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दिल्ली में कायस्थ, पटना में मारवाड़ी; भाजपा ने कैसे कोर सपोर्टर जातियों को दिए तोहफे

जातीय गोलबंदी के विपक्षी प्रयासों की काट के लिए पीएम मोदी लगातार इन 4 जातियों की बात करते रहे हैं। बता दें कि महज 45 साल के युवा नेता नितिन नबीन भाजपा के लिए एक उम्मीद हो सकते हैं। कहा जा रहा है कि नई पीढ़ी की सोच से तालमेल बिठाने और भविष्य का नेतृत्व तैयार करने की रणनीति के तहत ऐसा फैसला हुआ है।

Mon, 15 Dec 2025 05:08 PMSurya Prakash लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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दिल्ली में कायस्थ, पटना में मारवाड़ी; भाजपा ने कैसे कोर सपोर्टर जातियों को दिए तोहफे

भाजपा ने खरमास लगने से पहले लगातार तीन फैसले लिए हैं। पहले यूपी में पंकज चौधरी को प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया। फिर नितिन नबीन को कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया है और अब बिहार भाजपा को संजय सरावगी के तौर पर नया चीफ मिल गया है। भाजपा ने यूपी में पंकज चौधरी को कमान देकर कुर्मी वोट को साधने की कोशिश की है, लेकिन बिहार की राजनीति में अलग ही बदलाव दिख रहा है। भाजपा ने सरकार गठन में ओबीसी जातियों का खूब ख्याल रखा था, लेकिन अब अपने कोर वोटर कही जाने वाली जातियों पर फोकस दिख रहा है। सबसे पहले कायस्थ समाज से आने वाले नितिन नबीन को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया।

यह बिहार में अगड़ा समाज के लिए एक बड़ी सौगात मानी जा रही है। खासतौर पर ऐसी कायस्थ बिरादरी के लिए जिसकी बिहार में एक फीसदी से भी कम आबादी है। वहीं मारवाड़ी समुदाय के संजय सरावगी को प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है। इनकी भी बिहार में नाम मात्र ही आबादी है, लेकिन दोनों ही वर्गों को भाजपा के पक्के वोटरों में गिना जाता है। ऐसी स्थिति में भाजपा ने उन्हें सौगात दी है। माना जा रहा है कि इससे उस नैरेटिव की भी काट हो सकती है, जिसमें कहा जा रहा है कि पिछड़े वर्ग को साधने के लिए भाजपा अपने कोर वोटर वाली जातियों को नजरअंदाज कर रही है।

इसके अलावा एक रणनीति यह भी है कि बिहार जैसे राज्य में जातीय ध्रुवीकरण की राजनीति से बचा जा सके। यादव, कुर्मी, पासवान, ब्राह्मण, भूमिहार और राजपूत जैसी बिरादरियों को लेकर बिहार में ध्रुवीकरण होता रहा है। किसी एक समाज से नेता बनाए जाने पर दूसरे वर्गों के बीच ध्रुवीकरण की सियासत होती रही है। ऐसे में भाजपा ने उन समुदायों के नेताओं को कमान दी है, जिनके इर्द-गिर्द ध्रुवीकरण की राजनीति नहीं हो सकती। इसके अलावा नेता भी ऐसे चुने गए हैं, जो सर्वसुलभ हैं और मृदुभाषी हैं। माना जा रहा है कि भाजपा ने नितिन नबीन के जरिए पीएम मोदी के युवा, महिला, किसान और गरीब वाली परिभाषा के तहत जातीय राजनीति से परे होकर काम करने की पहल की है।

4 जातियों की बात करते रहे हैं पीएम मोदी, उसी के तहत फैसला

जातीय गोलबंदी के विपक्षी प्रयासों की काट के लिए पीएम मोदी लगातार इन 4 जातियों की बात करते रहे हैं। बता दें कि महज 45 साल के युवा नेता नितिन नबीन भाजपा के लिए एक उम्मीद हो सकते हैं। कहा जा रहा है कि नई पीढ़ी की सोच से तालमेल बिठाने और भविष्य का नेतृत्व अभी से तैयार करने की रणनीति के तहत ऐसा फैसला हुआ है। इसके अलावा जातीय गोलबंदी से बचने का भी यह कारगर तरीका हो सकता है। फिलहाल बिहार से दिल्ली तक इन फैसलों का असर क्या होगा। यह आने वाले कुछ दिनों में साफ हो जाएगा।