Almost 500 civil societies worker open letter to government over Women reservation bill, raises transparency concerns आरक्षण का तहे दिल से समर्थन, पर तरीका ठीक नहीं; 95 शहरों के 488 सामाजिक कार्यकर्ताओं की खुली चिट्ठी, India News in Hindi - Hindustan
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आरक्षण का तहे दिल से समर्थन, पर तरीका ठीक नहीं; 95 शहरों के 488 सामाजिक कार्यकर्ताओं की खुली चिट्ठी

Women's Reservation Bill: देश भर के 95 शहरों और जिलों से सिविल सोसाइटी के 488 लोगों के समूह ने सोमवार को एक खुली चिट्ठी में केंद्र सरकार से आग्रह किया कि वे व्यापक सलाह-मशविरे के लिए बिलों के ड्राफ़्ट को सार्वजनिक करें।

Mon, 13 April 2026 08:55 PMPramod Praveen पीटीआई, नई दिल्ली
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आरक्षण का तहे दिल से समर्थन, पर तरीका ठीक नहीं; 95 शहरों के 488 सामाजिक कार्यकर्ताओं की खुली चिट्ठी

Women's Reservation Bill: देश भर के महिला समूहों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और नागरिक संस्थाओं के करीब पांच सौ सदस्यों ने महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े प्रस्तावित विधेयकों पर आगे बढ़ने के सरकार के तौर-तरीके को लेकर गहरी चिंता जताई है। ये विधेयक इस सप्ताह संसद में पेश किए जाने हैं। सिविल सोसायटी के सदस्यों ने हालांकि विधानमंडलों में महिलाओं के लिए आरक्षण के सिद्धांत का एक बार फिर समर्थन किया है लेकिन महिला आरक्षण और परिसीमन पर प्रस्तावित कानूनों में संशोधन के तरीके और उसमें पारदर्शिता की कमी पर चिंता जताई है।

95 शहरों और जिलों से सिविल सोसाइटी के 488 लोगों के समूह ने सोमवार को एक खुली चिट्ठी में केंद्र सरकार से आग्रह किया कि वे व्यापक सलाह-मशविरे के लिए बिलों के ड्राफ़्ट को सार्वजनिक करें। समूह ने कहा है कि वे विधायिकाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण का "तहे दिल से" समर्थन करते हैं। इस याचिका के प्रमुख हस्ताक्षरकर्ताओं में अमु जोसेफ, अंजना प्रकाश, कल्पना कनबीरन, रोमिला थापर, नंदिनी सुंदर, उर्वशी बुटालिया और योगेंद्र यादव जैसे नाम शामिल हैं।

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बजट सत्र के विशेष विस्तार के तरीके पर ऐतराज

एक बयान में, हस्ताक्षरकर्ताओं ने उस तरीके पर चिंता जताई, जिस तरह से 16 से 18 अप्रैल तक बजट सत्र के विशेष विस्तार के दौरान कानून पेश करने का प्रस्ताव है। बयान में कहा गया है कि प्रस्तावित कानूनों - जिनमें कथित तौर पर महिला आरक्षण और परिसीमन अभ्यास से जुड़े संशोधन शामिल हैं - का भारत के चुनावी ढांचे और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं पर दूरगामी प्रभाव पड़ने की उम्मीद है। महिला संगठनों और व्यक्तियों के एक समूह ने सांसदों को भी संबोधित कर खुली चिट्ठी लिखी है और उसमें कहा है कि यह कदम "जल्दबाजी" में उठाया गया है, क्योंकि राज्यों में विधानसभा चुनाव हो रहे हैं और आदर्श आचार संहिता लागू है।

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चुनावों के बीच सत्र की निंदा

पत्र में कहा गया है, "हम राज्य चुनावों के बीच जल्दबाजी में यह संयुक्त सत्र आहूत किए जाने की निंदा करते हैं।" पत्र में कहा गया है, "सरकार ने महिलाओं के समूहों को अपनी सिफारिशें रखने के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया।" अपनी मुख्य मांगों को उजागर करते हुए, हस्ताक्षरकर्ताओं ने कहा कि सरकार को "बिलों के ड्राफ़्ट का मूल पाठ तुरंत सार्वजनिक करना चाहिए और विभिन्न माध्यमों से, तथा कई भाषाओं में इसका व्यापक प्रसार सुनिश्चित करना चाहिए"। उन्होंने यह भी आग्रह किया कि प्रस्तावित कानूनों को "पूर्व-विधायी परामर्श नीति के अनुरूप, ठोस सार्वजनिक परामर्श प्रक्रिया से गुज़ारा जाना चाहिए"।

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निर्वाचन आयोग की भूमिका पर भी चिंता

हस्ताक्षरकर्ताओं ने तर्क दिया कि यदि इस सत्र का ध्यान केवल "नारी शक्ति वंदन अधिनियम" में "आवश्यक संशोधनों" तक सीमित रखा जाए, तो इससे "कुछ सकारात्मक परिणाम" हासिल हो सकते हैं। उन्होंने महिलाओं के आरक्षण को जनगणना के परिणामों और परिसीमन से जोड़ने वाले सभी संदर्भों को हटाने के लिए कानून में एक संशोधन का सुझाव दिया। हस्ताक्षरकर्ताओं ने विशेष रूप से आरक्षित सीटों की पहचान को लेकर निर्वाचन आयोग की भूमिका पर भी चिंता जताई है और "संस्था की निष्पक्षता को लेकर गंभीर संदेह" व्यक्त किया।

लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़कर हो जाएगी 816

उन्होंने सुझाव दिया कि यह प्रक्रिया विशेष राज्य समितियों द्वारा की जाए, जिनमें निर्वाचन आयोग, राजनीतिक दलों और स्वतंत्र उम्मीदवारों के प्रतिनिधि शामिल हों, और कम से कम एक-तिहाई सदस्य महिलाएं हों। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 2029 के लोकसभा चुनावों से पहले नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लागू करने के लिए मसौदा विधेयकों को मंजूरी दी है। प्रस्तावित बदलावों में लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 816 करना शामिल है, जिनमें से 273 सीट महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।