CBI tightens its grip on Bihar cadre IAS officer Sanjeev Hans registers case in Rs 1 crore bribery case बिहार कैडर के IAS संजीव हंस पर CBI का शिकंजा, 1 करोड़ रिश्वत मामले में केस दर्ज, India News in Hindi - Hindustan
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बिहार कैडर के IAS संजीव हंस पर CBI का शिकंजा, 1 करोड़ रिश्वत मामले में केस दर्ज

IAS officer Sanjeev Hans: बिहार कैडर के वरिष्ठ आईएएस संजीव हंस की मुश्किलें एक बार फिर से बढ़ गई हैं। सीबीआई ने उनके खिलाफ 2019 के एक मामले में 1 करोड़ रिश्वत लेने का मामला दर्ज किया है। हंस के वकील ने इन आरोपों को खारिज किया है।

Mon, 23 March 2026 11:40 PMUpendra Thapak लाइव हिन्दुस्तान
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बिहार कैडर के IAS संजीव हंस पर CBI का शिकंजा, 1 करोड़ रिश्वत मामले में केस दर्ज

IAS Sanjeev Hans: बिहार कैडर से आईएएस और पूर्व केंद्रीय मंत्री दिवंगत राम विलास पासवान के निजी सचिव रह चुके संजीव हंस की मुश्किलें बढ़ गई हैं। 2019 में मुंबई के एक रियल एस्टेट कारोबारी के 1 करोड़ रिश्वत लेने के आरोप में सीबीआई ने उनके खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। सीबीआई ने अपनी एफआईआर में संजीव हंस के अलावा विपुल बंसल, अनुभव अग्रवाल और इनकी सहयोगी कंपनी ईस्ट एंड वेस्ट बिल्सडर्स का नाम भी शामिल किया है।

सीबीआई के अधिकारियों के द्वारा दर्ज की गई एफआईआर के मुताबिक, 2019 में एक बिल्डर-खरीददार विवाद के मामले में एनसीडीआरसी से मामला बिल्डर के पक्ष में करवाने के लिए यह पूरा खेल किया गया था। संजीव हंस के मित्र विपुल बंसल ने हंस से मिलकर इस पूरे खेल को आगे बढ़ाया था। जांच एजेंसी के अनुसार, विपुल बंसल ने संजीव हंस और बिल्डर अनुभव अग्रवाल के बीच मुलाकात करवाई थी। इस मुलाकात के दौरान ही अग्रवाल ने एनसीडीआरसी से अपने पक्ष में आदेश दिलवाने के लिए एक करोड़ रुपए की रिश्वत की पेशकश की थी।

आपको बता दें, एनसीडीआरसी उपभोक्ता मामलों, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के अधीन आता है, जिस समय यह घटनाक्रम चल रहा था। उस समय संजीव हंस, इस मंत्रालय के केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान के निजी सचिव के रूप में काम कर रहे थे।

जांच एजेंसियों का आरोप है कि संजीव हंस ने अपने पद का फायदा उठाकर ‘ईस्ट एंड वेस्ट बिल्डर्स’ के पक्ष में एनसीडीआरसी के दो अलग-अलग मामलों की तारीखें तय करवाईं और इसके प्रमोटर और डायरेक्टर 'सरंगा अग्रवाल' की गिरफ्तारी टलवाने में भी मदद की। इन एहसानों के बदले में हंस को विपुल बंसल के जरिए एक करोड़ रुपए की रिश्वत पहुंचाई गई।

एजेंसी के मुताबिक, रिश्वत किश्तों में संजीव हंस के सहायक शादाब खान और पुष्प राज बजाज के माध्यम से संजीब हंस के पास पहुंचाई गई थी।

सीबीआई की तरफ से दायर किए गए इस मामले को लेकर संजीव हंस के वकील चंगेज खान ने बयान जारी किया। उन्होंने इन आरोपों को पूरी तरह से खारिज किया है।

विवादों से जुड़े रहे संजीव हंस

बिहार कैडर 1997 बैच के आईएएस अधिकारी संजीव हंस का विवादों से पुराना नाता रहा है। देश के महत्वपूर्ण पदों पर रहने वाले इन अधिकारी के ऊपर दुष्कर्म और मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप भी लगाया जा चुका है। एक महिला ने इनके ऊपर शादी का झांसा देकर बार-बार यौन संबंध बनाने का आरोप लगाया था। एक आईएएस अधिकारी के ऊपर इस तरीके के आरोपों के बाद इनके खिलाफ विजलेंस की जांच शुरू हुई, जिसमें आय से अधिक संपत्ति का मामला सामने आया। इसके बाद ईडी ने भी इनके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग और आय से अधिक संपत्ति का मामला खोल दिया। दोनों मामलों में हंस के खिलाफ मामला दर्ज हुआ।

18 अक्तूबर 2024 को ईडी ने आईएएस संजीव हंस को गिरफ्तार कर लिया और मनी लॉन्ड्रिंग और भ्रष्टाचार के मामले में इन्हें जेल भेज दिया। इसके बाद वह 10 से 12 महीने तक पटना की बेउर जेल में रहे। ईडी के मुताबिक हंस के ऊपर मनी लॉन्ड्रिंग, आय से अधिक संपत्ति, ऊर्जा विभाग में रहते हए टेंडर घोटाला, वित्तीय अनियमितता और एक मामले में लगभग 90 करोड़ रुपए तक के घोटाले का आरोप सामने आया है।

लंबे चले इस मुकदमे के बाद अक्तूबर 2025 में पटना हाई कोर्ट ने संजीव हंस को सशर्त जमानत दे दी। रेप के आरोप को हाई कोर्ट ने बदनाम करने की साजिश बताकर खारिज कर दिया, लेकिन अभी भी उनके ऊपर मनी लॉन्ड्रिंग और भ्रष्टाचार का मामला चल रहा है।

गौरतलब है कि जमानत पर बाहर आने के बाद संजीब हंस को काफी दिनों तक पोस्टिंग नहीं दी गई थी, लेकिन 2026 की शुरुआत में बिहार सरकार ने एक बार फिर से उनकी बहाली की थी।