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ट्रंप के 'बोर्ड ऑफ पीस' में पाक को झटका, ये देश गाजा में भेजेंगे अपनी सेना; हमास पर फंसा पेंच?

डोनाल्ड ट्रंप ने 'बोर्ड ऑफ पीस' की पहली बैठक में गाजा के पुनर्निर्माण के लिए 10 अरब डॉलर देने का ऐलान किया है। जानिए नई शांति सेना (ISF), हमास के निशस्त्रीकरण और इस मुद्दे पर पाकिस्तान के रुख की पूरी जानकारी।

Fri, 20 Feb 2026 08:45 AMAmit Kumar लाइव हिन्दुस्तान, गाजा
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ट्रंप के 'बोर्ड ऑफ पीस' में पाक को झटका, ये देश गाजा में भेजेंगे अपनी सेना; हमास पर फंसा पेंच?

वाशिंगटन में 'बोर्ड ऑफ पीस' की पहली बैठक में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा के पुनर्निर्माण के लिए 10 अरब डॉलर देने का वादा किया है। इस बैठक में कई मुस्लिम बहुल देशों ने भी गाजा के लिए आर्थिक मदद और सैनिक मुहैया कराने की पेशकश की है। हालांकि सैनिक भेजने वाले देशों में पाकिस्तान का नाम नहीं है। इसे पाक के लिए झटका माना जा रहा है क्योंकि ये देश गाजा में नेतृत्व करने के लिए अमेरिका से गुहार लगा रहा था।

यह बैठक अक्टूबर में अमेरिका, कतर और मिस्र की मध्यस्थता से हुए युद्धविराम के बाद आयोजित की गई है, जिसने गाजा में चल रहे दो साल के भीषण इजरायली हमले पर रोक लगा दी थी।

इंटरनेशनल स्टेबिलाइजेशन फोर्स (ISF) में सैन्य योगदान

युद्ध के बाद गाजा में पुनर्निर्माण क्षेत्रों को सुरक्षित करने और नई शासन व्यवस्था को समर्थन देने के लिए एक 'अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल' (ISF) का गठन किया जा रहा है।

सैनिक भेजने वाले देश: मोरक्को (पुलिस और अधिकारी भेजने वाला पहला अरब देश), अल्बानिया, इंडोनेशिया, कजाकिस्तान और कोसोवो।

इंडोनेशिया की बड़ी भूमिका: दुनिया के सबसे बड़े मुस्लिम बहुल देश इंडोनेशिया ने 8000 सैनिक भेजने की घोषणा की है। ISF को कुल 20,000 सैनिकों की आवश्यकता है। ट्रंप ने इंडोनेशियाई राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो की तारीफ करते हुए उन्हें टफ कुकी कहा।

नेतृत्व: ISF के अमेरिकी कमांडर मेजर जनरल जैस्पर जेफर्स होंगे और उनका डिप्टी एक इंडोनेशियाई अधिकारी होगा।

पाकिस्तान का किनारा

इस बल के लिए सैनिक भेजने वाले पांच देशों में पाकिस्तान का नाम शामिल नहीं है। इस्लामाबाद में विदेश कार्यालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान अभी ISF के 'जनादेश' के स्वरूप का इंतजार कर रहा है। उन्होंने कहा- 'पाकिस्तान शांति स्थापना का हिस्सा बन सकता है, लेकिन हम किसी भी हथियार डालने या सेना खत्म करने के अभियान का हिस्सा नहीं बनेंगे।' पाकिस्तान का इशारा हमास की ओर था। अमेरिका और इजरायल ने शर्त हमास को हथियार डालने और बिना सेना के फिलिस्तीन की शर्त रखी है।

हमास का निशस्त्रीकरण और विभिन्न रुख

युद्धविराम योजना के दूसरे चरण में हमास का निशस्त्रीकरण शामिल है। इसके लिए गाजा में अमेरिका के उच्च प्रतिनिधि निकोले म्लादेनोव ने 'पोस्ट-हमास पुलिस फोर्स' के लिए भर्ती शुरू करने की घोषणा की है, जिसमें शुरुआती घंटों में ही 2,000 लोगों ने आवेदन कर दिया।

डोनाल्ड ट्रंप: उन्होंने उम्मीद जताई कि हमास को निशस्त्र करने के लिए बल प्रयोग की जरूरत नहीं पड़ेगी। उनका मानना है कि हमास ने निशस्त्र होने का वादा किया है।

इजरायल: इजरायली विदेश मंत्री गिदोन सार ने हमास के पूर्ण निशस्त्रीकरण और कट्टरपंथ को खत्म करने की मांग की। वहीं, पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि हमास को या तो शांतिपूर्ण तरीके से निशस्त्र होना होगा या फिर बलपूर्वक किया जाएगा।

हमास: हमास के प्रवक्ता हाजेम कासिम ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बल का मुख्य काम युद्धविराम की निगरानी करना और इजरायली आक्रामकता को रोकना होना चाहिए। उन्होंने निशस्त्रीकरण पर चर्चा करने की बात कही, लेकिन इसके लिए कोई सीधा वादा नहीं किया।

आर्थिक मदद और फंड की घोषणाएं

ट्रंप ने कहा कि गाजा के पुनर्निर्माण के लिए शुरुआती तौर पर सहयोगी देशों ने भारी-भरकम फंड जुटाया है।

अमेरिका: 10 अरब डॉलर का योगदान।

अन्य देश: कतर, सऊदी अरब और यूएई प्रत्येक ने कम से कम 1-1 अरब डॉलर का वादा किया है। कुल मिलाकर अन्य देशों ने 6.5 से 7 अरब डॉलर के बीच का संकल्प लिया है।

फीफा (FIFA): गाजा में फुटबॉल से जुड़ी परियोजनाओं के लिए 7.5 करोड़ डॉलर।

संयुक्त राष्ट्र (UN): मानवीय सहायता के लिए 2 अरब डॉलर।

'बोर्ड ऑफ पीस' पर विवाद और आलोचनाएं

यह बैठक पूर्व 'US इंस्टीट्यूट ऑफ पीस' की इमारत में हुई, जिसे अब पूरी तरह से नया रूप देकर 79 वर्षीय डोनाल्ड ट्रंप के नाम पर रख दिया गया है। बैठक के दौरान ट्रंप का पसंदीदा थीम सॉन्ग YMCA भी बजाया गया। हालांकि, इस नए बोर्ड को लेकर कई विवाद और चिंताएं भी सामने आई हैं।

ट्रंप का एकाधिकार: इस बोर्ड पर ट्रंप के पास वीटो पावर होगी और वे पद छोड़ने के बाद भी इसके प्रमुख बने रह सकते हैं।

महंगी स्थायी सदस्यता: जो देश दो साल के कार्यकाल के बजाय बोर्ड में स्थायी रूप से रहना चाहते हैं, उन्हें 1 अरब डॉलर चुकाने होंगे।

ब्रुकिंग्स इंस्टीट्यूशन के ब्रूस जोन्स जैसे आलोचकों ने इस बोर्ड की कार्यप्रणाली को अस्पष्ट बताया है। उनका कहना है कि यह साफ नहीं है कि यह संस्था संयुक्त राष्ट्र जैसी मौजूदा संस्थाओं के साथ कैसे काम करेगी। जोन्स ने इसे "महत्वाकांक्षा और आत्ममुग्धता का एक भ्रमित मिश्रण" करार दिया।

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