विजय को समर्थन देने पर अखिलेश का कांग्रेस पर तंज, कहा- हम वह नहीं जो मुश्किल में साथ छोड़ दें
अखिलेश यादव के इस ट्वीट को INDIA गठबंधन में दरार के तौर भी देखा जा रहा है। अखिलेश यादव ने स्टालिन के प्रति एकजुटता दिखाकर यह संदेश दिया है कि समाजवादी पार्टी और DMK जैसे क्षेत्रीय दल अब भी एक-दूसरे के साथ खड़े हैं।

तमिलनाडु की राजनीति में भूचाल मचा हुआ है। डीएमकी, एआईडीएमके और टीवीके, किसी के पास भी बहुमत नहीं है। सभी दल सरकार बनाने के लिए रस्साकशी कर रहे हैं। ऐक्टर विजय के पास भले ही सबसे अधिक विधायक हैं, राज्यपाल उन्हें सरकार बनाने का न्योता नहीं दे रहे हैं। ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि उनके पास बहुमत के जरूरी 118 विधायकों का समर्थन नहीं है। कांग्रेस ने अपने पुराने सहयोगी डीएमके से अलग होकर विजय को समर्थन देने का ऐलान कर दिया है। हालांकि, यह बात समाजवादी पार्टी के सुप्रीम अखिलेश यादव को पसंद नहीं है। उन्होंने देश की सबसे पुरानी पार्टी का नाम लिए बगैर दो अलद-अलग नेताओं के साथ अपनी तस्वीर की मदद से तीखा तंज कसा है।
शुक्रवार को अखिलेश यादव ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन के साथ अपनी एक तस्वीर शेयर करके हुए लिखा, “हम वो नहीं जो मुश्किल वक्त में एक-दूसरे का साथ छोड़ दें।” आपको बता दें कि एक तस्वीर में वह कोलकाता में ममता बनर्जी के साथ दिख रहे हैं। वहीं, दूसरी तस्वीर में वह एमके स्टालिन के साथ नजर आ रहे हैं। दोनों ही पूर्व मुख्यमंत्रियों को हाल के विधानसभा चुनाव में करारी हार का सामना करना पड़ा है।
अखिलेश यादव के इस बयान को सीधे तौर पर कांग्रेस के लिए एक तंज माना जा रहा है। ऐसा इसलिए क्योंकि हाल ही में संपन्न हुए तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस ने DMK से गठबंधन तोड़ लिया और विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) को समर्थन देने की घोषणा की। कांग्रेस के इस कदम को DMK ने पीठ में छुरा घोंपना करार दिया है। DMK नेताओं का कहना है कि मुश्किल वक्त में कांग्रेस ने सत्ता के लालच में दशकों पुराने रिश्ते को खत्म कर दिया।
अखिलेश यादव के इस ट्वीट को INDIA गठबंधन में दरार के तौर भी देखा जा रहा है। अखिलेश यादव ने स्टालिन के प्रति एकजुटता दिखाकर यह संदेश दिया है कि समाजवादी पार्टी और DMK जैसे क्षेत्रीय दल अब भी एक-दूसरे के साथ खड़े हैं।
आपको बता दें कि तमिलनाडु में सरकार बनाने को लेकर सस्पेंस बरकरार है। विजय की पार्टी TVK सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, लेकिन बहुमत से दूर है। कांग्रेस के समर्थन के बाद विजय सरकार बनाने की दावेदारी पेश कर रहे हैं, जबकि DMK इसे जनादेश का अपमान बता रही है।




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