चिल्लाने लगे डेरेक ओ ब्रायन, CEC ने कहा- दफा हो जाओ; बंगाल चुनाव के बीच महासंग्राम
विपक्षी दलों ने चुनाव को एक या दो चरणों में कराने की मांग की थी, लेकिन आयोग ने सुरक्षा व्यवस्था का हवाला देते हुए इसे दो चरणों (23 अप्रैल और 29 अप्रैल) में कराने का निर्णय लिया है।

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से ठीक पहले तृणमूल कांग्रेस (TMC) और निर्वाचन आयोग (EC) के बीच कड़वाहट अपने चरम पर पहुंच गई है। बुधवार को दिल्ली में चुनाव आयोग की पूर्ण पीठ और टीएमसी प्रतिनिधिमंडल के बीच हुई महज सात मिनट की मुलाकात एक बड़े विवाद के साथ समाप्त हुई। टीएमसी के राज्यसभा सांसद डेरेक ओ'ब्रायन ने बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए आयोग पर गंभीर आरोप लगाए। हालांकि, चुनाव आयोग की तरफ से भी सफाई दी गई और टीएमसी नेताओं पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
डेरेक ओ'ब्रायन ने दावा किया कि जब प्रतिनिधिमंडल ने राज्य के अधिकारियों के तबादलों और भाजपा के साथ उनके कथित संबंधों के सबूत सौंपे तो मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार ने उनसे कहा कि ‘दफा हो जाओ’। टीएमसी का कहना है कि 10:02 AM पर शुरू हुई यह बैठक 10:07 AM पर ही खत्म हो गई। ओ'ब्रायन के अनुसार, ज्ञानेश कुमार के अलावा किसी अन्य चुनाव आयुक्त ने एक शब्द भी नहीं बोला।
'टीएमसी नेताओं ने चिल्लाकर बात की'
दूसरी ओर, चुनाव आयोग के सूत्रों ने टीएमसी के दावों को सिरे से खारिज करते हुए इसे झूठ करार दिया है। पीटीआई ने आयोग के सूत्रों के हवाले से कहा है कि डेरेक ओ'ब्रायन चुनाव आयुक्तों पर चिल्ला रहे थे और उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त को बोलने तक नहीं दिया। CEC ज्ञानेश कुमार ने कथित तौर पर ओ'ब्रायन से मर्यादा बनाए रखने का अनुरोध किया और कहा कि "चीखना-चिल्लाना और अभद्र व्यवहार" आयोग के कक्ष में उचित नहीं है। सूत्रों ने बताया कि CEC ने टीएमसी नेताओं से केवल सीधी और स्पष्ट बात की थी, जिसे वे पचा नहीं पाए।
TMC के CEC से तकरार
चुनाव की घोषणा के तुरंत बाद आयोग ने बंगाल के मुख्य सचिव, डीजीपी और गृह सचिव सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों का तबादला कर दिया था, जिसे ममता बनर्जी ने एकतरफा और अभूतपूर्व बताया। वहीं, टीएमसी का आरोप है कि 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (SIR) के नाम पर बंगाल के लाखों वैध मतदाताओं के नाम काट दिए गए हैं।
विपक्षी दलों ने चुनाव को एक या दो चरणों में कराने की मांग की थी, लेकिन आयोग ने सुरक्षा व्यवस्था का हवाला देते हुए इसे दो चरणों (23 अप्रैल और 29 अप्रैल) में कराने का निर्णय लिया है।
विवादों के बीच, निर्वाचन आयोग ने दोहराया है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पूरी तरह से भयमुक्त, हिंसामुक्त और प्रलोभनमुक्त होगा। आयोग ने स्पष्ट किया है कि किसी भी प्रकार की राजनीतिक हिंसा बर्दाश्त नहीं की जाएगी और केंद्रीय बलों की तैनाती पेशेवर तरीके से की जाएगी ताकि मतदाता बिना किसी दबाव के मतदान कर सकें। इस पोस्ट के दौरान टीएमसी का भी नाम लिया।




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