भारत में LPG सप्लाई सामान्य होने में कितना समय लगेगा? सरकारी अधिकारी का जवाब बढ़ा देगी चिंता
मार्च में घरेलू सिलेंडर (14.2 kg) की कीमत में 60 रुपये की बढ़ोतरी के बाद दिल्ली में इसकी कीमत 913 के आसपास है। 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमत में एक अप्रैल को 195.50 रुपये की भारी वृद्धि की गई।

LPG Crisis: मिडिल ईस्ट में फरवरी 2026 के अंत में शुरू हुए युद्ध ने भारत में ईंधन की सप्लाई चेन को जोरदार झटका दिया है। इसका सबसे अधिक असर एलपीजी सप्लाई पर पड़ा है। हाल के दिनों में ईरान और अमेरिका के बीच सीजफायर को लेकर सहमति बनी है। पाकिस्तान में एक दौर की वार्ता भी शुरू हुई है। हालांकि, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की स्थिति अभी भी सामान्य नहीं हुई है। भारत के कुल एलपीजी आयात का लगभग 90% हिस्सा गुजरता है। दोनों देशों के बीच हुई शांति वार्ता के बाद स्थिति सामान्य होने की अटकलें लगने लगी है। हालांकि, एक सरकारी अधिकारी ने जो बयान दिया है वह चिंता बढ़ाने वाली है।
एक सरकारी अधिकारी का कहना है कि भारत की एलपीजी (LPG) सप्लाई चेन को इस झटके से पूरी तरह उबरने में कम से कम 3 से 4 साल का समय लग सकता है।
सप्लाई चेन पर गहरा संकट
सरकारी सूत्रों के अनुसार, विदेशी आपूर्तिकर्ताओं ने संकेत दिया है कि कुछ महत्वपूर्ण उत्पादन केंद्र बंद हो गए हैं। आपूर्ति को युद्ध के पूर्व वाले स्तर पर लाने में कम से कम 36 से 48 महीने लगेंगे। इसके अलावा खाड़ी देशों (UAE, कतर, सऊदी अरब) से होने वाली आपूर्ति अब गिरकर 55% पर आ गई है। पहले भारत के कुल आयात का बड़ा हिस्सा थी।
कीमतों में भारी उछाल
आपूर्ति में कमी का सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ा है। मार्च में घरेलू सिलेंडर (14.2 kg) की कीमत में 60 रुपये की बढ़ोतरी के बाद दिल्ली में इसकी कीमत 913 के आसपास है। 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमत में एक अप्रैल को 195.50 रुपये की भारी वृद्धि की गई। इसके बाद दिल्ली में इसकी कीमत 2,078.50 तक पहुंच गई है। इसका असर होटल, रेस्टोरेंट और छोटे उद्योगों पर पड़ रहा है, साथ ही सरकार पर सब्सिडी का बोझ भी बढ़ गया है।
PNG की ओर कदम
एलपीजी पर निर्भरता कम करने के लिए सरकार अब पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) को तेजी से बढ़ावा दे रही है। मार्च 2026 में सरकार ने उन घरों को 90 दिनों के भीतर PNG पर शिफ्ट होने का निर्देश दिया है जहां पाइपलाइन की सुविधा उपलब्ध है। सरकार ने पाइपलाइन नेटवर्क के विस्तार के लिए 5,000–6,000 करोड़ के निवेश की योजना बनाई है। सरकार पाइपलाइन बिछाने की लागत का 50% तक वहन कर सकती है।
वर्तमान में भारत में केवल 1.6 करोड़ (लगभग 12-13%) घरों में ही PNG कनेक्शन है, जिसे बढ़ाकर 2034 तक 12 करोड़ करने का लक्ष्य है।




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