका बड़ा कारण है। एशियन पेंट्स ने कीमतों में 6 से 8:% तक बढ़ोतरी का ऐलान किया है। बाकी कंपनियां भी कीमतें बढ़ाने जा रही हैं। सूत्र बताते हैं सरकार की तरफ से कंपनियों से बातचीत की जा रही है।
जरूरत का सामान भी हो सकता है महंगा
पैकेज्ड फूड, साबुन, डिटर्जेंट और व्यक्तिगत देखभाल के उत्पाद बनाने वाली कंपनियां भी धीरे-धीरे कीमतें बढ़ाने या पैक साइज घटाने का रास्ता अपना सकती हैं। कच्चे तेल से बनने वाले केमिकल और पैकेजिंग सामग्री महंगी होने से भी कंपनियों पर दबाव बढ़ रहा है।
'मिलकर इन चुनौतियों का सामना करना होगा'
पश्चिम एशिया में जारी संकट को लेकर देश को एकजुट होकर चुनौतियों का सामना करना होगा। बुधवार को वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री गोयल ने कहा कि अमेरिका-इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमले के बाद वैश्विक स्तर पर व्यावसायिक पोतों की आवाजाही प्रभावित हुई है और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है। इसका असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि भारत का इस युद्ध से कोई सीधा संबंध नहीं है, लेकिन युद्ध के दौरान अप्रत्यक्ष असर जरूर पड़ता है।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि कुछ भारतीय कंपनियों, खासकर मालाबार समूह जैसी निर्यात से जुड़ी संस्थाओं को पश्चिम एशियाई देशों में सामान भेजने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इसलिए यह समय देश के एकजुट होने का है। सभी को मिलकर इन चुनौतियों का सामना करना होगा जिससे अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले असर को कम किया जा सके।
गोयल ने कहा कि हमे देखना होगा कि किस तरह से हर व्यक्ति, परिवार और वर्ग के लोगों को बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, पानी और अन्य आधारभूत सुविधाएं मिले। अब बड़े सपने लेकर भारत को आगे बढ़ना होगा।




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