Congress said that circular demanding additional Rs 10000 from Hajj pilgrims should be withdrawn हज किराए में इजाफे पर कांग्रेस का हल्ला बोल, 10000 वाला फैसला तुरंत वापस लेने की मांग; जानें सबकुछ, India News in Hindi - Hindustan
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हज किराए में इजाफे पर कांग्रेस का हल्ला बोल, 10000 वाला फैसला तुरंत वापस लेने की मांग; जानें सबकुछ

कांग्रेस महासचिव और सांसद सैयद नसीर हुसैन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि 28 अप्रैल 2026 को अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय ने परिपत्र जारी कर हर जायरीन से 15 मई तक अतिरिक्त भुगतान की मांग की है। यह बिना किसी पूर्व सूचना, परामर्श या उचित कारण बताए लिया गया फैसला है।

Sun, 3 May 2026 08:39 PMDevendra Kasyap लाइव हिन्दुस्तान
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हज किराए में इजाफे पर कांग्रेस का हल्ला बोल, 10000 वाला फैसला तुरंत वापस लेने की मांग; जानें सबकुछ

कांग्रेस ने रविवार को भारतीय हज समिति के उस परिपत्र को तुरंत वापस लेने की मांग की, जिसमें हज 2026 के लिए जायरीनों के हवाई किराए में प्रति व्यक्ति 10000 रुपये की वृद्धि कर दी गई है। पार्टी ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार के शासनकाल में हज यात्रा की लागत में लगातार हो रही बेतहाशा बढ़ोतरी ने इसे आम भारतीय परिवारों की पहुंच से बाहर कर दिया है।

यह मांग ऐसे समय आई है जब भारतीय हज समिति ने वैश्विक स्तर पर विमानन टरबाइन ईंधन (ATF) की कीमतों में वृद्धि का हवाला देते हुए हज हवाई किराए में 10000 रुपये प्रति जायरीन बढ़ाने का फैसला किया। हालांकि, केंद्र सरकार का दावा है कि बातचीत के माध्यम से इस बढ़ोतरी को सीमित रखा गया है। विपक्षी नेताओं ने इस फैसले की तीखी आलोचना की और इसे 'अन्यायपूर्ण' करार दिया।

भारतीय हज समिति के परिपत्र में कहा गया है कि पश्चिम एशिया में चल रहे संकट के कारण उत्पन्न असाधारण परिस्थितियों को देखते हुए अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय ने हज 2026 के हवाई किराए में संशोधन की मंजूरी दे दी है। परिपत्र के अनुसार, सभी जायरीनों को 15 मई तक अतिरिक्त 10000 रुपये जमा कराने होंगे।

क्या बोली कांग्रेस?

कांग्रेस महासचिव और सांसद सैयद नसीर हुसैन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि 28 अप्रैल 2026 को अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय ने परिपत्र जारी कर हर जायरीन से 15 मई तक अतिरिक्त भुगतान की मांग की है। यह बिना किसी पूर्व सूचना, परामर्श या उचित कारण बताए लिया गया फैसला है।

नसीर हुसैन ने आगे कहा कि जायरीनों ने कई महीनों में किस्तों में पूरी रकम जमा कर दी है, जिनमें बड़ी संख्या में बुजुर्ग शामिल हैं। कई जायरीन पहले ही सऊदी अरब पहुंच चुके हैं। उन्हें हो रही परेशानी सिर्फ आर्थिक नहीं है। यह कुप्रबंधन का नतीजा है और जायरीनों को राजस्व का स्रोत मानने की मानसिकता को दर्शाता है, जबकि उन्हें सुरक्षा और सम्मान का हकदार नागरिक माना जाना चाहिए।

तुरंत वापस लेने की मांग

अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) ने मांग की है कि 28 अप्रैल के परिपत्र को तत्काल वापस लिया जाए, उससे एकत्र की गई पूरी राशि वापस की जाए और 2027 के हज सत्र से पहले प्रतिस्पर्धी निविदा प्रक्रिया तथा हज लागत स्थिरता को सुनिश्चित करने वाले ढांचे को लागू किया जाए।

इस बीच, अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय ने हज पर गए जायरीनों द्वारा प्रबंधनों की सराहना वाले वीडियो शेयर करते हुए कहा कि यह हज प्रबंधन के प्रति सरकार की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जिससे सुनिश्चित होता है कि हर जायरीन को यात्रा के दौरान समय पर देखभाल, सहायता और सम्मान मिले।