रैगिंग, यौन उत्पीड़न, जातिगत पूर्वाग्रह...सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी को क्या-क्या दिए निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह मसौदा नियम तैयार करते समय उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्रों की आत्महत्या को रोकने के लिए रैगिंग, यौन उत्पीड़न और जाति, लिंग, दिव्यांगता तथा अन्य पूर्वाग्रहों के आधार पर भेदभाव से निपटने के सुझावों पर विचार करे।

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) को कुछ अहम निर्देश दिए। इसमें कोर्ट ने कहा कि वह मसौदा नियम तैयार करते समय उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्रों की आत्महत्या को रोकने के लिए रैगिंग, यौन उत्पीड़न और जाति, लिंग, दिव्यांगता तथा अन्य पूर्वाग्रहों के आधार पर भेदभाव से निपटने के सुझावों पर विचार करे। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने यूजीसी से दो महीने के भीतर सुझावों पर विचार करने को कहा है।
बेंच ने रोहित वेमुला और पायल तड़वी की माताओं के सुझावों पर भी विचार करने को कहा है, जिन्होंने अपने-अपने परिसरों में जाति आधारित भेदभाव का सामना करने के बाद कथित तौर पर आत्महत्या कर ली थी। केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि मसौदा नियम प्रकाशित किए गए थे। एक विशेषज्ञ कमेटी ने मिली 300 से अधिक आपत्तियों की पड़ताल की थी। उन्होंने कहा कि विशेषज्ञ समिति ने आपत्तियों की पड़ताल के बाद यूजीसी से मसौदा नियमों में कुछ संशोधन करने को कहा है।
यूजीसी वर्तमान में विशेषज्ञ समिति की उन सिफारिशों की जांच कर रही है। संबंधित माताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह ने कहा कि वे चाहती हैं कि यूजीसी उनके सुझावों पर विचार करे, ताकि किसी और की जान न जाए। शीर्ष अदालत ने यूजीसी को आठ सप्ताह के भीतर सुझावों पर विचार करने का निर्देश दिया।




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