Iran crisis impacts Maharashtra banana prices causing a sharp drop in farmers distress ईरान युद्ध का असर: धड़ाम से गिरी केले की कीमतें, 2 रुपए किलो पर आईं, किसान परेशान, Maharashtra Hindi News - Hindustan
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ईरान युद्ध का असर: धड़ाम से गिरी केले की कीमतें, 2 रुपए किलो पर आईं, किसान परेशान

पश्चिम एशिया में जारी संकट भारत के लिए परेशानी का सबब बनता जा रहा है। ऊर्जा के आयात में कमी के बाद अब भारत से खाड़ी देशों को सामान भेजने वाले किसान भी परेशानी का सामना कर रहे हैं। महाराष्ट्र के केला किसानों को अपनी फसल का उचित दाम नहीं मिल रहा है।

Thu, 16 April 2026 09:05 PMUpendra Thapak लाइव हिन्दुस्तान
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ईरान युद्ध का असर: धड़ाम से गिरी केले की कीमतें, 2 रुपए किलो पर आईं, किसान परेशान

पश्चिम एशिया में जारी संकट भारत को ऊर्जा के स्तर पर ही नहीं, बल्कि व्यापारिक स्तर पर भी हानि पहुंचा रहा है। खाड़ी क्षेत्र में युद्ध और सीजफायर के बीच उलझे देशों के संकट ने महाराष्ट्र के केला के व्यापार को बुरी तरह से प्रभावित किया है। इसकी वजह से किसानों को अपनी फसल को या तो नष्ट करना पड़ रहा है या उसे कम दामों में बेचना पड़ रहा है।

एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक महाराष्ट्र के प्रमुख केले के उत्पादक जिलों जैसे जलगांव और सोलपुर के किसानों के हालात चिंताजनक हैं। अच्छी बारिश और बेहतर मौसम की वजह से इस बार की फसल अच्छी हुई थी। लेकिन पश्चिम एशिया के संकट ने स्थिति को बिगाड़ दिया। युद्ध की वजह से कई टन केले कोल्ड स्टोरेज में रखे हुए हैं। शिपमेंट रुकने से खाड़ी क्षेत्रों में होने वाली केले की सप्लाई प्रभावित हुई है। इसकी वजह से किसानों के पास इन्हें घरेलू बाजार की तरफ मोड़ने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा है।लेकिन घरेलू बाजार पहले से ही केले की सप्लाई से भरा हुआ है। इसकी वजह से इन किसानों को अपनी फसल का सही दाम नहीं मिल पा रहा है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक फरवरी के महीने में जब यह युद्ध शुरू नहीं हुआ था। उस वक्त केले के भाव 18 से 22 रुपए प्रतिकिलो चल रहे थे। लेकिन 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद मार्च में यह कीमत केवल 8 से 10 रुपए तक हो गई। इसके बाद जब ईरान ने होर्मुज को बंद करने का ऐलान किया तो अप्रैल के पहले हफ्ते में यह कीमतें केवल 2 से 3 रुपए किलो पर आ गईं।

सोलापुर जिले के करमाला के किसान ने एक्सप्रेस से बात करते हुए कहा कि उनके पास 10 एकड़ में केले की खेती है। पिछले साल खाद, ड्रिप सिंचाई और अन्य इनपुट लगाने पर उन्होंने करीब 20 लाख रुपए का निवेश किया था। लेकिन अब इसके दाम निकालने भी मुश्किल हो रहे हैं। उन्होंने कहा, "फरवरी में मुझे सबसे ज्यादा 22 रुपये प्रति किलो का भाव मिला था। लेकिन जैसे ही युद्ध शुरू हुआ और निर्यात पर रोक लगी, राज्य भर की फसलें घरेलू बाजार में जाने लगीं और कीमतें गिर गईं।" 2-3 रुपये प्रति किलो के मौजूदा भाव पर होल्कर का अनुमान है कि उन्हें केवल 2.5-3 लाख रुपये ही वसूल होंगे। ऐसी स्थिति में उन्हें 17 लाख से ज्यादा के नुकसान का अंदेशा है।

बता दें, केले की खेती मौसम के हिसाब से न होकर साल भर का निवेश है, जिसकी वजह से यह फसल अचानक दाम कम होने के प्रति विशेष रूप से संवेदनशील हो जाती है। इस फसल में किसानों के लाखों रुपए खर्च होते हैं। अब नुकसान की वजह से उनकी लागत भी डूबने का डर है। ऐसी स्थिति में खाड़ी देशों को सामान निर्यात करने वाले किसान अब राज्य और केंद्र सरकारों से मुआवजे के साथ हस्तक्षेप करने और यूएई, ईरान और इराक जैसे देशों के बजाय वैकल्पिक निर्यात स्थलों की तलाश करने का आह्वान कर रहे हैं।