How iran strikes US military bases gulf russian intelligence help ईरान ने अचूक निशाने से भेद दिए 7 अमेरिकी ठिकाने, यूक्रेन का बदला मिडिल ईस्ट में ले रहे पुतिन?, Middle-east Hindi News - Hindustan
More

ईरान ने अचूक निशाने से भेद दिए 7 अमेरिकी ठिकाने, यूक्रेन का बदला मिडिल ईस्ट में ले रहे पुतिन?

खाड़ी देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ईरान के हमलों में रूस की बड़ी भूमिका सामने आई है। जानें कैसे रूसी खुफिया जानकारी की मदद से ईरान मिडिल ईस्ट में अमेरिका की मुश्किलें बढ़ा रहा है और यह यूक्रेन युद्ध का 'बदला' कैसे है।

Sat, 7 March 2026 06:34 AMAmit Kumar लाइव हिन्दुस्तान, तेहरान
share
ईरान ने अचूक निशाने से भेद दिए 7 अमेरिकी ठिकाने, यूक्रेन का बदला मिडिल ईस्ट में ले रहे पुतिन?

मध्य पूर्व में जारी युद्ध के बीच एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ईरानी हमलों ने पूरे क्षेत्र के कम से कम सात अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमला कर उसके कम्युनिकेशन और रडार सिस्टम या उनके आस-पास के ढांचों को भारी नुकसान पहुंचाया है। ये हमले वीकेंड और सोमवार को बहरीन, कतर, कुवैत, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर किए गए।

न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, हमलों का मुख्य निशाना सैटेलाइट कम्युनिकेशन टर्मिनल, रडार डोम और अन्य ऐसे उपकरण थे जिन्हें खाड़ी देशों में अमेरिकी सेना के 'कमांड-एंड-कंट्रोल नेटवर्क' (नियंत्रण प्रणाली) की रीढ़ माना जाता है।

सबसे बड़े हमलों में से एक कतर स्थित 'अल उदीद एयर बेस' पर हुआ, जो इस क्षेत्र का सबसे बड़ा अमेरिकी सैन्य ठिकाना है। इसके अलावा, ईरानी ड्रोनों ने रियाद और कुवैत में अमेरिकी दूतावासों और सऊदी अरब व कतर के तेल और गैस बुनियादी ढांचे को भी निशाना बनाया।

ईरान को कैसे मिली सटीक जानकारी? रूस की भूमिका

न्यूयॉर्क टाइम्स के विश्लेषण ने यह सवाल खड़ा किया कि ईरान इतनी सटीकता से कई खाड़ी देशों में संवेदनशील अमेरिकी सैन्य ठिकानों को कैसे खोज पाया। इसका जवाब 'द वाशिंगटन पोस्ट' की एक रिपोर्ट में मिलता है।

खुफिया जानकारी साझा करना: रिपोर्ट के मुताबिक, युद्ध शुरू होने के बाद से ही रूस ईरान को मध्य पूर्व में अमेरिकी युद्धपोतों और विमानों की स्थिति सहित अमेरिकी सैन्य संपत्तियों के बारे में खुफिया जानकारी मुहैया करा रहा है।

ईरान की मजबूरी: अधिकारियों के अनुसार, युद्ध शुरू होने के एक सप्ताह के भीतर ही अमेरिकी सेनाओं को ट्रैक करने की ईरान की अपनी क्षमता कमजोर पड़ गई थी, इसलिए रूस से मिल रही यह बाहरी खुफिया जानकारी उसके लिए बहुत मूल्यवान साबित हुई।

रूस का मकसद: एक अमेरिकी अधिकारी के अनुसार, रूस इस बात से पूरी तरह वाकिफ है कि अमेरिका यूक्रेन को कितनी सैन्य सहायता दे रहा है। ऐसे में रूस ईरान की मदद करके अमेरिका से बदला लेने की कोशिश कर रहा है।

चीन का रुख और ईरान-रूस के मजबूत संबंध

चीन से कोई मदद नहीं: दोनों देशों के बीच करीबी संबंधों के बावजूद, ऐसा नहीं लगता कि चीन तेहरान को कोई सैन्य सहायता प्रदान कर रहा है। ईरान का चीन के साथ उस स्तर का रक्षा सहयोग नहीं है, जैसा उसका रूस के साथ है।

ईरान और रूस की दोस्ती: 2022 में यूक्रेन पर रूस के पूर्ण पैमाने पर हमले के बाद से, ईरान मॉस्को के सबसे महत्वपूर्ण सहयोगियों में से एक बन गया है। ईरान ने रूस को तकनीक और सस्ते 'स्ट्राइक ड्रोन' दिए हैं, जिन्होंने यूक्रेनी शहरों और वहां की वायु रक्षा प्रणालियों को भारी नुकसान पहुंचाया है।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:संकट में फंसा ईरान तो भारत ने की मदद, ईरानी युद्धपोत को कोच्चि में दी शरण
ये भी पढ़ें:ईरान-अमेरिका युद्ध के बीच महंगा हुआ एलपीजी गैस सिलेंडर, 60 रुपए बढ़ गए दाम
ये भी पढ़ें:भारत पर दिखने लगा ईरान युद्ध का असर, केंद्र सरकार का रिफाइनरियों को बड़ा आदेश

ईरान ने पीछे हटने का कोई इरादा नहीं दिखाया

अमेरिका और इजरायली सेनाओं द्वारा किए गए समन्वित हमलों के बावजूद ईरान ने पीछे हटने का कोई इरादा नहीं दिखाया है। ईरान वाशिंगटन और उसके क्षेत्रीय सहयोगियों पर दबाव बढ़ाने के लिए लगातार सैन्य, कूटनीतिक और ऊर्जा बुनियादी ढांचे को निशाना बना रहा है।

दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने स्पष्ट कर दिया है कि युद्ध कितने समय तक चल सकता है, इसके लिए उनके पास कोई समय सीमा नहीं है। दोनों पक्षों को लगता है कि सामने वाला पक्ष पहले हार मानेगा।

यदि रूसी खुफिया जानकारी तेहरान को इसी तरह निर्देशित करती रही, तो आने वाले दिनों में खाड़ी में अमेरिकी संपत्तियों पर ईरानी हमले और अधिक लगातार तथा खतरनाक हो सकते हैं।

लेटेस्ट   Hindi News ,    बॉलीवुड न्यूज,   बिजनेस न्यूज,   टेक ,   ऑटो,   करियर , और   राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।