बड़ी तैयारी! भारत ने बांग्लादेश को सौंपे 2680 लोगों के नाम, उलटे पांव लौट रहे अवैध घुसपैठिए
पश्चिम बंगाल में नई सरकार की सख्त नीति के डर से अवैध बांग्लादेशी प्रवासी वापस लौट रहे हैं। विदेश मंत्रालय (MEA) ने 2680 घुसपैठियों की सूची सौंपकर डिपोर्टेशन और होल्डिंग सेंटर की प्रक्रिया तेज कर दी है। पढ़ें ग्राउंड रिपोर्ट और पूरी खबर।

- अवैध नागरिकों पर होगी कानूनी कार्रवाई: विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि भारत में अवैध रूप से रह रहे सभी विदेशी नागरिकों के साथ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
- बांग्लादेश को सौंपी गई 2,680 लोगों की सूची: भारत ने बांग्लादेश के साथ 2,680 से ज्यादा संदिग्ध नागरिकों के नाम साझा किए हैं, ताकि उनकी पहचान पुख्ता कर उन्हें डिपोर्ट किया जा सके।
- अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों की भारी भीड़: पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले में चेकपोस्ट पर शुक्रवार को अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों की भारी भीड़ जमा हो गई।
भारत में अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों को लेकर सरकार ने अपना रुख बेहद सख्त कर लिया है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि देश में गैर-कानूनी तरीके से प्रवेश करने वाले और रह रहे सभी विदेशियों के साथ कानून के दायरे में रहकर निपटा जाएगा। नई दिल्ली ने इस दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए बांग्लादेश को 2,680 से अधिक लोगों की सूची सौंपी है, ताकि उनकी राष्ट्रीयता की आधिकारिक पुष्टि हो सके और उन्हें वापस उनके देश भेजा जा सके।
डिपोर्टेशन की प्रक्रिया और विदेश मंत्रालय का रुख
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने अपनी साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग के दौरान अवैध घुसपैठियों की पहचान और उन्हें वापस भेजने की प्रक्रिया पर विस्तार से बात की। बांग्लादेशी घुसपैठियों से जुड़े एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने 2,680 से ज्यादा मामले बांग्लादेशी अधिकारियों को सौंपे हैं।
प्रवक्ता ने बताया, "जैसे ही इन लोगों की राष्ट्रीयता का सत्यापन (वेरिफिकेशन) पूरा हो जाएगा, हम इन बांग्लादेशी नागरिकों को डिपोर्ट करने की स्थिति में होंगे।" उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि इनमें से कई मामलों में यह सत्यापन पिछले पांच साल या उससे भी अधिक समय से अटका हुआ है। भारत को उम्मीद है कि इस गंभीर मुद्दे पर बांग्लादेश की तरफ से जल्द ही सकारात्मक प्रतिक्रिया मिलेगी। दोनों देशों के बीच मौजूद द्विपक्षीय समझौते के आधार पर इन नागरिकों को वापस भेजा जा सकता है।
नई सरकार की नीति के डर से वापस लौट रहे अवैध बांग्लादेशी
पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले में अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास स्थित हाकिमपुर चेकपोस्ट पर शुक्रवार को अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों की भारी भीड़ जमा हो गई। कई सालों से राज्य में रह रहे ये लोग अब भारत छोड़कर वापस बांग्लादेश लौटना चाहते हैं।
वापस लौटने का मुख्य कारण
राज्य में नई बनी भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार ने अवैध प्रवासियों के खिलाफ 'पहचानो, हटाओ और डिपोर्ट करो' की सख्त नीति लागू की है। राज्य के अलग-अलग हिस्सों में बिना किसी वैध कागजात के रह रहे इन लोगों को अब कानूनी कार्रवाई, जेल जाने और भारी जुर्माना चुकाने का डर सता रहा है।
प्रवासियों की आपबीती
लौट रहे लोगों ने भारत में अपने अनुभव और वापस जाने की वजहें साझा कीं। हाल ही में भारत आए एक युवक ने बताया कि वह एक साल पहले अपने दोस्त के कहने पर काम की तलाश में बांग्लादेश से यहाँ आया था।
अब्दुल की कहानी: 2017 से बंगाल में रह रहे अब्दुल ने बताया कि उसके पास कोई भारतीय दस्तावेज नहीं हैं। उसने कहा, "अब 2026 है और मुझे यहाँ 9 साल हो गए हैं। नई नीति के तहत बिना कागजात वालों को जेल हो सकती है और हम जुर्माना नहीं भर सकते।" अब्दुल के मुताबिक, वह बारासात में रहकर रिक्शा चलाता था और स्थानीय नेताओं को उनके यहाँ रहने की जानकारी थी। उसका कहना है कि पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (दीदी) के कार्यकाल में उन्हें कोई परेशानी नहीं हुई, लेकिन नई सरकार की सख्ती के कारण वह अपनी सुरक्षा को लेकर डरा हुआ है।
सुमैया खातून का दर्द: सुमैया अपनी दो साल की बेटी के साथ वापस लौट रही है। उसने बताया कि दो साल पहले फेसबुक के जरिए एक भारतीय लड़के से उसकी बात शुरू हुई थी। उसने अपने घर वालों को बिना बताए एक दलाल को 15,000 रुपये दिए और अवैध रूप से सीमा पार कर भारत आ गई। यहाँ उसने मध्यमग्राम के एक मंदिर में शादी की। लेकिन अब उसके पति ने उसे यह कहकर छोड़ दिया है कि "तुम बांग्लादेशी हो, वापस जाओ।" भारतीय दस्तावेज बनवाने की कोशिशें भी नाकाम रहीं, जिसके बाद वह हमेशा के लिए अपने मायके लौट रही है।
प्रशासन और सरकार के सख्त कदम
इस मामले में प्रशासन ने केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) के दिशानिर्देशों का पालन करते हुए कार्रवाई तेज कर दी है। 23 मई को पश्चिम बंगाल के गृह विभाग ने सभी जिलाधिकारियों (DMs) को आधिकारिक निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत पकड़े गए विदेशी नागरिकों को रखने के लिए जिले में 'होल्डिंग सेंटर' बनाने को कहा गया है। इन आदेशों में स्पष्ट किया गया है कि जो लोग अवैध रूप से देश में रह रहे हैं (विशेषकर बांग्लादेशी और रोहिंग्या) और जो विदेशी कैदी अपनी सजा पूरी कर चुके हैं, उन्हें वापस उनके देश भेजने की प्रक्रिया में तेजी लाई जाए।




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