लोकतंत्र को तो ऐसे हाईजैक करने नहीं दे सकते, सुप्रीम कोर्ट ने क्यों की ऐसी तल्ख टिप्पणी; BJP को झटका?
सुनवाई के दौरान जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस के विनोद चंद्रन की पीठ ने भाजपा उम्मीदवार के खिलाफ कुछ तल्ख टिप्पणियां भी कीं। पीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा कि हम आपको इस तरह लोकतंत्र को हाईजैक नहीं करने दे सकते।

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (11 मई) को चुनाव विवाद से जुड़े एक मामले की सुनवाई करते हुए भाजपा उम्मीदवार को न सिर्फ झटका दिया बल्कि तल्ख टिप्पणी भी की कि हम आपको इस तरह लोकतंत्र को हाईजैक नहीं करने दे सकते। इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने कांग्रेस नेता को राहत देते हुए उसकी विधायकी बहाल रखने का आदेश दिया। यह मामला कर्नाटक की श्रृंगेरी विधानसभा सीट पर हुए चुनाव से जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस नेता TD राजगोड़ा को अंतरिम राहत देते हुए निर्देश दिया कि वह अभी के लिए कर्नाटक की श्रृंगेरी सीट से विधायक (MLA) बने रहेंगे, भले ही हाल ही में वोटों की दोबारा गिनती होने पर BJP उम्मीदवार DN जीवराज को विजेता घोषित किया गया हो।
सुनवाई के दौरान जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस के विनोद चंद्रन की पीठ ने भाजपा उम्मीदवार के खिलाफ कुछ तल्ख टिप्पणियां भी कीं। पीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा, "हम आपको इस तरह लोकतंत्र को हाईजैक नहीं करने दे सकते।" इसके बाद, बेंच ने एक अंतरिम आदेश जारी करते हुए दोनों पक्षों को 'स्टेटस को' (वोटों की दोबारा गिनती से पहले की स्थिति) बनाए रखने का निर्देश दिया। इसका मतलब है कि राजगोड़ा श्रृंगेरी के विधायक बने रहेंगे।
क्या है मामला?
बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, यह मामला 2023 के कर्नाटक विधानसभा चुनावों से जुड़ा है। कांग्रेस के TD राजगोड़ा को श्रृंगेरी सीट से 201 वोटों के मामूली अंतर से तब विजेता घोषित किया गया था। बाद में भाजपा उम्मीदवार DN जीवराज ने कर्नाटक हाई कोर्ट में एक चुनाव याचिका दायर कर इस नतीजे को चुनौती दी। पिछले महीने 6 अप्रैल को हाई कोर्ट ने पोस्टल बैलेट वोटों की दोबारा गिनती का आदेश दिया, जिसमें 279 खारिज किए गए पोस्टल बैलेट वोटों का दोबारा सत्यापन भी शामिल था।
यथास्थिति बहाल करने का आदेश
इसके बाद 3 मई, 2026 को रिटर्निंग ऑफिसर ने औपचारिक रूप से संशोधित नतीजे घोषित किए, जिसमें बताया गया कि राजगोड़ा के वोटों में 255 की कमी आई है और जीवराज को श्रृंगेरी सीट से विजेता उम्मीदवार घोषित किया गया। इसके बाद राजगोड़ा ने वकील तुषार गिरी के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर इस घटनाक्रम को चुनौती दी। इसी याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने सोमवार को आदेश दिया कि राजगोड़ा अभी के लिए श्रृंगेरी सीट का प्रतिनिधित्व करने वाले विधायक (MLA) बने रहेंगे, और इस स्थिति को बहाल करने के लिए कदम उठाने का निर्देश दिया।
सुप्रीम कोर्ट में दायर अर्जी मे राजगोड़ा ने तर्क दिया था कि हाई कोर्ट ने केवल 279 खारिज किए गए पोस्टल बैलेट वोटों के दोबारा सत्यापन का आदेश दिया था, जबकि रिटर्निंग ऑफिसर ने गैर-कानूनी तरीके से 562 ऐसे वैध पोस्टल बैलेट वोटों पर दोबारा विचार किया जो राजगोड़ा के पक्ष में थे। उन्होंने हाई कोर्ट के फैसले को ही चुनौती दी, यह सवाल उठाते हुए कि दोबारा गिनती की क्या जरूरत थी, जबकि कोर्ट ने भ्रष्टाचार के उन आरोपों के बारे में उनके पक्ष में फैसला दिया था जो जीवराज ने उन पर लगाए थे।
राजगोड़ा अभी MLA बने रहेंगे
दलीलों पर विचार करने के बाद, सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि राजगोड़ा अभी MLA बने रहेंगे, और यह भी निर्देश दिया कि उन्हें MLA के तौर पर बहाल करने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएं। इस बीच, जीवराज पर पोस्टल बैलेट पेपर से छेड़छाड़ करने का एक आपराधिक मामला चल रहा है। यह शिकायत कांग्रेस के चुनाव एजेंट सुधीर कुमार मुरोली ने BJP नेता, डिप्टी कमिश्नर KN रमेश, पूर्व रिटर्निंग ऑफिसर वेदमूर्ति और अन्य लोगों के ख़िलाफ़ दर्ज कराई थी। जीवराज ने इस आपराधिक मामले को रद्द करवाने के लिए भी कर्नाटक हाई कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया है। हाई कोर्ट ने हाल ही में जीवराज और वेदमूर्ति के खिलाफ चल रहे इस मामले पर रोक लगा दी थी।




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