After LPG is a crisis now looming over CNG and PNG in India Iran halts 2 Qatar tankers LPG के बाद अब क्या CNG और PNG पर भी आने वाला है संकट? ईरान ने कतर के 2 टैंकर रोके, India News in Hindi - Hindustan
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LPG के बाद अब क्या CNG और PNG पर भी आने वाला है संकट? ईरान ने कतर के 2 टैंकर रोके

LPG के बाद अब भारत में CNG और PNG पर बड़ा संकट मंडरा रहा है। ईरान-इजरायल युद्ध, होर्मुज विवाद और घरेलू गैस कोटे में कटौती के कारण कीमतें बढ़ने की भारी आशंका है। पूरी इनसाइड स्टोरी यहां पढ़ें।

Tue, 7 April 2026 10:03 AMAmit Kumar लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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LPG के बाद अब क्या CNG और PNG पर भी आने वाला है संकट? ईरान ने कतर के 2 टैंकर रोके

एलपीजी सिलेंडर की किल्लत और कीमतों में उछाल के बाद अब देशभर के घरों-वाहनों में इस्तेमाल होने वाली CNG और PNG पर भी संकट के बादल मंडरा रहे हैं। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लगभग बंद कर रखा है, जहां से भारत के ज्यादातर LNG आयात होते हैं। याद रहे, नेचुरल गैस लिक्विफाइड फॉर्म (LNG) में ही आयात किया जाता है- इसे टैंकरों से भारत लाया जाता है, फिर रिगैसीफाई करके PNG (पाइप्ड नेचुरल गैस) और CNG (कंप्रेस्ड नेचुरल गैस) में बदला जाता है। दरअसल ये आशंका ईरान की ताजा कार्रवाई के बाद बढ़ी है।

ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने कतर के दो LNG टैंकरों को रोका

ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के समुद्री रास्ते की ओर जा रहे कतर के दो तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) टैंकरों को रोक दिया है। इन जहाजों को बिना कोई स्पष्टीकरण दिए अपनी मौजूदा स्थिति में ही रुकने का निर्देश दिया गया है। यह घटना ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध के कारण वैश्विक ऊर्जा सप्लाई बुरी तरह प्रभावित है।

रॉयटर्स को जानकारी देने वाले एक सूत्र के अनुसार, ईरान ने पिछले सप्ताह पाकिस्तान की मध्यस्थता में अमेरिका के साथ हुए एक समझौते के तहत इन जहाजों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने की अनुमति दी थी। नाम न छापने की शर्त पर सूत्र ने बताया कि यह कदम उसी बातचीत का हिस्सा था।

हालांकि, शिप-ट्रैकिंग डेटा के अनुसार सोमवार शाम तक दोनों जहाज संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के तट पर तैनात थे और उन्होंने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पार नहीं किया था। यदि ये जहाज सफलतापूर्वक इस जलमार्ग को पार कर लेते, तो 28 फरवरी को ईरान के साथ शुरू हुए अमेरिका-इजरायल युद्ध के बाद से इस मार्ग से गुजरने वाला यह पहला LNG कार्गो होता।

अमेरिका-इजरायल युद्ध और ऊर्जा संकट

28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के साथ इस युद्ध की शुरुआत हुई थी। इस संघर्ष में अब तक हजारों लोगों की जान जा चुकी है और कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आने से वैश्विक अर्थव्यवस्था को गहरा नुकसान पहुंचा है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की बात करें तो यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण जलमार्ग है, जहां से दुनिया के कुल तेल और LNG प्रवाह का लगभग पांचवां (20%) हिस्सा गुजरता है। युद्ध और लगातार हो रहे जवाबी हमलों के कारण व्यावसायिक जहाजों के लिए यह मार्ग प्रभावी रूप से बंद हो गया है।

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जहाजों की बदलती दिशा और ट्रैकिंग डेटा

डेटा एनालिटिक्स फर्म केप्लर (Kpler) और एलएसईजी (LSEG) के अनुसार, कतर के दो जहाजों- 'अल दायेन' और 'रशीदा' ने फरवरी के अंत में कतर के रास लाफान से अपना कार्गो लोड किया था। ये जहाज पूर्व की ओर बढ़ रहे थे, लेकिन शिप-ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक सोमवार सुबह ये वापस मुड़ गए।

सोमवार दोपहर को दोनों जहाजों ने अपनी दिशा और गंतव्य के सिग्नल भी बदल दिए:

अल दायेन: इस जहाज ने पहले अपना गंतव्य चीन और फिर पाकिस्तान बताया था, लेकिन बाद में यह 'रास लाफान' (कतर) वापस जाने का सिग्नल देने लगा।

रशीदा: इस जहाज ने पाकिस्तान के पोर्ट कासिम की बजाय "फॉर ऑर्डर्स" (निर्देशों की प्रतीक्षा में) का जेनेरिक सिग्नल देना शुरू कर दिया।

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कतर के निर्यात पर भारी असर

केप्लर के डेटा से पता चलता है कि दोनों टैंकरों का नियंत्रण 'कतरएनर्जी' के पास है। हालांकि, कतरएनर्जी ने ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स द्वारा जहाजों को रोके जाने पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है। इससे पहले, जापान के एक खाली LNG टैंकर 'सोहर एलएनजी' ने इस जलमार्ग को पार किया था, लेकिन कंपनी ने यह बताने से इनकार कर दिया कि क्या इसके लिए कोई बातचीत हुई थी।

कतर दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा LNG निर्यातक देश है, जिसकी ज्यादातर सप्लाई एशियाई देशों को की जाती है। लेकिन इस युद्ध के दौरान ईरानी हमलों ने कतर की 17% LNG निर्यात क्षमता को नष्ट कर दिया है। अनुमान है कि मरम्मत कार्यों में तीन से पांच साल का समय लगेगा, जिससे सालाना 12.8 मिलियन टन ईंधन का निर्यात लंबे समय तक प्रभावित रहेगा।

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भारत पर पड़ेगा असर?

ईरान युद्ध शुरू होने के बाद कतर (भारत का सबसे बड़ा LNG सप्लायर) ने मार्च 2026 से एक्सपोर्ट रोक दिया है। होर्मुज से गुजरने वाले LNG टैंकरों की बीमा कवरेज तक मुश्किल हो गई है। नतीजा? भारत के LNG टर्मिनल्स पर स्टॉक खत्म हो सकते हैं। LPG की तरह अब PNG और CNG भी कीमतों के चक्रव्यूह में फंस सकते हैं। हालांकि एक राहत की बात ये है कि ईरान ने भारत को मित्र देशों की लिस्ट में रखा है। जिसका मतलब है कि भारत के जहाजों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने की इजाजत है। लेकिन कलर से होने वाली सप्लाई अभी भी मेन बाधा बनी हुई है।

पिछले दिनों भारत सरकार ने Natural Gas (Supply Regulation) Order, 2026 जारी करके PNG (घरेलू कनेक्शन) और CNG (वाहनों) को प्राथमिकता दी है। घरों और पेट्रोल पंपों को 100% सप्लाई का वादा है, जबकि इंडस्ट्री और कमर्शियल यूजर्स को 20-70% कटौती झेलनी पड़ रही है। गुजरात गैस और GSPC जैसी कंपनियां पहले से ही इंडस्ट्रियल कस्टमर्स को आधा या उससे कम गैस दे रही हैं। लेकिन एक्सपर्ट्स चेतावनी देते हैं कि अगर युद्ध लंबा चला तो प्राथमिकता वाले सेक्टर भी प्रभावित होंगे। Kpler Insight के एनालिस्ट बताते हैं कि अभी सप्लाई पूरी तरह ठप नहीं हुई है, लेकिन होर्मुज पर निर्भरता भारत की कमजोरी है। स्टोरेज की कमी के कारण रातोंरात संकट आ सकता है।