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चीन से खरीदा रोबोट डॉग, बता दिया अपना; फजीहत के बाद क्या बोली गलगोटिया यूनिवर्सिटी?

गलगोटिया यूनिवर्सिटी द्वारा चीनी रोबोट 'Unitree Go2' को अपना आविष्कार 'ओरियन' बताकर पेश करने पर मचा बवाल। सोशल मीडिया पर ट्रोल होने के बाद यूनिवर्सिटी ने दी सफाई, लेकिन X कम्युनिटी नोट ने खोली पोल। पढ़ें पूरी खबर।

Wed, 18 Feb 2026 10:54 AMAmit Kumar लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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चीन से खरीदा रोबोट डॉग, बता दिया अपना; फजीहत के बाद क्या बोली गलगोटिया यूनिवर्सिटी?

नई दिल्ली में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में ग्रेटर नोएडा स्थित गलगोटिया यूनिवर्सिटी के स्टॉल ने खूब सुर्खियां बटोरीं। लेकिन ये सुर्खियां अच्छी वजह से नहीं, बल्कि एक बड़े विवाद की वजह से बनीं। दरअसल सोशल मीडिया पर यह दावा किया जा रहा है कि यूनिवर्सिटी ने चीन निर्मित एक 'रोबोटिक डॉग' को अपना खुद का आविष्कार बताकर दिल्ली में आयोजित 'इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट' में पेश किया।

विवाद की मुख्य वजह

सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। इसमें यूनिवर्सिटी की एक प्रतिनिधि मीडिया से बातचीत करते हुए इस रोबोटिक डॉग को 'ओरियन' नाम से पेश कर रही हैं। वीडियो में कथित तौर पर यह दावा किया गया कि इसे गलगोटिया यूनिवर्सिटी के 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' द्वारा विकसित किया गया है। इसे भारतीय इनोवेशन और AI ब्रेकथ्रू के रूप में दिखाया गया।

जैसे ही यह वीडियो इंटरनेट पर आया, यूजर्स ने पहचान लिया कि यह असल में चीन की प्रसिद्ध रोबोटिक्स कंपनी 'Unitree' का 'Go2' मॉडल है। इस रोबोट की ऑनलाइन कीमत लगभग 2 से 3 लाख रुपये है। इसके बाद आरोप लगे कि यूनिवर्सिटी ने इसे Made in China प्रोडक्ट को Made in India या अपना मूल इनोवेशन बताकर पेश किया, जिससे भारत की इमेज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खराब हुई। सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग हुई। DD न्यूज जैसे चैनलों ने भी इसे हाइलाइट किया, लेकिन बाद में पोस्ट हटा दिए गए।

यूनिवर्सिटी का पक्ष और सफाई

भारी आलोचना के बाद गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक आधिकारिक बयान जारी किया। यूनिवर्सिटी ने कहा कि उन्होंने कभी यह दावा नहीं किया कि यह रोबोट उन्होंने बनाया है। बयान में कहा गया कि यह रोबोट Unitree से खरीदा गया है और इसे छात्रों के लिए एक 'लर्निंग टूल' के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। संस्थान का तर्क है कि इनोवेशन की कोई सीमा नहीं होती। वे अमेरिका, चीन और सिंगापुर जैसे देशों से अत्याधुनिक तकनीक इसलिए लाते हैं ताकि छात्रों को व्यावहारिक अनुभव मिल सके। यूनिवर्सिटी के अनुसार, उनका उद्देश्य छात्रों को तकनीक के मामले में दुनिया से कदम मिलाकर चलने के लिए प्रेरित करना है, न कि केवल मशीनें दिखाना।

X कम्युनिटी नोट ने खोली पोल?

यूनिवर्सिटी के स्पष्टीकरण के बावजूद विवाद थमा नहीं। उनके ट्वीट पर एक 'कम्युनिटी नोट' (फैक्ट-चेक) जोड़ा गया, जिसमें कहा गया कि यूनिवर्सिटी का यह कहना कि उन्होंने इसे अपना नहीं बताया, "भ्रामक" है। नोट में उल्लेख किया गया कि समिट के दौरान इसे 'ओरियन' नाम दिया गया था और स्पष्ट रूप से इसे टीम द्वारा विकसित बताया गया था।

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बता दें कि यह रोबो डॉग Unitree Go2 एक एडवांस्ड क्वाड्रुपेड रोबोट है, जो बाधाओं को पार कर सकता है, निगरानी, इंस्पेक्शन और खतरनाक इलाकों में काम कर सकता है। चीन में यह काफी पॉपुलर है और मिलिट्री/इंडस्ट्रियल यूज के लिए भी इस्तेमाल होता है। अब लोग यूनिवर्सिटी पर आरोप लगा रहे हैं कि उन्होंने इसे 350 करोड़ के AI इकोसिस्टम का हिस्सा दिखाकर गुमराह किया।

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