लोकसभा में पेश होगा कॉर्पोरेट संशोधन विधेयक, स्टार्टअप और छोटे उद्योगों की आसान हो सकती है राह
देश में ईज ऑफ डुइंग बिजनेस के प्रोमट करने और कई प्रावधानों के डीक्रिमिनलाइजेशन के लिए सरकार सोमवार को संसद में कॉर्पोरेट संशोधन विधेयक 2026 पेश करने जा रही है। इसका उद्देश्य छोटे उद्योगों और स्टार्टअप्स को प्रमोट करना है।

केंद्र सरकार सोमवार को संसद में कॉर्पोरेट कानूनों में संशोधन करने के लिए विधेयक पेश करने जा रही है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण यह संशोधन विधेयक सदन में पेश करेंगी। इसका उद्देश्य ईज ऑफ डुइंग बिजनेस को आगे बढ़ाना है। मौजूदा कानून में कई आपराधिक प्रावधान हैं जिन्हें जुर्माने में बदला जा सकता है। इसके अलावा छोटे उद्योगों, स्टार्टअप और किसानों के बोझ को कम करने का प्रयास किया जा सकता है।
इस विधेयक का उद्देश्य सीमित देयता भागीदारी कानून 2008 और कंपनी अधिनियम में संशोधन करना है। यह वित्त विधेयक सोमवार की कार्यसूची में रखा गया है। कैबिनेट ने 10 मार्च को इस बिल को मंजूरी दे दी थी। दोनों ही कानूनों में पहले भी संशोधन हो चुके है। कॉर्पोरेट ऐक्ट को 2015 से चार बार संशोधित किया जा चुका है। वहीं एलएलपी ऐक्ट को 2021 में संशोधित किया गया था।
मामले के जानकार एक अधिकारी ने बताया कि इस संशोधन विधेयक का उद्देश्य कई प्रावधानों का डीक्रिमिनलाइजेशन करना है। इसके अलावा स्टार्टअप्स और प्रड्यूसर कंपनियों को फायदा पहुंचने का प्रयास होगा।
इसके अलावा राज्यसभा में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) विधेयक 2026 पेश कर सकते हैं। इसका उद्देश्य सशस्त्र पुलिस बलों में ग्रुप ए सामान्य ड्यूटी अधिकारियों और अन्य अधिकारियों की भर्ती और सेवा संबंधित नियमों में परिवर्तन करना है।
ट्रांसजेंडर विधेयक को वापस लेने की मांग
विपक्षी सांसदों और तृतीय लिंग अधिकार कार्यकर्ताओं ने रविवार को सरकार से ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) संशोधन विधेयक, 2026 को वापस लेने की मांग की। उनका कहना है कि प्रस्तावित संशोधन से ट्रांसजेंडर समुदाय के अधिकार कमजोर हो सकते हैं। इस विधेयक को वापस लेने की मांग यहां प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में आयोजित एक जन सुनवाई में की गई, जहां प्रतिभागियों ने ट्रांसजेंडर लोगों पर इसके संभावित प्रभाव को लेकर चिंता जताई।
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री वीरेंद्र कुमार ने 13 मार्च को लोकसभा में ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) संशोधन विधेयक पेश किया था। इस विधेयक का उद्देश्य ''ट्रांसजेंडर'' शब्द की सटीक परिभाषा देना है। यह प्रस्तावित कानून के दायरे से ''विभिन्न यौन अभिरूचि और स्वयं-निर्धारित लैंगिक पहचान'' को बाहर रखने का भी प्रावधान करता है। इसमें रेखांकित किया गया है कि एक ट्रांसजेंडर व्यक्ति में ''अलग-अलग यौन अभिविन्यास और स्व-अनुभूत यौन पहचान वाले व्यक्ति शामिल नहीं होंगे, और न ही कभी शामिल किए गए होंगे'।
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के प्रवक्ता अनीश गावंडे ने कहा कि विधेयक को वापस लेने की स्पष्ट तौर पर मांग है। उन्होंने कहा, ''यदि सरकार इसे वापस लेने को तैयार नहीं है, तो इसे पुनर्विचार के लिए सामाजिक न्याय और अधिकारिता संबंधी स्थायी समिति को भेजा जाना चाहिए।''




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