अली खामेनेई को दफनाने से क्यों डर रहा ईरान, हत्या को हो चुके डेढ़ महीने से ज्यादा
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या के कई हफ्तों बाद भी उनका अंतिम संस्कार नहीं हो सका है। न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, ईरानी अधिकारी अभी तक यह फैसला नहीं ले पाए हैं कि उन्हें कब और कहां दफनाया जाए…

ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या के कई हफ्तों बाद भी उनका अंतिम संस्कार नहीं हो सका है। न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, ईरानी अधिकारी अभी तक यह फैसला नहीं ले पाए हैं कि उन्हें कब और कहां दफनाया जाए। इसके पीछे की वजह है सिक्योरिटी। बताया जा रहा है कि अब भी सुरक्षा स्थिति अत्यंत संवेदनशील बनी हुई है। शायद यही कारण है कि सरकार बड़े सार्वजनिक अंतिम संस्कार से बच रही है। आशंका है कि इस दौरान इजरायल की ओर से हमला हो सकता है या फिर देश के अंदर अशांति भड़क सकती है। मौजूदा युद्ध जैसे हालात और लगातार तनाव के कारण किसी भी बड़े आयोजन को जोखिम भरा माना जा रहा है।
28 फरवरी को हुई थी खामेनेई की मौत
रिपोर्ट्स के अनुसार, खामेनेई की मौत 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हवाई हमलों में हुई थी, जिसने पूरे क्षेत्र में संघर्ष को और तेज कर दिया। इस घटना के बावजूद ईरान में 1989 में अयातुल्ला रुहोल्लाह खोमेनेई के निधन जैसी बड़ी सार्वजनिक भीड़ या शोक प्रदर्शन नहीं देखा गया। दूसरी ओर एक्सपर्ट्स का मानना है कि सरकार को आंतरिक विरोध और संभावित प्रदर्शनों का भी डर है। बड़े जनसमूह इकट्ठा होने पर नियंत्रण बनाए रखना मुश्किल हो सकता है, इसलिए स्थिति को टाला जा रहा है।
अस्थायी युद्धविराम के बावजूद तारीख तय नहीं
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, मशहद को खामेनेई को दफनाने के लिए संभावित स्थान माना जा रहा है। यह उनका गृह नगर है और यहां इमाम रजा दरगाह धार्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। साथ ही, यहां सुरक्षा व्यवस्था भी अपेक्षाकृत मजबूत मानी जाती है। शुरू में 4 मार्च से तीन दिन के राजकीय अंतिम संस्कार की योजना बनाई गई थी, लेकिन अमेरिका-इजरायल के बढ़ते हमलों के कारण इसे रद्द कर दिया गया। 8 अप्रैल को हुए अस्थायी युद्धविराम के बावजूद स्थिति अभी भी अनिश्चित है, जिससे अंतिम संस्कार की तारीख तय नहीं हो पा रही।
ईरान बोला- दुश्मन पर भरोसा नहीं
इस बीच, ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बगेर गालिबफ ने कहा कि मध्य पूर्व में संघर्ष के समाधान के लिए वाशिंगटन और तेहरान के बीच चल रही बातचीत के बावजूद ईरान के सशस्त्र बल पूरी तरह युद्ध के लिए तैयार हैं। प्रेस टीवी के हवाले से उन्होंने कहा कि हमें दुश्मन पर भरोसा नहीं है। अभी भी, जब हम यहां बैठे हैं, युद्ध छिड़ सकता है। सशस्त्र बल जमीन पर पूरी तरह तैयार हैं। गालिबफ ने इस बात से इनकार किया कि बातचीत से राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति लापरवाही बरती जा रही है। उन्होंने कहा कि हमारा मानना है कि बातचीत के कारण सशस्त्र बल तैयार नहीं हैं। इसके उलट, सड़क पर आम लोगों की तरह हमारे सशस्त्र बल भी पूरी तरह तैयार हैं।
बता दें कि पाकिस्तानी चैनल जियो टीवी ने पहले बताया था कि अमेरिका-ईरान वार्ता का दूसरा दौर इस्लामाबाद में अगले सप्ताह के अंत में हो सकता है। 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने ईरान के ठिकानों पर हमले शुरू किए थे, जिनमें 3000 से अधिक लोग मारे गए। 8 अप्रैल को दोनों पक्षों ने दो सप्ताह के युद्धविराम की घोषणा की। इस्लामाबाद में हुई बातचीत बेनतीजा रही। हालांकि शत्रुता फिर से शुरू करने की कोई औपचारिक घोषणा नहीं हुई, लेकिन अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी शुरू कर दी है। मध्यस्थों के माध्यम से नई बातचीत का दौर आयोजित करने के प्रयास जारी हैं।
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