तीसरे विश्व युद्ध की आहट! ट्रंप ने तय कर दी ईरान पर हमले की डेट? बंद हो सकता है दुनिया का 20% तेल
डोनाल्ड ट्रंप ईरान पर 'ऑल-आउट वार' और शासन परिवर्तन के लिए तैयार! अमेरिकी सेना ने F-35 विमानों और युद्धपोतों के साथ घेराबंदी शुरू की। जानें हॉर्मुज जलडमरूमध्य की बंदी और वैश्विक तेल संकट पर इसका क्या असर होगा।
मध्य पूर्व में युद्ध के बादल मंडरा रहे हैं। रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के खिलाफ एक 'विशाल और हफ्तों तक चलने वाले' सैन्य अभियान को हरी झंडी देने के बेहद करीब हैं। अमेरिकी सेना पूरी तरह अलर्ट पर है और इस वीकेंड तक हमले शुरू किए जा सकते हैं।
सैन्य जमावड़ा और 'आर्मडा' की तैनाती
अमेरिका ने ईरान के तट के पास अपनी सैन्य शक्ति को अभूतपूर्व स्तर तक बढ़ा दिया है।
नौसेना: ईरान के करीब इस समय दो एयरक्राफ्ट कैरियर (विमान वाहक पोत) और एक दर्जन युद्धपोत तैनात हैं।
वायुसेना: सैकड़ों लड़ाकू विमान, जिनमें F-35, F-22 और F-16 शामिल हैं, क्षेत्र में पहुंच चुके हैं।
रसद और हथियार: पिछले 24 घंटों में 150 से अधिक सैन्य कार्गो उड़ानों के जरिए भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद अमेरिकी ठिकानों पर पहुंचाया गया है।
निगरानी: जापान, जर्मनी और हवाई से विशेष E-3 अर्ली वार्निंग विमानों को सऊदी अरब भेजा गया है, जो बड़े पैमाने पर हवाई हमलों के समन्वय में मदद करेंगे।
कूटनीतिक विफलता और कारण
इस संभावित हमले का मुख्य कारण कूटनीतिक बातचीत का विफल होना बताया जा रहा है।
परमाणु विवाद: जेरेड कुश्नर और स्टीव विटकॉफ के नेतृत्व में बातचीत का प्रयास विफल रहा क्योंकि ईरान ने परमाणु विकास रोकने की ट्रंप की मांग को खारिज कर दिया।
शासन परिवर्तन: सूत्रों के अनुसार, इस अभियान का उद्देश्य केवल सैन्य ठिकानों को तबाह करना नहीं, बल्कि ईरान में 'सत्ता परिवर्तन' लाना भी हो सकता है। इसमें इजरायल और अमेरिका मिलकर ऑपरेशन चला सकते हैं।
ईरान की जवाबी कार्रवाई और वैश्विक प्रभाव
हॉर्मुज जलडमरूमध्य की बंदी: ईरान ने सैन्य अभ्यास के नाम पर इस महत्वपूर्ण जलमार्ग को आंशिक रूप से बंद कर दिया है। दुनिया का 20% तेल इसी रास्ते से गुजरता है।
धमकी: ईरानी नेतृत्व और अयातुल्ला ने अमेरिकी सैनिकों को निशाना बनाने की धमकी दी है। यदि यह मार्ग पूरी तरह बंद होता है, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था और तेल की कीमतों पर विनाशकारी असर पड़ सकता है।
अमेरिकी घरेलू राजनीति पर असर
रिपब्लिकन: आगामी मध्यावधि चुनावों से पहले इस कदम को राष्ट्रपति की स्थिति मजबूत करने या जोखिम में डालने वाले मोड़ के रूप में देखा जा रहा है।
डेमोक्रेट्स: हाउस माइनॉरिटी लीडर हकीम जेफरीज ने चेतावनी दी है कि ट्रंप अकेले युद्ध का फैसला नहीं ले सकते। उन्होंने जोर दिया कि किसी भी सैन्य कार्रवाई के लिए कांग्रेस की मंजूरी अनिवार्य है।
यदि यह हमला होता है, तो यह 2003 के इराक युद्ध के बाद सबसे बड़ा और सबसे परिणामी सैन्य आक्रमण होगा। दुनिया की नजरें अब व्हाइट हाउस पर टिकी हैं कि क्या ट्रंप शांति का रास्ता चुनेंगे या 'ऑल-आउट वार' का आदेश देंगे।
कुछ जरूरी सवालों के जवाब
1. क्या अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध शुरू हो गया है?
अभी युद्ध शुरू नहीं हुआ है, लेकिन हालात बहुत गंभीर हैं। अमेरिकी सेना 'स्टैंडबाय' पर है और ट्रंप किसी भी वक्त अंतिम फैसला ले सकते हैं। राजनयिक कोशिशें अभी भी जारी हैं, लेकिन उनमें खास सफलता नहीं मिली है।
2. ईरान ने समुद्र का रास्ता क्यों बंद किया?
ईरान ने इसे एक चेतावनी के तौर पर किया है। वह दुनिया को दिखाना चाहता है कि अगर अमेरिका उस पर हमला करता है, तो वह वैश्विक तेल सप्लाई को रोक सकता है। इससे पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को बड़ा नुकसान पहुँच सकता है।
3. इस युद्ध का बाकी दुनिया पर क्या असर होगा?
अगर यह युद्ध छिड़ता है, तो सबसे पहला असर पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर पड़ेगा। चूंकि ईरान और उसके पड़ोसी देश तेल के बड़े उत्पादक हैं, इसलिए सप्लाई रुकने से महंगाई बहुत बढ़ सकती है। साथ ही, यह एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध का रूप ले सकता है जिसमें कई और देश शामिल हो सकते हैं।
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