Abhishek Could Have Died Had It Not Been for His Helmet Mamata Banerjee Takes Nephew Home from Hospital हेलमेट न होता तो मर सकते थे अभिषेक; भतीजे को अस्पताल से घर लेकर गईं ममता, BJP पर कई आरोप, India News in Hindi - Hindustan
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हेलमेट न होता तो मर सकते थे अभिषेक; भतीजे को अस्पताल से घर लेकर गईं ममता, BJP पर कई आरोप

Abhishek Banerjee: अस्पताल के एक डॉक्टर द्वारा जारी कथित मेडिकल नोट में कहा गया कि छाती पर आए कुछ नीले निशानों को छोड़कर, शरीर पर किसी गंभीर चोट के कोई लक्षण नहीं हैं। मरीज पूरी तरह होश में है।

Sun, 31 May 2026 09:50 AMHimanshu Jha लाइव हिन्दुस्तान
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हेलमेट न होता तो मर सकते थे अभिषेक; भतीजे को अस्पताल से घर लेकर गईं ममता, BJP पर कई आरोप

पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना के सोनारपुर में हुए हमले के बाद टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी को शनिवार देर रात अस्पताल से घर ले जाया गया। इस दौरान पूर्व मुख्यमंत्री और टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी ने एक बेहद गंभीर और बड़ा दावा किया। उन्होंने संवाददाताओं से कहा, "अगर अभिषेक के सिर पर हेलमेट न होता तो वह इस हमले में मर भी सकते थे। उनकी छाती के पास खून के थक्के जम गए हैं।"

ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि हमले के दौरान अभिषेक की आंखों को भी नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई थी। इसके साथ ही उन्होंने अस्पताल प्रशासन और पुलिस पर राजनीतिक दबाव में आकर उचित इलाज न देने और जबरन डिस्चार्ज कराने का गंभीर आरोप लगाया है।

अस्पताल का दावा- चोटें मामूली हैं, भर्ती की जरूरत नहीं

एक तरफ जहां टीएमसी नेतृत्व इस हमले को जानलेवा बता रहा है, वहीं दूसरी तरफ अस्पताल के डॉक्टरों और अधिकारियों के दावों ने इस मामले में नया मोड़ ला दिया है। समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, एक निजी अस्पताल के वरिष्ठ डॉक्टर ने बताया, "प्रारंभिक टेस्ट रिपोर्ट के मुताबिक अभिषेक बनर्जी को आई चोटें सतही हैं। उन्हें अस्पताल में भर्ती करने की कोई आवश्यकता नहीं है।"

अस्पताल के एक डॉक्टर द्वारा जारी कथित मेडिकल नोट में कहा गया कि छाती पर आए कुछ नीले निशानों को छोड़कर, शरीर पर किसी गंभीर चोट के कोई लक्षण नहीं हैं। मरीज पूरी तरह होश में है। बातचीत कर रहा है और उसकी स्थिति सामान्य है।

हमले के बाद डायमंड हार्बर से सांसद अभिषेक बनर्जी को पहले ईएम बाईपास स्थित एक निजी अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में ले जाया गया था। लेकिन वहां पहुंचते ही ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि यहां कोई इलाज नहीं हो रहा है और उन्होंने तुरंत अभिषेक को मिंटो पार्क के पास स्थित दूसरे निजी अस्पताल बेलेव्यू में शिफ्ट करा दिया।

ममता बनर्जी ने कहा, "जब मैं अस्पताल के प्रशासक के साथ बैठी थी तो उन्होंने मुझसे विनती की क्योंकि उन्हें कथित तौर पर पुलिस के अलग-अलग विभागों और डीसी साउथ से धमकी भरे फोन आ रहे थे। भाजपा नेता भी उन्हें धमका रहे थे कि डॉक्टरों की सलाह के बावजूद अभिषेक को भर्ती न किया जाए। डॉक्टरों ने मुझसे व्यक्तिगत रूप से माफी मांगी क्योंकि वे भारी दबाव में थे। इसलिए हम सलाइन सपोर्ट के साथ उन्हें घर ले आए हैं, जहां हमारे पारिवारिक डॉक्टर उनका इलाज करेंगे।"

ममता ने स्पष्ट रूप से चेतावनी दी कि यदि उनके भतीजे को कोई स्वास्थ्य संबंधी समस्या होती है, तो इसके लिए नर्सिंग होम प्रशासन और डॉक्टर जिम्मेदार होंगे।

टीएमसी सांसद डेरेक ओ'ब्रायन ने सोशल मीडिया पर हमले का एक वीडियो शेयर करते हुए लिखा, "यह भाजपा समर्थकों द्वारा अभिषेक बनर्जी पर किया गया एक घातक हमला था। उनके पास कोई पुलिस सुरक्षा नहीं थी। मैं यह सोचकर भी कांप जाता हूं कि अगर उन्होंने वह हेलमेट न पहना होता तो क्या होता।"

पार्टी प्रवक्ता कुणाल घोष और पूर्व टीएमसी नेता सोवन चटर्जी ने भी प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाए। घोष ने कहा कि कोई मरीज आईसीयू में रहेगा या डिस्चार्ज होगा, यह फैसला सिर्फ डॉक्टरों का होना चाहिए, इसमें राजनीतिक आकाओं के इशारे पर पुलिस को दखल नहीं देना चाहिए। सोवन चटर्जी ने बताया कि सोनारपुर में भारी जन-आक्रोश का सामना करने के बाद अभिषेक की तबीयत बिगड़ गई थी और उन्हें सिर में मामूली चोट के साथ उल्टी की शिकायत थी।

क्या था मामला?

अभिषेक बनर्जी शनिवार को सोनारपुर के उस टीएमसी कार्यकर्ता संजू करमाकर के परिवार से मिलने गए थे, जिसकी चुनाव के बाद हुई हिंसा में मौत हो गई थी। इसी दौरान सत्ताधारी भाजपा के कार्यकर्ताओं द्वारा उनके काफिले पर कथित तौर पर पथराव और हमला किया गया था।