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यूएई बनेगा बलि का बकरा? ईरान से भिड़ाने की तैयारी कर रहा अमेरिका; चला फंडिंग का दांव

अमरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सहयोगियों ने ईरान युद्ध में यूएई को भी कूदने की अपील की है। बता दें कि अमेरिका इस युद्ध में यूएई को बलि का बकरा बनाना चाहता है। बीते दिनों ईरान ने यूएई पर हमला किया था। अमेरिका इसका  पूरा फायदा उठाना चाहता है।

Sun, 17 May 2026 01:39 PMAnkit Ojha लाइव हिन्दुस्तान
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यूएई बनेगा बलि का बकरा? ईरान से भिड़ाने की तैयारी कर रहा अमेरिका; चला फंडिंग का दांव

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कई बार ईरान को पूरी तरह से तबाह करने की धमकी दे चुके हैं। क्लैश रिपोर्ट के मुताबिक इस युद्ध में अब यूएई को बलि का बकरा बनाने की कोशिश की जा रही है। डोनाल्ड ट्रंप के सहयोगी यूएई से कह रहे हैं कि ईरान युद्ध में वह सीधे तौर पर शामिल हो जाए और अमेरिका की मदद करे। हालांकि इसको लेकर यूएई की तरफ से कोई बयान नहीं आया है। एक दिन पहले ही डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि यह तूफान से पहले की शांति है। वहीं रविवार को अमेरिका के विमान आसमान में गड़गड़ाने लगे। बताया गया कि अमेरिका के विमान मध्य एशिया से यूरोप की ओर उड़े हैं।

यूएई को भड़का रहा अमेरिका

बता दें कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चीन भी गए थे लेकन बिना किसी बड़ी सफलता के ही अपने देश लौट आए। उम्मीद थी कि इस यात्रा से ईरान युद्ध का कोी समाधान निकलेगा। हालांकि इस दिशा में कोई सार्थक कदम नहीं उठाया जा सका। बता दें कि बीते दिनों ईरान ने यूएई पर हमले किए थे। इसके बाद यूएई वैसे भी भड़का हुआ है और अमेरिका इस अवसर का पूरा लाभ उठाना चाहता है।

वाशिंगटन लौटते समय 'एयर फोर्स वन' पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए ट्रंप ने कहा कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खुलते हुए देखना चाहते हैं और इस बात पर सहमत हैं कि ईरान को कभी भी परमाणु हथियार हासिल नहीं करने चाहिए। हालांकि, ये ऐसी बातें हैं जो बीजिंग पहले भी कई बार कह चुका है। फॉक्स न्यूज द्वारा शी की भूमिका के बारे में पूछे जाने पर ट्रंप ने कहा, "वह इसे समाप्त होते देखना चाहते हैं। वह मदद करना चाहते हैं। यदि वह मदद करना चाहते हैं, तो यह बहुत अच्छा है, लेकिन हमें मदद की ज़रूरत नहीं है।"

सीएनएन की एक रिपोर्ट के अनुसार, अगले कदम को लेकर प्रशासन के भीतर काफी मतभेद हैं। विशेष रूप से पेंटागन के कुछ अधिकारियों का तर्क है कि लक्षित हमलों सहित अधिक आक्रामक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए, जिससे ईरान पर समझौता करने के लिए दबाव बनाया जा सके। दूसरी ओर, कुछ अन्य अधिकारी आर्थिक दबाव के साथ कूटनीति जारी रखने के पक्ष में हैं। उनका मानना है कि ईरान के कड़े रुख के बावजूद, यदि उस पर पर्याप्त दबाव डाला जाए तो वह पूर्ण पैमाने पर संघर्ष फिर से शुरू किए बिना समझौते के लिए तैयार हो सकता है।

ट्रंप खुद हाल के हफ्तों में बातचीत की ओर झुके हुए थे। उन्हें उम्मीद थी कि प्रतिबंधों, बढ़ते सैन्य दबाव और सीधी बातचीत से अंततः ईरान और अमेरिका के बीच कोई समझौता हो जाएगा। इसके बावजूद अप्रैल में घोषित युद्धविराम के बाद से अब तक ईरान अपने रुख से पीछे नहीं हटा है और उसकी मांगें जस की तस बनी हुई हैं। ईरान की मांगों में अमेरिकी नाकेबंदी को खत्म करना, युद्ध का हर्जाना, होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरानी संप्रभुता की मान्यता, अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों की समाप्ति और लेबनान संघर्ष का अंत शामिल है। ईरान के नवीनतम प्रस्ताव पर सख्त टिप्पणी करते हुए श्री ट्रंप ने कहा, 'मैंने इसे देखा और अगर मुझे पहला वाक्य ही पसंद नहीं आता, तो मैं उसे फेंक देता हूं।'

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