मणिपुर में बड़ा बैकथ्रू, 3 साल बाद पहली बार टेबल पर बैठक, CM बोले- अच्छी शुरुआत
मणिपुर के मुख्यमंत्री वाई खेमचंद सिंह ने रविवार को कहा कि कुकी जो काउंसिल के प्रतिनिधिमंडल के साथ उनकी मुलाकात राज्य में शांति बहाल करने और मेइती तथा कुकी समुदायों के बीच विश्वास को फिर से कायम करने की दिशा में एक अच्छी शुरुआत है।

मणिपुर के मुख्यमंत्री वाई खेमचंद सिंह ने रविवार को कहा कि कुकी जो काउंसिल के प्रतिनिधिमंडल के साथ उनकी मुलाकात राज्य में शांति बहाल करने और मेइती तथा कुकी समुदायों के बीच विश्वास को फिर से कायम करने की दिशा में एक 'अच्छी शुरुआत' है। गुवाहाटी में प्रतिनिधिमंडल के साथ बंद कमरे में हुई बैठक के एक दिन बाद उन्होंने यहां पत्रकारों से कहा कि लगभग तीन साल में पहली बार कुकी जो काउंसिल (केजेडसी) और राज्य सरकार के बीच बातचीत होना वाकई एक अच्छी बात है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बातचीत आगे बढ़ेगी।''
केजेडसी ने रविवार को एक बयान में कहा गया है कि बैठक शाम सात बजे शुरू हुई और लगभग एक घंटे 45 मिनट तक चली। यह बातचीत मुख्य रूप से गतिरोध तोड़ने के लिए की गयी थी। मुख्यमंत्री ने रविवार को मीडिया से बातचीत में कहा कि मणिपुर की स्थिति में सबसे दुखद बात यह है कि आंतरिक रूप से विस्थापित व्यक्ति (आईडीपी) अपने पैतृक घरों में वापस नहीं लौट पा रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि उनकी वापसी के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात दोनों समुदायों के बीच विश्वास को फिर से कायम करना है। केंद्रीय बल कब तक कुछ स्थानों पर आबादी की सुरक्षा करते रह सकते हैं? जरूरत इस बात की है कि समुदाय संघर्ष को भूलकर विश्वास का पुनर्निर्माण करें। उन्होंने पत्रकारों को बताया कि दोनों पक्षों के विस्थापितों की अपने-अपने स्थानों पर वापसी का मुद्दा वार्ता में शामिल था। उन्होंने कहा कि ''कम से कम हमें एक अच्छी शुरुआत तो करनी ही चाहिए।
शांति बहाल करें और...
उन्होंने कहा कि मैं कुकी जो काउंसिल को वार्ता के निमंत्रण को स्वीकार करने के लिए धन्यवाद देना चाहता हूं। हमने शांति स्थापित करने के उद्देश्य से वार्ता की। सीएम ने कहा कि सभी से मेरी अपील है कि शांति बहाल करें और क्षमा और भूल जाने के सिद्धांत पर आगे बढ़ें। मेरा उद्देश्य शांति स्थापित करना और विश्वास कायम करना है। इसमें कोई मांग या प्रतिबद्धता नहीं है। उन्होंने कहा कि मेरी सभी से अपील है कि शांति बहाल करें और क्षमा करें और भूल जाएं के सिद्धांत पर आगे बढ़ें। मेरा उद्देश्य शांति स्थापित करना और विश्वास कायम करना है। कोई मांग या प्रतिबद्धता नहीं है।
मुख्यमंत्री ने अलग प्रशासन की मांग पर मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पहले ही घोषणा कर चुके हैं कि मणिपुर की क्षेत्रीय अखंडता बरकरार रहेगी बफर जोन की शब्दावली के बारे में उन्होंने कहा कि सरकार के लिए कोई बफर जोन नहीं है। बातचीत के दौरान मैं इसे संवेदनशील क्षेत्र कहता हूं। चूंकि विश्वास का अभाव है, इसलिए सुरक्षा बल ऐसे संवेदनशील क्षेत्रों में तलाशी लेते हैं। इस दौरान उन्होंने ये भी कहा कि 'अभी किसी भी तरह के टकराव का समय नहीं है। अगर हम शांति लाना चाहते हैं, तो हमें ईमानदारी से काम करना होगा और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि हमें इस बात पर ध्यान नहीं देना चाहिए कि किसी ने यह कहा या किसी ने वह कहा।
कुकी जो काउंसिल ने क्या कहा
दूसरी ओर, कुकी जो काउंसिल ने कहा कि प्रतिनिधिमंडल ने शनिवार को गुवाहाटी में बैठक के दौरान कई महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए, जिन्हें मुख्यमंत्री ने ध्यानपूर्वक सुना। उसने कहा कि इन मुद्दों में से प्रमुख थे कुकी और तांगखुल समुदायों के बीच जारी तनाव को कम करने की तत्काल आवश्यकता और किसी भी सार्थक शांति व सुलह प्रक्रिया के लिए एक मूलभूत शर्त के रूप में संघर्ष के पीड़ितों के लिए न्याय सुनिश्चित करना।
केजेडसी ने एक बयान में कहा कि प्रतिनिधिमंडल ने राजनीतिक समाधान होने तक बफर जोन की शुचिता बनाए रखने पर भी जोर दिया और क्षेत्र में स्थायी व दीर्घकालिक शांति सुनिश्चित करने के लिए जारी सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशंस (एसओओ) वार्ता के समाधान में तेजी लाने की आवश्यकता पर बल दिया। बयान में कहा गया है कि मुख्यमंत्री ने मणिपुर में शांति और सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए अपनी चिंताओं, प्रतिबद्धताओं और अपनी सरकार द्वारा उठाए गए कदमों के बारे में बताया। मुख्यमंत्री ने इस चुनौतीपूर्ण दौर में उनसे बातचीत करने की केजेडसी की पहल और साहसिक कदम की सराहना की।




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