6 लोगों की मौत लेकिन शव 5 ही क्यों मिले? पेपर क्यों नहीं जले; प्लेन क्रैश पर NCP नेता ने ही उठाए सवाल
मिटकरी ने एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की देखरेख में इस विमान हादसे की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि मैं व्यक्तिगत रूप से दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मिलकर ऐसी मांग करूँगा।

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के नेता और MLC अमोल मिटकरी ने पिछले सप्ताह बारामती में हुए उस दुखद विमान हादसे पर कई गंभीर सवाल उठाए हैं, जिसमें उनके लोकप्रिय नेता अजित पवार की मृत्यु हो गई थी। मिटकरी ने हादसे से जुड़ी विभिन्न विसंगतियों पर संदेह व्यक्त करते हुए सोशल मीडिया पर पोस्ट किया, "सवालों का बवंडर उठ रहा है। मैं मौत पर राजनीति करने का पाप नहीं करूँगा, लेकिन मेरे मन में कई शंकाएं और सवाल हैं। दुर्घटना में छह लोगों की मौत हुई, तो फिर केवल 5 शव ही क्यों मिले? छठा शव कहाँ गायब हो गया? उड़ान भरने से पहले यात्रियों की सूची डिजिटल रूप से दर्ज की जाती है, तो यह विसंगति क्यों? उड़ान में कागज का एक टुकड़ा भी क्यों नहीं जला? पायलटों को इतनी बार क्यों बदला गया?"
मिटकरी ने एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की देखरेख में इस विमान हादसे की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने कहा, “मैं व्यक्तिगत रूप से दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मिलकर मांग करूँगा कि इस मामले में एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच कराई जाए। मैं अपने पार्टी नेताओं, समूह नेताओं और सुनेत्रा पवार से बात करने के बाद यह निर्णय लूँगा।”
बाद में सोमवार को उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना के राज्यसभा सांसद और मुख्य प्रवक्ता संजय राउत ने भी उन परिस्थितियों पर सवाल उठाए जिनकी वजह से विमान हादसा हुआ। राउत ने भी संवाददाता सम्मेलन में कहा, "अजीत पवार की अपनी राकंपा को शरद पवार के नेतृत्व वाली राकंपा के साथ विलय करने की योजना भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के लिए एक बड़ी हार होने वाली थी। इस कदम से देश की राजनीति पूरी तरह बदल जाती। अजीत पवार ने बार-बार कहा था कि उनके पास भाजपा के घोटालों की फाइल है और वह सही समय पर इसका खुलासा करेंगे। अजीत पवार ने यह बयान 15 जनवरी को दिया था और यह वास्तव में रहस्यमय है कि ठीक 10 दिन बाद एक दुर्घटना में उनकी मृत्यु हो गई। इसने मुझे याद दिलाया कि कैसे न्यायमूर्ति बृजगोपाल लोया की रहस्यमय परिस्थितियों में मृत्यु हुई थी।"
प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद राउत ने सोमवार को राज्यसभा में अपने भाषण में भी भाजपा पर हमला करते हुए कहा, “15 जनवरी को अजीत पवार ने भाजपा पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया और 10 दिनों के भीतर उनका विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। उन्होंने आरोप लगाया था कि भाजपा ने सिंचाई घोटाले में बड़ी मात्रा में पैसा खाया है। उनके पास इस भाजपा घोटाले की फाइल भी थी।”
राउत ने राज्यसभा में कहा, "अजीत दादा पर 70,000 करोड़ रुपये के सिंचाई घोटाले का आरोप था। वह आपके (भाजपा) साथ मिल गए। लेकिन बाद में अजीत पवार ने भाजपा पर सिंचाई घोटाले में पैसा बनाने का आरोप लगाया। वह हमेशा उन दस्तावेजों की फाइल अपने पास रखते थे जो भाजपा के खिलाफ उनके आरोपों को साबित करते थे। जब वह बारामती गए, तब भी वह फाइल उनके साथ थी। लेकिन बारामती में एक विमान दुर्घटना में उनकी मृत्यु हो गई। इस मामले की न्यायिक जांच होनी चाहिए।"
गौरतलब है कि न्यायमूर्ति बृजगोपाल लोया केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की विशेष अदालत के न्यायाधीश थे। वह 2014 के सोहराबुद्दीन शेख फर्जी मुठभेड़ मामले की सुनवाई कर रहे थे और एक दिसंबर 2014 को नागपुर में मृत्यु हो गई थी। आधिकारिक मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार उनकी मृत्यु दिल का दौरा पड़ने से हुई थी, हालांकि बाद में उनके परिवार ने मौत की परिस्थितियों पर संदेह जताया था। उच्चतम न्यायालय ने 19 अप्रैल 2018 को इन याचिकाओं को खारिज कर दिया था और स्पष्ट किया था कि उनकी मृत्यु प्राकृतिक कारणों से हुई थी।
राउत के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा सांसद और अधिवक्ता उज्ज्वल निकम ने कहा कि 'न्यायाधीश लोया की मृत्यु का कारण दिल का दौरा बताया गया था'। भाजपा प्रवक्ता नवनाथ बन ने भी कहा कि ‘न्यायमूर्ति लोया मामले में कुछ नहीं हुआ। अजीत दादा विमान हादसे के मामले में भी सच्चाई सामने आ जाएगी।’ महाराष्ट्र के जल संसाधन मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल ने कहा, "मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने खुद दुर्घटना की जांच के निर्देश दिए हैं। संजय राउत अपना मानसिक संतुलन खो चुके हैं और इसीलिए वे ऐसे बेतुके बयान दे रहे हैं।"




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