Experts warn of Air Pollution calls it Indias biggest health crisis since Covid 19 सावधान! कोविड महामारी के बाद भारत में सबसे बड़े संकट ने दी दस्तक, विशेषज्ञों ने क्यों चेताया, India News in Hindi - Hindustan
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सावधान! कोविड महामारी के बाद भारत में सबसे बड़े संकट ने दी दस्तक, विशेषज्ञों ने क्यों चेताया

विशेषज्ञों ने कहा है कि देश में सांस से संबंधी बीमारियों का एक बड़ा संकट धीरे-धीरे विकराल रूप ले रहा है, जो अभी न तो बड़े पैमाने पर पहचाना गया है और ना ही इसके समाधान के लिए पर्याप्त कदम उठाए जा रहे हैं।

Fri, 26 Dec 2025 09:27 PMJagriti Kumari भाषा, नई दिल्ली
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सावधान! कोविड महामारी के बाद भारत में सबसे बड़े संकट ने दी दस्तक, विशेषज्ञों ने क्यों चेताया

बीते कुछ समय से लगभग पूरा उत्तर भारत वायु प्रदूषण की जद में है। दिल्ली-NCR की हवा जहरीली हो गई है और हवा की गुणवत्ता के स्तर में लगातार गिरावट देखी जा रही है। वहीं ठंड में पारा गिरते ही परिस्थितियां और गंभीर हो गई हैं। अब विशेषज्ञों ने इन हालातों पर गंभीर चिंता जाहिर की है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कोविड-19 महामारी के बाद वायु प्रदूषण भारत के लिए सबसे बड़ा स्वास्थ्य संकट है। ब्रिटेन में रहने वाले भारतीय मूल के श्वसन रोग विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अगर तुरंत ठोस कदम नहीं उठाए गए तो हालात साल दर साल और बिगड़ेंगे।

विशेषज्ञों ने कहा कि देश में श्वसन संबंधी बीमारियों का एक बड़ा संकट धीरे-धीरे विकराल रूप ले रहा है, जो अभी ना तो बड़े पैमाने पर पहचाना गया है और न ही इसके समाधान के लिए पर्याप्त कदम उठाए जा रहे हैं। ब्रिटेन में कार्यरत कई वरिष्ठ चिकित्सकों ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा कि सांस संबंधी बीमारियों का यह छिपा हुआ संकट धीरे-धीरे गंभीर रूप ले रहा है और आने वाली लहर भारत के लोगों और देश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गहरा व दीर्घकालिक असर डाल सकती है। विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि पिछले दशक में विश्वभर में हृदय रोग के मामलों में वृद्धि केवल मोटापे के कारण नहीं हुई, बल्कि इसका मुख्य कारण कारों और विमानों सहित शहरी परिवहन से निकलने वाले जहरीले उत्सर्जन हैं। यह समस्या भारत, ब्रिटेन और अन्य देशों के शहरों में विशेष रूप से गंभीर है।

कड़वी सच्चाई

‘लिवरपूल’ के सलाहकार श्वसन रोग विशेषज्ञ और भारत की कोविड-19 सलाहकार समिति के पूर्व सदस्य मनीष गौतम कहते हैं, “भारत सरकार का वायु प्रदूषण पर पुनः ध्यान केंद्रित करना जरूरी है। लेकिन एक कड़वी सच्चाई यह है कि उत्तर भारत में रहने वाले लाखों लोगों के लिए नुकसान पहले ही हो चुका है। हाल में जो कदम उठाए जा रहे हैं, वे बहुत कम हैं। सांस संबंधी बीमारियों का एक बड़ा संकट धीरे-धीरे हमारे सामने बढ़ रहा है।”

उन्होंने चेतावनी दी कि वर्षों तक प्रदूषण की जद में रहने के कारण फेफड़ों की स्वास्थ्य आपात स्थिति धीरे-धीरे सामने आ रही है। उन्होंने नीति निर्धारकों से अपील की कि वे सांस संबंधी बीमारियों का समय रहते पता लगाने और उनका इलाज करने पर ध्यान दें और तेजी से काम करने वाले एक ‘कार्यदल’ की स्थापना पर विचार करें।

बढ़ गई मरीजों की संख्या

चिकित्सकों के मुताबिक दिसंबर में सिर्फ दिल्ली के अस्पतालों में श्वसन संबंधी परेशानियों से जूझ रहे मरीजों की संख्या में 20 से 30 प्रतिशत वृद्धि देखी गई, जिनमें कई ऐसे मरीज थे जो पहली बार इससे पीड़ित हुए थे और युवा थे। ब्रिटेन की राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा में 20 सालों से अधिक का अनुभव रखने वाले गौतम ने कहा कि प्रदूषण नियंत्रण और रोकथाम के उपाय महत्वपूर्ण तो हैं, लेकिन अब केवल इन्हीं उपायों से काम नहीं चलेगा। गौतम ने कहा, “भारत ने पहले भी यह उदाहरण पेश किया है कि बड़े पैमाने पर स्वास्थ्य संबंधी कार्यक्रम चलाना संभव है। सरकार के उपायों ने शीघ्र निदान और सुनियोजित उपचार कार्यक्रमों के माध्यम से तपेदिक के प्रभाव को काफी हद तक कम किया है। अब श्वसन रोगों के लिए भी इसी तरह की तत्परता और बड़े पैमाने पर कदम उठाने की आवश्यकता है।”

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वहीं लंदन के ‘सेंट जॉर्ज यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल’ के मानद हृदय रोग विशेषज्ञ राजय नारायण के अनुसार, वायु प्रदूषण और हृदय, श्वसन, तंत्रिका संबंधी सहित कई प्रकार की बीमारियों के बीच “अत्यधिक वैज्ञानिक प्रमाण” मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि अगर इसे समय रहते हल नहीं किया गया, तो यह स्वास्थ्य और आर्थिक बोझ दोनों को और बढ़ा देगा। नारायण कहते हैं, ‘‘सिरदर्द, थकान, हल्की खांसी, गले में खराश, पाचन संबंधी परेशानी, आंखों में सूखापन, त्वचा पर चकत्ते और बार-बार होने वाले संक्रमण जैसे शुरुआती लक्षण अक्सर मामूली समझकर नजरअंदाज कर दिए जाते हैं, लेकिन ये गंभीर दीर्घकालिक बीमारी के शुरुआती चेतावनी संकेत हो सकते हैं।’’