dattatreya hosabale hudson institute speech india tech hub not snakes RSS Ku Klux Klan भारत सिर्फ सपेरों का देश नहीं, ग्लोबल टेक हब है; अमेरिका में बैठ RSS महासचिव ने दिखाया आईना, India News in Hindi - Hindustan
More

भारत सिर्फ सपेरों का देश नहीं, ग्लोबल टेक हब है; अमेरिका में बैठ RSS महासचिव ने दिखाया आईना

आरएसएस महासचिव दत्तात्रेय होसबोले ने अमेरिका के हडसन इंस्टीट्यूट में कहा कि भारत सपेरों का देश नहीं, बल्कि टेक हब और दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। पढ़ें उन्होंने RSS, हिंदू पहचान और अल्पसंख्यकों पर फैले पश्चिमी भ्रम पर क्या कहा।

Fri, 24 April 2026 07:38 AMAmit Kumar लाइव हिन्दुस्तान, वाशिंगटन
share
भारत सिर्फ सपेरों का देश नहीं, ग्लोबल टेक हब है; अमेरिका में बैठ RSS महासचिव ने दिखाया आईना

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरकार्यवाह (महासचिव) दत्तात्रेय होसबोले ने अमेरिका में एक कार्यक्रम के दौरान संघ को लेकर विश्व स्तर पर फैली भ्रांतियों का कड़ा खंडन किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आरएसएस अमेरिका के कुख्यात श्वेत वर्चस्ववादी समूह 'कु क्लक्स क्लान' का कोई भारतीय संस्करण नहीं है।

अमेरिका के हडसन इंस्टीट्यूट द्वारा आयोजित 'न्यू इंडिया कॉन्फ्रेंस' में लेखक वाल्टर रसेल मीड के साथ एक सत्र में बोलते हुए, होसबोले ने समाज के विभिन्न क्षेत्रों में संगठन द्वारा किए जा रहे जमीनी कार्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने ये भी कहा कि 'भारत केवल सपेरों और मलिन बस्तियों का देश नहीं, बल्कि एक टेक हब है।'

भारत के प्रति अमेरिकी दृष्टिकोण में खामी

होसबोले ने इस बात पर जोर दिया कि अमेरिका और पश्चिमी दुनिया में अक्सर भारत की एक बेहद सीमित और रूढ़िवादी छवि पेश की जाती है। उन्होंने कहा कि अमेरिका में आम धारणा यह है कि भारत अत्यधिक आबादी वाला देश है, जो मलिन बस्तियों, गरीबी, सपेरों और साधु-संतों से भरा हुआ है। होसबोले ने याद दिलाया कि इस पुरानी धारणा के कारण लोग यह भूल जाते हैं कि भारत आज एक वैश्विक "टेक हब" बन चुका है और दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। भारत के विकास के इन पहलुओं को आम अमेरिकी धारणा में अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है।

झूठे नैरेटिव का खंडन

होसबोले ने कहा कि अमेरिका में भारत और आरएसएस को लेकर कई तरह की गलतफहमियां हैं। उन्होंने बताया कि दशकों से जानबूझकर या अनजाने में किसी एजेंडे के तहत यह नैरेटिव गढ़ा गया है कि आरएसएस एक 'हिंदू वर्चस्ववादी' संगठन है। संघ को अक्सर ईसाई-विरोधी, अल्पसंख्यक-विरोधी, विकास-विरोधी और आधुनिकीकरण-विरोधी बताकर पेश किया जाता है। उन्होंने जोर देकर कहा- हमारे सकारात्मक कार्यों को कभी उजागर नहीं किया जाता, बल्कि केवल 'विरोधी' छवि का ही दुष्प्रचार किया गया है। हमें कु क्लक्स क्लान का भारतीय रूप बताया जाता है, जो कि हम बिल्कुल नहीं हैं।

हिंदू दर्शन और विश्व बंधुत्व

हिंदू जीवन पद्धति को समझाते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि हिंदू संस्कृति पूरी दुनिया को एक परिवार मानती है। उन्होंने कहा कि हम सजीव और निर्जीव- हर चीज में 'एकत्व' देखते हैं। जब हिंदुओं का मूल दर्शन ही यही है, तो वर्चस्ववादी होने का सवाल ही पैदा नहीं होता। ऐतिहासिक तथ्य सामने रखते हुए उन्होंने याद दिलाया कि इतिहास में हिंदुओं ने कभी भी किसी अन्य देश पर आक्रमण नहीं किया है।

आरएसएस के सामाजिक कार्य और शाखाएं

संगठन की कार्यप्रणाली के बारे में बताते हुए होसबोले ने कहा कि समाज के हर वर्ग और आयु के लोग संघ के स्वयंसेवक हैं। आरएसएस प्रतिदिन लगभग 83,000 'शाखाएं' आयोजित करता है। इन शाखाओं का मुख्य उद्देश्य समाज में सेवा भाव जगाना, जीवन मूल्यों का निर्माण करना और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देना है। आरएसएस प्राकृतिक आपदाओं के दौरान राहत कार्यों में हमेशा आगे रहता है। इसके अलावा, संगठन शिक्षा, स्वास्थ्य, आत्मरक्षा, ग्रामीण विकास और पर्यावरण संरक्षण जैसे अहम क्षेत्रों में भी सक्रिय रूप से काम कर रहा है।

आधुनिकीकरण और सांस्कृतिक मूल्यों का सह-अस्तित्व

होसबोले ने इस धारणा को भी गलत बताया कि संस्कृति और आधुनिकीकरण एक-दूसरे के विरोधी हैं। उन्होंने कहा कि आधुनिकीकरण (औद्योगीकरण, तकनीक और व्यक्तिवादी प्रवृत्तियां) तथा सांस्कृतिक मूल्य एक साथ चल सकते हैं, बशर्ते दोनों को समय के अनुसार ढाला जाए। वैश्विक उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा- चाहे वह हिंदू समाज हो, भारतीय समाज हो, या फिर जापान और चीन- इन सभी ने अपने सभ्यतागत और सांस्कृतिक मूल्यों को अक्षुण्ण रखते हुए खुद को सफलतापूर्वक आधुनिक बनाया है। वे अपनी संस्कृति से ही प्रेरणा लेते हैं।