CJI Suryakant on Collegium Matter Says The Issue being Raised is जिस मुद्दे को उठाने की कोशिश की जा रही, वो... कॉलेजियम मामले पर CJI सूर्यकांत, India News in Hindi - Hindustan
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जिस मुद्दे को उठाने की कोशिश की जा रही, वो... कॉलेजियम मामले पर CJI सूर्यकांत

न्यायालय उस याचिका की सुनवाई कर रहा था जिसमें आरोप लगाया गया था कि उच्च न्यायालय की कॉलेजियम की सिफारिश अमान्य थी क्योंकि वरिष्ठ न्यायाधीशों में से एक, न्यायमूर्ति निशा बानू, विचार-विमर्श का हिस्सा नहीं थीं।

Fri, 6 Feb 2026 09:18 PMMadan Tiwari लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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जिस मुद्दे को उठाने की कोशिश की जा रही, वो... कॉलेजियम मामले पर CJI सूर्यकांत

सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाई कोर्ट कॉलेजियम द्वारा की गई एक सिफारिश को चुनौती देने वाली याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई करने से इनकार करते हुए कहा कि ऐसे मुद्दे न्यायसंगत नहीं हैं और प्रशासनिक पक्ष से निपटने के लिए सक्षम प्राधिकारी पर छोड़ दिए जाने चाहिए। प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा, "जिस मुद्दे को उठाने का प्रयास किया जा रहा है, वह न्यायोचित नहीं है। ऐसे मुद्दों पर प्रशासनिक पक्ष के सक्षम प्राधिकारी द्वारा विचार किया जाना आवश्यक है। हमें रिट याचिका पर विचार करना आवश्यक नहीं लगता।"

न्यायालय उस याचिका की सुनवाई कर रहा था जिसमें आरोप लगाया गया था कि उच्च न्यायालय की कॉलेजियम की सिफारिश अमान्य थी क्योंकि वरिष्ठ न्यायाधीशों में से एक, न्यायमूर्ति निशा बानू, विचार-विमर्श का हिस्सा नहीं थीं। केंद्र सरकार ने पिछले साल 14 अक्टूबर को न्यायमूर्ति बानू के मद्रास उच्च न्यायालय से केरल उच्च न्यायालय में तबादले की अधिसूचना जारी की थी। हालांकि, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की ओर से स्मरण पत्र भेजे जाने के बाद ही उन्होंने दिसंबर 2025 में केरल उच्च न्यायालय में कार्यभार ग्रहण किया।

ए. प्रेम कुमार द्वारा वकील रंगोली सेठ के माध्यम से दायर जनहित याचिका में कहा गया है कि मद्रास उच्च न्यायालय द्वारा कॉलेजियम की सिफारिश न्यायमूर्ति बानू की विचार-विमर्श प्रक्रिया में भागीदारी के बिना की गई थी। याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता रचना श्रीवास्तव ने कहा कि कॉलेजियम की संरचना गलत थी, क्योंकि न्यायमूर्ति बानू उस समय मद्रास उच्च न्यायालय की न्यायाधीश थीं। प्रधान न्यायाधीश ने कहा, "हम आपको केवल इतना ही आश्वस्त कर सकते हैं कि भारत के प्रधान न्यायाधीश और कॉलेजियम के न्यायाधीश किसी भी स्थिति का सामना करने में सक्षम हैं। हमें सलाह देने के लिए धन्यवाद...।" पीठ ने याचिकाकर्ता को उच्च न्यायालय में जाने की अनुमति देने से इनकार करते हुए कहा, "कुछ मत कीजिए। इस मामले को हमारे संज्ञान में लाने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।"

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