Adhik Maas Ekadashi occurs once every three years on Bakrid Muslims postponed the ritual sacrifice of goats 3 साल में आती है यह एकादशी, हिंदुओं के सम्मान में मुस्लिमों ने टाली बकरे की कुर्बानी, India News in Hindi - Hindustan
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3 साल में आती है यह एकादशी, हिंदुओं के सम्मान में मुस्लिमों ने टाली बकरे की कुर्बानी

adhik maas ekadashi: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अधिक मास एकादशी हर तीन साल में केवल एक बार आती है। इस अत्यंत पावन अवसर पर भगवान विट्ठल का आशीर्वाद लेने के लिए देश और महाराष्ट्र के कोने-कोने से लाखों श्रद्धालु पंढरपुर पहुंचते हैं।

Thu, 28 May 2026 01:18 PMHimanshu Jha लाइव हिन्दुस्तान
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3 साल में आती है यह एकादशी, हिंदुओं के सम्मान में मुस्लिमों ने टाली बकरे की कुर्बानी

Adhik Maas Ekadashi: देशभर में हर्षोल्लास के साथ ईद-उल-अजहा यानी कि बकरीद का त्योहार मनाया जा रहा है। महाराष्ट्र के सोलापुर जिले के ऐतिहासिक तीर्थस्थल पंढरपुर से सांप्रदायिक सौहार्द और भाईचारे की एक बेहद खूबसूरत मिसाल पेश किया गया है। पंढरपुर के मुस्लिम समुदाय ने सर्वसम्मति से फैसला किया है कि वे इस साल बकरीद के मुख्य दिन यानी कि गुरुवार को बकरे की कुर्बानी नहीं देंगे। ऐसा इसलिए क्योंकि इसी दिन हिंदुओं का पवित्र त्योहार अधिक मास एकादशी भी पड़ रहा है।

मुस्लिम समाज के नेताओं ने बताया कि हिंदू श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं और इस पावन तिथि के महत्व को देखते हुए उन्होंने पशु क्रूरता से बचने और शांति बनाए रखने के लिए कुर्बानी की रस्म को अगले कुछ दिनों के लिए टालने का निर्णय लिया है।

न्यूज एजेंसी पीटीआई के अनुसार, पंढरपुर एक प्रसिद्ध मंदिर कस्बा है। यहां भगवान विट्ठल की पूजा के लिए देशभर से लोग जुटते हैं। स्थानीय मुस्लिम समुदाय के एक सदस्य ने इस ऐतिहासिक निर्णय पर बात करते हुए कहा, "मैं सालों से पंढरपुर में रह रहा हूं और मंदिर के विभिन्न उत्सवों व व्यवस्थाओं से हमेशा जुड़ा रहा हूं। इस साल बकरीद और अधिक मास एकादशी एक ही दिन हैं। भगवान विट्ठल के भक्तों की आस्था और भावनाओं का सम्मान करते हुए, हमारे पूरे समुदाय ने इस दिन बकरे की कुर्बानी न देने का फैसला किया है।"

तीन साल में एक बार आती है यह एकादशी

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अधिक मास एकादशी हर तीन साल में केवल एक बार आती है। इस अत्यंत पावन अवसर पर भगवान विट्ठल का आशीर्वाद लेने के लिए देश और महाराष्ट्र के कोने-कोने से लाखों श्रद्धालु पंढरपुर पहुंचते हैं।

मुस्लिम समुदाय के एक अन्य सदस्य ने बताया कि यह फैसला सिर्फ प्रशासनिक तालमेल नहीं है, बल्कि पंढरपुर के मुसलमानों की भी भगवान विट्ठल के प्रति गहरी आस्था और श्रद्धा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कुर्बानी पूरी तरह रद्द नहीं की गई है, बल्कि इसे एकादशी के समापन के बाद बाद में संपन्न किया जाएगा।

यह पहली बार नहीं है जब पंढरपुर के मुसलमानों ने ऐसा कदम उठाया है। बुजुर्गों के मुताबिक, अतीत में भी जब-जब बकरीद और आषाढ़ी एकादशी या कोई अन्य बड़ा हिंदू त्योहार एक ही दिन पड़ा है, तब-तब यहां के मुस्लिम समुदाय ने हमेशा आगे बढ़कर भाईचारे की रक्षा के लिए कुर्बानी को आगे बढ़ाया है।

मस्जिदों में नमाज के लिए भीड़

देश की राजधानी दिल्ली की ऐतिहासिक जामा मस्जिद में सुबह नमाज अदा करने के बाद एक नमाजी ने देश को भाईचारे का संदेश देते हुए कहा, "हम चाहते हैं कि यह त्योहार हर देशवासी मिलकर खुशी से मनाए। हमने अल्लाह से देश की तरक्की, अमन, शांति और आपसी सौहार्द के लिए खास दुआ की है।" राजस्थान के अजमेर में स्थित ख्वाजा गरीब नवाज दरगाह में बकरीद के मौके पर तड़के सुबह पवित्र जन्नती दरवाजा खोला गया, जहां हजारों की संख्या में जायरीनों ने पहुंचकर नमाज अदा की और मन्नतें मांगीं।