Mojtaba Khamenei first statement amid Iran war talks about closing Hormuz ईरान युद्ध के बीच मोजतबा खामेनेई का पहला बयान, होर्मुज बंद करने की कही बात, Middle-east Hindi News - Hindustan
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ईरान युद्ध के बीच मोजतबा खामेनेई का पहला बयान, होर्मुज बंद करने की कही बात

ईरान के नए सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई ने संकेत दिया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने के दबाव का इस्तेमाल किया जा सकता है। पद संभालने के बाद यह उनका पहला सार्वजनिक संदेश था, जिसे गुरुवार को सरकारी टेलीविजन पर प्रसारित किया गया।

Thu, 12 March 2026 08:59 PMDevendra Kasyap लाइव हिन्दुस्तान, तेहरान
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ईरान युद्ध के बीच मोजतबा खामेनेई का पहला बयान, होर्मुज बंद करने की कही बात

ईरान के नए सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई ने संकेत दिया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने के दबाव का इस्तेमाल किया जा सकता है। पद संभालने के बाद यह उनका पहला सार्वजनिक संदेश था, जिसे गुरुवार को सरकारी टेलीविजन पर प्रसारित किया गया। नए नेता का यह बयान ऐसे समय आया है जब ईरान द्वारा फारस की खाड़ी में जहाजरानी और ऊर्जा ढांचे पर लगातार हमलों के कारण वैश्विक तेल बाजार में उथल-पुथल मची हुई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट कच्चे तेल की कीमत फिर से 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई है।

दुश्मनों पर दबाव बनाने के लिए बंद रखा जाएगा हॉर्मुज

अपने संबोधन में ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोहम्मद मौजतबा खामेनेई ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय एकता की अपील की है। उन्होंने कहा कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य को दुश्मनों पर दबाव बनाने के लिए बंद रखा जाएगा। इस दौरान उन्होंने साफ-साफ कहा कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य बंद रहेगा। उन्होंने इसे ईरान के दुश्मनों पर दबाव डालने का सशक्त माध्यम बताया। उन्होंने पड़ोसियों के साथ मित्रता पर जोर दिया, लेकिन अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाने की नीति जारी रखने की बात कही।

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तत्काल बंद किए जाएं अमेरिकी अड्डे

संबोधन के दौरान खामेनेई ने क्षेत्र में मौजूद सभी अमेरिकी सैन्य अड्डों को तत्काल बंद करने की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ये अड्डे नहीं हटाए गए तो उन पर हमले किए जाएंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान केवल अमेरिकी ठिकानों को लक्ष्य बना रहा है और इस नीति में कोई बदलाव नहीं होगा।

बता दें कि ईरान के नए सर्वोच्च नेता का यह बयान ऐसे समय में आया है जब मध्य पूर्व में तनाव चरम पर है और तेल की कीमतों में तेज उछाल देखा जा रहा है। ईरान की इस कड़ी रुख ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय में चिंता और बढ़ा दी है।

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युद्ध के कारण 32 लाख लोग प्रभावित

इधर, संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त ने गुरुवार को बताया कि ईरान पर अमेरिका-इजरायल के हमले शुरू होने के बाद से अब तक करीब 32 लाख ईरानी नागरिक देश के भीतर ही विस्थापित हो चुके हैं। यूएनएचसीआर की आपातकालीन सहायता टीम के प्रमुख और मध्य पूर्व आपातकालीन शरणार्थी प्रतिक्रिया समन्वयक अयाकी इतो ने कहा कि प्रारंभिक आकलन के अनुसार, चल रहे संघर्ष के परिणामस्वरूप ईरान के भीतर 6 लाख से 10 लाख परिवार अस्थायी रूप से विस्थापित हुए हैं।

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समन्वयक ने कहा कि यह संख्या लगभग 32 लाख लोगों तक पहुंचती है। उन्होंने चेतावनी दी कि संघर्ष आगे जारी रहता है तो यह आंकड़ा चिंताजनक रूप से आगे बढ़ेगा। इतो ने बताया कि विस्थापित होने वाले अधिकांश लोग कथित तौर पर 'सुरक्षा की तलाश में तेहरान और अन्य प्रमुख शहरी क्षेत्रों से देश के उत्तरी हिस्सों और ग्रामीण इलाकों की ओर भाग रहे हैं।' उन्होंने कहा कि ईरान में रह रहे शरणार्थी परिवार, जिनमें से अधिकांश अफगान हैं, वे भी इससे प्रभावित हुए हैं।

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