Gowda wanted Sitaram Kesri to be President but Tariq Anwar reveals 27 year old secret जब कांग्रेस अध्यक्ष ने राष्ट्रपति पद के बजाय PM को हटाना चुना! क्या हुआ था 1997 में, India News in Hindi - Hindustan
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जब कांग्रेस अध्यक्ष ने राष्ट्रपति पद के बजाय PM को हटाना चुना! क्या हुआ था 1997 में

तारिक अनवर ने कहा, 'केसरी जी इस बात पर अड़े हुए थे कि प्रस्ताव इसलिए दिए गए हैं, ताकि गौड़ा सरकार चलती रहे। केसरी जी को यह भी लगता था कि यह कांग्रेस को बांटने की साजिश है। केसरी जी ने प्रस्तावों को मानने से इनकार कर दिया।

Mon, 27 Oct 2025 10:47 AMNisarg Dixit लाइव हिन्दुस्तान
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जब कांग्रेस अध्यक्ष ने राष्ट्रपति पद के बजाय PM को हटाना चुना! क्या हुआ था 1997 में

साल 1997 में भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा चाहते थे कि तब के कांग्रेस अध्यक्ष सीताराम केसरी को राष्ट्रपति बनाया जाए। हालांकि, उनके इस प्रस्ताव को केसरी ने खारिज कर दिया था। CWC यानी कांग्रेस वर्किंग कमेटी के सदस्य और सांसद तारिक अनवर ने हाल ही में दिए एक इंटरव्यू के दौरान देवगौड़ा की अगुवाई वाली सरकार गिरने की वजह से पर्दा उठाया है।

इकोनॉमिक टाइम्स से बातचीत में अनवर ने कहा कि गौड़ा ने कांग्रेस को 50 फीसदी मंत्री पद और केसरी को राष्ट्रपति बनाने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया। उन्होंने बताया है कि तब कुछ कांग्रेस नेता इस प्रस्ताव के लिए तैयार थे। अनवर का कहना है कि केसरी ने इसे कांग्रेस को तोड़ने की कोशिश करार दिया था।

उन्होंने कहा, 'जब यूनाइटेड फ्रंट सरकार और कांग्रेस में मतभेद शुरू हुए, तब दोवगौड़ा ने कांग्रेस अध्यक्ष सीताराम केसरी जी की मदद से शांति स्थापित करने की कोशिश की। तब पीएम ने प्रस्ताव दिया था कि केसरी जी को राष्ट्रपति बनाया जाए, क्योंकि तत्कालीन राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा का कार्यकाल 1997 में खत्म हो रहा था। प्रधानमंत्री ने कांग्रेस को 50 फीसदी मंत्री पद देने की पेशकश भी की थी।'

उन्होंने कहा, 'तत्कालीन मंत्री सीएम इब्राहिम केसरी जी के पास प्रस्ताव लेकर आए थे। जब उन्हें जानकारी मिली, तो केसरी जी ने इसके बारे में मुझे बताया। उन्होंने इसे लेकर कांग्रेस के कुछ नेताओं से भी चर्चा की थी।'

अनवर ने कहा, 'केसरी जी इस बात पर अड़े हुए थे कि प्रस्ताव इसलिए दिए गए हैं, ताकि गौड़ा सरकार चलती रहे। केसरी जी को यह भी लगता था कि यह कांग्रेस को बांटने की साजिश है। केसरी जी ने प्रस्तावों को मानने से इनकार कर दिया। उनका मानना था कि कांग्रेस अपनी ताकत फिर हासिल करेगी और यूएफ सरकार के गिरने के बाद अपनी खुद की सरकार का नेतृत्व करेगी।'

अनवर ने कहा, 'कुछ वरिष्ठ कांग्रेस नेता गौड़ा सरकार के साथ जाने के पक्ष में थे, लेकिन केसरी जी अपनी बात पर अड़े थे।' गौड़ा सरकार के गिरने के बाद केआर नारायण भारत के राष्ट्रपति बने। कांग्रेस सांसद ने यह भी कहा कि अन्य चीजों के अलावा सरकार की ब्लैकमेल की रणनीति के कारण केसरी ने कांग्रेस नेतृ्त्व ने गौड़ा सरकार को गिराने के लिए तैयार कर लिया था।

उन्होंने कहा, 'जब यह साफ हो गया कि केसरी जी को सत्ता से नहीं लुभाया जा सकता, तो तत्कालीन प्रधानमंत्री कार्यालय से उन्हें एक बनाए केस में सीबीआई जांच के जरिए ब्लैकमेल करने की कोशिश हुई। कांग्रेस के कुछ असंतुष्ट नेता भी इसके पीछे थे, लेकिन केसरी जी ने झुकने से मना कर दिया। उन्होंने इसे खुद को और कांग्रेस को खत्म करने के प्रयास के तौर पर देखा। यह और अन्य कारणों के चलते कांग्रेस ने गौड़ा से समर्थन वापस ले लिया और सरकार गिर गई।'