पाक करा पाएगा अमेरिका-ईरान के बीच सीजफायर? इस्लामाबाद वाली बैठक में कौन-कौन होगा शामिल
कूटनीतिक गतिविधियों के साथ-साथ सैन्य तनाव भी बना हुआ है। अमेरिका ने क्षेत्र में अपने सैन्य बलों की तैनाती बढ़ा दी है और करीब 3,500 सैनिकों के साथ नौसैनिक जहाज वहां पहुंच चुके हैं।

मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के बीच कूटनीतिक प्रयास तेज हो गए हैं। इस सप्ताह के अंत में पाकिस्तान इस्लामाबाद में अमेरिका-ईरान के बीच अहम मध्यस्थता वार्ता की मेजबानी करने जा रहा है। इन वार्ताओं में क्षेत्र के कई प्रमुख देशों के शीर्ष राजनयिक शामिल होंगे और मुख्य उद्देश्य तनाव कम करना तथा शांति बहाल करना है। सूत्रों के अनुसार,सऊदी अरब, तुर्की और मिस्र के विदेश मंत्री इस बैठक में भाग लेने के लिए रविवार को इस्लामाबाद पहुंचेंगे। यह वार्ता दो दिनों तक चलेगी और इसमें क्षेत्रीय स्थिरता और युद्ध विराम जैसे मुद्दों पर चर्चा की जाएगी।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने बताया कि उन्होंने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान के साथ हालिया स्थिति पर विस्तृत बातचीत की है। शहबाज शरीफ ने कहा कि उनकी एक घंटे से अधिक समय तक चली टेलीफोन वार्ता में मौजूदा संकट और समाधान के संभावित रास्तों पर चर्चा हुई।
आपको बता दें कि इन वार्ताओं का नेतृत्व पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार करेंगे। इसके अलावा, अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बैकचैनल कूटनीति से जुड़े प्रतिनिधियों के भी इसमें शामिल होने की संभावना है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि ईरान की ओर से इस वार्ता में कौन प्रतिनिधित्व करेगा।
जेडी वेंस निभाएंगे बड़ी भूमिका
अमेरिका की ओर से भी उच्चस्तरीय भागीदारी की अटकलें हैं। खबरों के मुताबिक, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस इस वार्ता में अहम भूमिका निभा सकते हैं। हालांकि, ईरान ने पहले संकेत दिए हैं कि स्टीव विटकॉफ या जेरेड कुशनर के नेतृत्व में बातचीत सफल होने की संभावना कम है, क्योंकि दोनों देशों के बीच भरोसे की कमी बनी हुई है।
पाकिस्तान इस पूरे मामले में एक महत्वपूर्ण मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। शहबाज शरीफ की सरकार अमेरिका और ईरान के बीच संदेशों के आदान-प्रदान में भी सक्रिय रही है। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने पाकिस्तान के इस प्रयास की सराहना करते हुए इसे आक्रामकता रोकने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है।
सतर्क है ईरान
हालांकि, कूटनीतिक कोशिशों के बावजूद ईरान की ओर से सावधानी भरे संकेत भी मिल रहे हैं। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका पर अव्यावहारिक मांगें रखने और विरोधाभासी रवैया अपनाने का आरोप लगाया है। उन्होंने पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार से बातचीत में भी संघर्ष समाप्त करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
इस बीच, दोनों देशों के बीच प्रस्तावों का आदान-प्रदान भी हुआ है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूत स्टीव विटकॉफ ने ईरान को 15 बिंदुओं की एक कार्य योजना सौंपी, जिसमें परमाणु कार्यक्रम पर सीमाएं और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने जैसे प्रस्ताव शामिल थे। हालांकि, ईरान ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया और अपनी ओर से पांच बिंदुओं का प्रस्ताव रखा, जिसमें क्षतिपूर्ति और इस जलमार्ग पर अपनी संप्रभुता की मान्यता की मांग की गई। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने युद्धविराम प्रस्ताव पर अपनी प्रतिक्रिया पाकिस्तान के माध्यम से अमेरिका तक पहुंचाई है, हालांकि उसने आधिकारिक तौर पर सीधे वार्ता की पुष्टि नहीं की है।
कूटनीतिक गतिविधियों के साथ-साथ सैन्य तनाव भी बना हुआ है। अमेरिका ने क्षेत्र में अपने सैन्य बलों की तैनाती बढ़ा दी है और करीब 3,500 सैनिकों के साथ नौसैनिक जहाज वहां पहुंच चुके हैं। हालांकि, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा है कि अमेरिका अपने लक्ष्य बिना जमीनी सैनिकों के भी हासिल कर सकता है।
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