मौत के 100 दिन बाद भी दफन नहीं हुए अली खामेनेई, आखिर दुनिया से क्या छिपा रहा ईरान?
ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत को 100 दिन बीत चुके हैं, लेकिन उनका शव अभी तक दफन नहीं किया गया है। 28 फरवरी 2026 को अमेरिका-इजरायल के संयुक्त हमले में हुई उनकी मौत के बाद शुरू हुई इस असाधारण देरी ने पूरे देश और दुनिया में सवालों का तूफान खड़ा कर दिया है।

ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत को 100 दिन पूरे हो चुके हैं, लेकिन उनका शव अभी तक दफनाया नहीं गया है। 28 फरवरी 2026 को अमेरिका-इजरायल के संयुक्त हमले में उनकी मौत हुई थी। इस देरी ने देश-विदेश में सवालों का सिलसिला शुरू कर दिया है, जबकि उनके बेटे मोजतबा खामेनेई पहले ही सत्ता संभाल चुके हैं। सबसे बड़ी बात ये है कि कि उसी हमले में मारे गए कई वरिष्ठ सैन्य कमांडरों और अधिकारियों को पहले ही दफना दिया गया, लेकिन जिन्होंने तीन दशक से अधिक समय तक इस्लामी गणराज्य का नेतृत्व किया, उनके अंतिम संस्कार का इंतजार अब भी जारी है।
जन-जुलूस का कार्यक्रम अभी घोषित नहीं
ईरानी अधिकारियों के अनुसार, खामेनेई के अंतिम संस्कार से पहले कई शहरों में भव्य जन-जुलूस निकाले जाएंगे, जिसके बाद उन्हें पूर्वोत्तर शहर मशहद में दफनाया जाएगा। हालांकि, अब तक कोई आधिकारिक कार्यक्रम घोषित नहीं किया गया है और उनके शव की मौजूदा स्थिति को लेकर बहुत कम जानकारी दी गई है। यहां आपको बता दें कि शिया इस्लामी परंपरा में मृतक का शीघ्र अंतिम संस्कार किया जाता है, लेकिन अली खामेनेई के मामले में स्पष्ट अपवाद देखा जा रहा है।
ईरान इंटरनेशनल की रिपोर्ट के हवाले से कहा जा रहा है कि देरी के पीछे मुख्य वजह नए नेतृत्व से जुड़ी सुरक्षा चिंताएं हैं। हमले के बाद मोजतबा खामेनेई सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं। अधिकारियों का कहना है कि वे मामूली रूप से घायल हुए थे, लेकिन उनकी वर्तमान स्थिति को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं।
शव की स्थिति पर उठ रहे सवाल
दूसरी ओर दफनाने में हुई देरी के कारण अली खामेनेई के शव की स्थिति को लेकर भी तरह-तरह की अटकलों को जन्म दिया है। ईरानी अधिकारियों ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि शव को कहां रखा गया है या हमले में हुई क्षति ने अंतिम संस्कार की तैयारियों को प्रभावित किया है या नहीं। कुछ सूत्रों का कहना है कि उसी हमले में मारे गए कुछ अन्य अधिकारियों के शव हफ्तों बाद बरामद हुए थे और उनकी पहचान के लिए डीएनए टेस्ट की जरूरत पड़ी थी।
2020 के सुलेमानी अंतिम संस्कार की याद
ईरान में वरिष्ठ नेताओं के अंतिम संस्कार हमेशा बड़े राजनीतिक प्रदर्शनों का रूप ले चुके हैं। वर्ष 2020 में IRGC के कमांडर कासिम सुलेमानी के अंतिम संस्कार को कई दिनों तक चले राष्ट्रीय शोक और जन-लामबंदी में बदल दिया गया था। उनके शवयात्रा इराक और ईरान के कई शहरों से गुजरी थी। ऐसे में अधिकारियों को उम्मीद है कि खामेनेई का अंतिम संस्कार भी उसी स्तर का होगा, लेकिन बड़े संघर्ष के बाद ऐसे आयोजन रसद और सुरक्षा की दृष्टि से बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हो रहे हैं।
क्या है ईरान के हालात?
बता दें कि इस वक्त ईरान एक अनोखी परिस्थिति से गुजर रहा है। नया नेता घोषित हो चुका है, लेकिन उसे सार्वजनिक रूप से पेश नहीं किया गया है। पूर्व नेता के लिए ऐतिहासिक विदाई का वादा किया गया था, लेकिन अब तक न तो अंतिम संस्कार हुआ है और न ही सत्ता हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी हुई है। यही कारण है कि समय-समय पर सर्वोच्च नेता को लेकर सवार खड़े होते रहते हैं।
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