तोतों ने किया फसल का नुकसान, तो सरकार देगी मुआवजा? हाई कोर्ट ने दिया आदेश
महाराष्ट्र में बॉम्बे हाई कोर्ट ने सरकार को आदेश दिया है कि वह तोतों द्वारा किए गए किसान के नुकसान की भरपाई करें। 2016 के इस मामले में वन्य जीव अभ्यारण्य में रहने वाले तोतों ने अनार किसान की फसल को बर्बाद कर दिया था।

महाराष्ट्र में एक किसान की अनार की खेती को पास के वन्यजीव अभ्यारण्य में रहने वाले तोतों ने खराब कर दिया था। अब बॉम्बे हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिया है कि वह किसान को हुए नुकसान की भरपाई करे। नागपुर पीठ ने चिंता जताई कि अगर सरकार ऐसा नहीं करती है, तो किसान कोई ऐसा कदम उठा सकते हैं, जिससे तोतों को नुकसान हो। ऐसी स्थिति में यह वन्य जीव अधिनियम का उल्लंघन होगा। सरकार को इस स्थिति से बचने के लिए मुआवजा देना होगा।
जस्टिस उर्मिला जोशी और जस्टिस निवेदिता मेहता की पीठ किसान को मुआवजा देने का आदेश देते हुए कहा कि यह राज्य सरकार की ही जिम्मेदारी है कि सरकार वन्य जीवों की रक्षा के लिए किसान को मुआवजा दे। हाई कोर्ट ने अपने फैसले में 200 अनार के पेड़ों के लिए 200 रुपए प्रति पेड़ के हिसाब से मुआवजा देने का आदेश दिया है।
क्या है पूरा मामला?
यह पूरा मामला महाराष्ट्र के वर्धा जिले के हिंगी गांव का है। यहां अनार की खेती करने वाले किसान महादेव डकाटे ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की कि 2016 में उनकी अनार की फसल को पास के वन्य अभ्यारण्य में रहने वाले तोतों ने खराब कर दिया है। ऐसे में सरकार को उन्हें मुआवजा देना चाहिए।
हाईकोर्ट ने जब इस मामले में सरकार को जवाब तलब किया, तो सरकार की तरफ से इस याचिका का विरोध किया गया। सरकार ने कहा कि पूर्व में जारी प्रस्तावों के आधार पर केवल जंगली हाथियों और बाइसन द्वारा फलदार पेड़ों को होने वाले नुकसान कि स्थिति में ही मुआवजा दिया जा सकता है। हालांकि, अदालत ने इस तर्क को यह कहकर खारिज कर दिया कि पूर्व प्रस्तावों का उद्देश्य भी किसानों के नुकसान को कम करना ही है।
कोर्ट की तरफ से कहा गया, "जब पुराने प्रस्तावों के उद्देश्य में स्पष्ट किया गया है कि कुछ प्रजातियों द्वारा किए गए नुकसान की भरपाई की जाएगी। ऐसी स्थिति में जब अन्य प्रजातियां नुकसान करती हैं, तो उन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है।"
अदालत ने कहा कि वन्यजीव कानून एक विधायी कानून है, जो कि किसी भी सरकारी प्रस्ताव से ऊपर है। इसके अलावा, 1972 के अधिनियम के तहत वन्यजीव राज्य की संपत्ति माने जाते हैं। और इसमें भी कोई शक नहीं है कि तोते भी वन्य जीवों में शामिल हैं।




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