TCS takes action in case of exploitation of women employees dismisses accused महिला कर्मचारियों के शोषण के मामले में TCS का ऐक्शन, आरोपियों को किया बर्खास्त, HR भी रडार पर, Maharashtra Hindi News - Hindustan
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महिला कर्मचारियों के शोषण के मामले में TCS का ऐक्शन, आरोपियों को किया बर्खास्त, HR भी रडार पर

नासिक पुलिस ने जिन कर्मचारियों को गिरफ्तार किया गया है, उसमें से एक टीम लीड और दूसरा डायल मैनेजर था। इसके बाद पांच अलग-अलग जूनियर मैनेजर भी है। पीडितों की शिकायतों की जांच न करने केआरोप के लिए कंपनी का एचआर मैनेजर भी पुलिस रिमांड पर है।

Sun, 12 April 2026 09:20 PMUpendra Thapak लाइव हिन्दुस्तान
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महिला कर्मचारियों के शोषण के मामले में TCS का ऐक्शन, आरोपियों को किया बर्खास्त, HR भी रडार पर

महाराष्ट्र के नासिक में बहुराष्ट्रीय कंपनी टीसीएस में महिला कर्मचारियों के साथ हुई शोषण की घटना पर कंपनी ने ऐक्शन लिया है। टीसीएस ने इस मामले में गिरफ्तार किए गए सातों आरोपियों को बर्खास्त कर दिया है। अभी पुलिस हिरासत में मौजूद एचआर मैनेजर के ऊपर भी नजर बनाए हुए है। एचटी की रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी के एक कर्मचारी ने बताया कि सातों कर्मचारियों को 7 अप्रैल को उनकी गिरफ्तारी के बाद ही बर्खास्त कर दिया गया था। इन सातों कर्मचारियों में से 6 अभी न्यायिक हिरासत में हैं, जबकि एक आरोपी फरार बताया जा रहा है।

टीसीएस ने जारी किया बयान

कंपनी में महिला कर्मचारियों के साथ हुए इस दुर्व्यवहार के बाद कंपनी की तरफ से भी एक बयान जारी किया गया है। टीसीएस ने कहा कि कंपनी की किसी भी प्रकार के उत्पीड़न और जबरदस्ती के प्रति 'कतई बर्दाश्त नहीं' की नीति अपनाई है।

क्या है मामला?

बहुराष्ट्रीय कंपनी टीसीएस के बीपीओ में महिलाओं के साथ उत्पीड़न का यह मामला कुछ समय पहले तब सामने आया था, पुलिस के एक अंडरकवर ऑपरेशन के बाद यहां काम करने वाली आठ महिलाओं ने अपने साथियों के ऊपर यौन उत्पीड़न और जबरन धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाने का आरोप लगाया था। पीड़िताओं के मुताबिक, साथी कर्मचारियों के एक समूह न केवल उनका मानसिक और यौन उत्पीड़न किया, बल्कि उनके ऊपर धर्म परिवर्तन का भी दबाव बनाया। जब उन्होंने इसकी शिकायत कंपनी के एचआर डिपार्टमेंट में की, तो उन्होंने भी इस पर कोई कार्रवाई नहीं की।

पिछले काफी समय से इस मामले नजर रख रही महाराष्ट्र पुलिस भी ऐक्शन लेते हुए इन महिला कर्मचारियों की शिकायतों की जांच के लिए पिछले हफ्ते एक एसआईटी का गठन किया।

इसके बाद पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार किया। जिन कर्मचारियों को गिरफ्तार किया गया है, जिसमें एक टीम लीड और दूसरा डायल मैनेजर था। इसके बाद पांच अलग-अलग जूनियर मैनेजर भी है। इसके अलावा शिकायतों की जांच न करने के लिए एचआर मैनेजर भी पुलिस गिरफ्त में है।

ICC में नहीं कोई शिकायत: कंपनी

कंपनी में महिला कर्मचारियों के साथ यौन उत्पीड़न की इस घटना को लेकर अब टीसीएस भी दबाव में है। कंपनी की तरफ से साफ किया गया है कि पीड़ितों ने कंपनी की इंटरनल कंप्लेंट्स कमेटी में कोई शिकायत नहीं की थी। कंपनी के एक अधिकारी ने कहा, " घटना सामने आने के बाद हमने पैनल से जांच की। किसी भी पीड़ित कर्मचारी ने ICC में कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई थी।”

उनके अनुसार, 2017 में शुरू होने के बाद से नासिक कार्यालय में महिला कर्मचारियों से जुड़ा यौन उत्पीड़न का कोई मामला सामने नहीं आया था। इस बीपीओ में करीब 150 कर्मचारी काम करते हैं और इसका बड़ा क्लाइंट बेस है। उन्होंने आगे कहा, “हम शहर के पुलिस आयुक्त संदीप कर्णिक सहित पुलिस के शीर्ष अधिकारियों के संपर्क में हैं और मामले में पूरा सहयोग दे रहे हैं।”

कैसे सामने आया मामला?

टीसीएस में महिला कर्मचारियों के साथ शोषण में शामिल आरोपियों को पकड़ने के लिए नासिक पुलिस ने एक अंडरकवर ऑपरेशन चलाया था। नासिक पुलिस को फरवरी में ही इन आरोपियों के खिलाफ शिकायत मिली थी। जानकारी को पुख्ता करने के लिए पुलिस ने 6 महिला पुलिसकर्मी कंपनी के बीपीओ में 40 दिन तक काम करने के लिए पहुंची। वह लगातार आरोपियों के व्यवहार को देखती रहीं। इसके बाद 26 फरवरी को कंपनी के बीपीओ में महिलाओं के यौन शोषण को लेकर रिपोर्ट सामने आई। इसके बाद एक के बाद एक नौ एफआईआर दर्ज की गई। कई जूनियर महिला कर्मचारियों ने अपने ही सीनियर्स के खिलाफ आरोप लगाए हैं।

मामले की जांच कर रही एसआईटी के प्रमुख और सहायक पुलिस आयुक्त संदीप मिटके ने कहा, “यह पुलिस की एक सुनियोजित योजना थी, जिसके अच्छे परिणाम मिले। महिला पुलिसकर्मी यह निगरानी करती थीं कि आरोपी मीटिंग्स या कार्यस्थल पर महिला सहकर्मियों के साथ किसी तरह का गलत व्यवहार तो नहीं कर रहे हैं। वरिष्ठ अधिकारी रोजाना अंडरकवर पुलिसकर्मियों से संपर्क में रहते थे, उनसे फीडबैक लेते थे और इसे पुलिस आयुक्त को रिपोर्ट करते थे। बाद में इन आरोपियों के खिलाफ जो आरोप लगाए गए थे, वह सही साबित हुए और धीरे-धीरे कई पीड़िताएं भी सामने आने लगीं।