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दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनी पर ईरान का फिर हमला, अरामको रिफाइनरी पर ड्रोन अटैक

सऊदी अरब की प्रमुख तेल कंपनी अरामको की रास तनुरा रिफाइनरी पर एक बार फिर ड्रोन हमले की खबर सामने आई है। सऊदी रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता ने पुष्टि की कि आज रास तनुरा स्थित इस सबसे बड़ी घरेलू रिफाइनरी को निशाना बनाकर ड्रोन से हमला करने की कोशिश की गई।

Wed, 4 March 2026 06:08 PMDevendra Kasyap लाइव हिन्दुस्तान
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दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनी पर ईरान का फिर हमला, अरामको रिफाइनरी पर ड्रोन अटैक

सऊदी अरब की प्रमुख तेल कंपनी अरामको की रास तनुरा रिफाइनरी पर एक बार फिर ड्रोन हमले की खबर सामने आई है। सऊदी रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता ने पुष्टि की कि आज रास तनुरा स्थित इस सबसे बड़ी घरेलू रिफाइनरी को निशाना बनाकर ड्रोन से हमला करने की कोशिश की गई। शुरुआती जांच में पता चला है कि हमला ड्रोन के जरिए किया गया था, लेकिन इससे कोई नुकसान नहीं हुआ और हमला विफल रहा।

बता दें कि इसी सप्ताह सोमवार को ईरान के शाहेद-136 जैसे आत्मघाती ड्रोनों से हुए हमले में रास तनुरा रिफाइनरी पर आग लग गई थी, जिसके बाद अरामको को सुरक्षा के मद्देनजर संयंत्र की कुछ इकाइयों को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा था। हमले के बाद मलबे से सीमित आग लगी, जिसे तुरंत नियंत्रित कर लिया गया, लेकिन स्थानीय बाजार में पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति पर कोई असर नहीं पड़ा।सऊदी अरब दुनिया का सबसे बड़ा तेल निर्यातक देश है और उसके अधिकांश तेल क्षेत्र पूर्वी तट पर स्थित हैं, जो ईरान से खाड़ी के पार हैं।

गौरतलब है कि अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर संयुक्त हमलों के बाद ईरान ने क्षेत्र में अमेरिकी सहयोगी देशों पर मिसाइल और ड्रोन हमले तेज कर दिए हैं। ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य में टैंकरों को भी निशाना बना रहा है, जहां से दुनिया का लगभग 20% तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस गुजरता है।इस सप्ताह के शुरुआती हमले के बाद अरामको ने द्रवीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) के निर्यात को कुछ हफ्तों के लिए निलंबित कर दिया था, हालांकि स्थानीय आपूर्ति सामान्य बनी रही। कंपनी होर्मुज जलडमरूमध्य से बचने के लिए लाल सागर मार्ग से कुछ निर्यात को रीडायरेक्ट करने की कोशिश कर रही है, लेकिन ईरान का दावा है कि यह मार्ग केवल चीनी जहाजों के लिए खुला है।

इस बीच, क्षेत्रीय संघर्ष बढ़ने से तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है। बुधवार को ब्रेंट क्रूड की कीमत 1.11 डॉलर या 1.4% बढ़कर 82.53 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई, जो जनवरी 2025 के बाद का उच्चतम स्तर है। वैश्विक बाजारों में आपूर्ति की चिंता से कीमतें और ऊपर जा सकती हैं।

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