बिहार से बंगाल तक, 20 साल तक मुसलमान बने रहेंगे चुनावी मुद्दा; वोटिंग से पहले सरमा ने ऐसा क्यों कहा?
हाल ही में संसद में महिला आरक्षण से जुड़े विधेयकों के गिरने पर सरमा ने विपक्ष को घेरा। उन्होंने कहा कि विपक्ष को युवा महिलाओं और छात्राओं को जवाब देना होगा कि उन्होंने इस ऐतिहासिक बदलाव के खिलाफ वोट क्यों दिया।

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण के लिए 23 अप्रैल को मतदान होना है। इससे ठीक पहल असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने राज्य की राजनीति में जनसांख्यिकी और तुष्टिकरण को लेकर तीखा हमला बोला है। बागडोगरा एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत करते हुए सरमा ने ध्रुवीकरण के आरोपों को खारिज किया और ममता बनर्जी सरकार पर बांग्लादेशी मुस्लिमों के प्रति नरम रुख रखने का आरोप लगाया। सरमा ने कहा कि वे हिंदू-मुस्लिम की बात नहीं करते, बल्कि उनका विरोध केवल बांग्लादेशी मुस्लिमों से है। उन्होंने दावा किया कि पश्चिम बंगाल की लगभग 27% मुस्लिम आबादी में से अधिकांश बांग्लादेशी मुस्लिम हैं, जो तृणमूल कांग्रेस (TMC) का आधार हैं।
सरमा ने कहा, "ममता बनर्जी पूरी तरह से बांग्लादेशी मुस्लिमों के पक्ष में हैं। बंगाल, असम और बिहार में अगले 20 सालों तक जनसांख्यिकी चुनाव का मुख्य मुद्दा रहेगी। यहां के मूल निवासी हर दिन संघर्ष कर रहे हैं। हम जो दिल्ली में हैं, हमें इसका असर महसूस नहीं होता।"
महिला आरक्षण को लेकर विपक्ष पर प्रहार
हाल ही में संसद में महिला आरक्षण से जुड़े विधेयकों के गिरने पर सरमा ने विपक्ष को घेरा। उन्होंने कहा कि विपक्ष को युवा महिलाओं और छात्राओं को जवाब देना होगा कि उन्होंने इस ऐतिहासिक बदलाव के खिलाफ वोट क्यों दिया। उन्होंने तर्क दिया कि मौजूदा 543 सीटों के भीतर महिला आरक्षण लागू करना भौगोलिक और जातीय आकांक्षाओं के कारण संभव नहीं है, इसीलिए सीटों की संख्या बढ़ाना जरूरी था।
पश्चिम बंगाल और असम की तुलना करते हुए सरमा ने अपने फोन से डेटा शेयर किया। सरमा ने दावा किया कि असम की अर्थव्यवस्था 15-16% की दर से बढ़ रही है, जबकि बंगाल की विकास दर 9-10% है। उन्होंने कोलकाता और असम के सरकारी अस्पतालों की तुलना करते हुए कहा कि दोनों में जमीन-आसमान का अंतर है। उन्होंने तंज कसा कि कोलकाता कभी ब्रिटिश भारत की राजधानी थी, लेकिन आज बंगाल के लोग काम की तलाश में गुजरात और दिल्ली पलायन कर रहे हैं।
जब उनसे पूछा गया कि भाजपा की जीत की स्थिति में बंगाल का मुख्यमंत्री कौन होगा तो सरमा ने इसे बड़ा मुद्दा नहीं बताया। उन्होंने कहा, "भाजपा में व्यक्तिगत आकांक्षाओं के लिए ज्यादा जगह नहीं है। प्रधानमंत्री मोदी फोन पर ही तय कर सकते हैं कि मुख्यमंत्री कौन होगा। मुझे अगर आज घर बैठने को कहा जाए, तो मैं उसमें भी खुश रहूंगा।"
गौरतलब है कि तृणमूल कांग्रेस ने कूचबिहार में सरमा के भाषणों को सांप्रदायिक रूप से उत्तेजक बताते हुए चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज कराई है। हालांकि, सरमा ने इन आरोपों को यह कहकर खारिज कर दिया कि वे केवल देशी मुस्लिमों और हिंदुओं के हितों की बात कर रहे हैं।




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