Big Breaking Nida Khan arrested in TCS conversion case police Caught her from Nashik TCS धर्मांतरण मामले में निदा खान अरेस्ट, पुलिस ने नासिक से किया गिरफ्तार, Maharashtra Hindi News - Hindustan
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TCS धर्मांतरण मामले में निदा खान अरेस्ट, पुलिस ने नासिक से किया गिरफ्तार

महाराष्ट्र से इस वक्त एक बड़ी खबर सामने आई है। टीसीएस धर्मांतरण मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। लंबे समय से फरार चल रही मुख्य आरोपी निदा खान को गिरफ्तार कर लिया गया है। 

Thu, 7 May 2026 11:39 PMDevendra Kasyap लाइव हिन्दुस्तान
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TCS धर्मांतरण मामले में निदा खान अरेस्ट, पुलिस ने नासिक से किया गिरफ्तार

टीसीएस नासिक में कथित जबरन धर्मांतरण मामले की मुख्य आरोपी निदा खान को गुरुवार को महाराष्ट्र पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आईटी क्षेत्र की प्रमुख कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) की नासिक यूनिट से जुड़े इस मामले में कई मुकदमे दर्ज होने के बाद से निदा खान फरार चल रही थीं। पुलिस ने उन्हें पकड़ने के लिए महाराष्ट्र के विभिन्न इलाकों में व्यापक तलाश अभियान चलाया था। गिरफ्तारी से पहले निदा खान ने अपनी दो माह की गर्भावस्था का हवाला देते हुए नासिक की एक अदालत में अग्रिम जमानत और गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा की याचिका दायर की थी। हालांकि, अदालत ने उन्हें कोई राहत देने से इनकार कर दिया था।

टीसीएस में नौकरी और सस्पेंशन

निदा खान ने दिसंबर 2021 में टीसीएस नासिक में ‘प्रोसेस एसोसिएट’ के पद पर काम करना शुरू किया था। आरोप सामने आने के बाद कंपनी ने उन्हें निलंबित कर दिया था। 9 अप्रैल को जारी एक आधिकारिक पत्र में कंपनी ने निदा खान को लिखा था कि आपको सूचित किया जाता है कि आपके विरुद्ध दर्ज एक गंभीर मामले की जानकारी कंपनी को मिली है, जिसमें आप वर्तमान में न्यायिक/पुलिस हिरासत में हैं। मामले की गंभीरता और अपने आधिकारिक कर्तव्यों का निर्वहन करने में आपकी असमर्थता को देखते हुए, कंपनी ने तत्काल प्रभाव से आपको निलंबित करने का निर्णय लिया है। कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि आगे की कार्रवाई तक उनके आंतरिक सिस्टम और नेटवर्क तक पहुंच अस्थायी रूप से बंद कर दी गई है।

4 मई को कोर्ट ने क्या कहा था?

बता दें कि इस मामले में 4 मई को नासिक की एक अदालत ने कथित यौन उत्पीड़न और जबरन धर्म परिवर्तन से संबंधित मामले में टीसीएस कर्मचारी निदा खान की अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि पीड़िता का 'सुनियोजित तरीके से ब्रेनवाश' करके उसे मलेशिया भेजने की 'एक सुनियोजित साजिश' थी। अदालत ने कहा कि खान की याचिका में 'कोई दम नहीं है। अदालत ने कहा कि अपराध की गंभीरता वास्तव में बहुआयामी और बहुस्तरीय है तथा मामले की जड़ तक पहुंचने के लिए हिरासत में पूछताछ आवश्यक है।

प्राथमिकी के अनुसार, निदा खान ने कथित तौर पर महिला कर्मचारियों को इस्लामी परंपराओं के अनुसार कपड़े पहनने और व्यवहार करने की सलाह दी थी। उसने गर्भावस्था का हवाला देते हुए अग्रिम जमानत का अनुरोध किया था। आदेश में कहा गया, "प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि याचिकाकर्ता की भूमिका का विशेष रूप से (प्राथमिकी में) उल्लेख किया गया है और उसकी संलिप्तता भी दिखती है।" न्यायाधीश ने इस बात पर जोर दिया कि निस्संदेह पीड़िता को किसी भी धर्म का अनुसरण करने और अपनी पसंद का नाम रखने का संवैधानिक अधिकार है, "लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि इसके लिए उसका 'ब्रेनवाश' किया जाए और वह भी एक संगठित योजना के तहत।"

क्या है आरोप?

देवलाली पुलिस थाने में दर्ज विशेष मामले में, निदा खान और दो अन्य सह-आरोपी, दानिश शेख और तौसीफ (सभी टीसीएस की नासिक इकाई में पीड़िता के सहकर्मी) पर भारतीय न्याय संहिता की प्रासंगिक धाराओं के तहत विवाह का झूठा वादा करके यौन संबंध बनाना, यौन उत्पीड़न और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने आदि के आरोप में मामला दर्ज किया गया है। उन पर अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धाराओं के तहत भी आरोप लगाए गए हैं। पुलिस के अनुसार, दानिश शेख ने विवाह का झूठा वादा करके पीड़िता का यौन उत्पीड़न किया, जबकि तौसीफ ने बार-बार उससे छेड़छाड़ की और शेख के साथ उसके कथित संबंध को महिला के परिवार के सामने उजागर करने की धमकी देकर उस पर यौन संबंध बनाने का दबाव डाला।

प्राथमिकी के अनुसार, निदा खान ने अपने दोनों सह-आरोपियों के साथ मिलकर पीड़िता को डराकर और उसकी धार्मिक भावनाओं को बार-बार ठेस पहुंचाकर उसे धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर करने का प्रयास किया। पुलिस की ओर से पेश हुए जिला सरकारी अभियोजक (डीजीपी) ए एस मिश्र ने दलील दी कि पीड़िता को आरोपियों के धार्मिक रीति-रिवाजों और दैनिक धार्मिक दिनचर्या का पालन करने के लिए मजबूर किया गया था। मिश्र ने कहा कि जांच से पता चलता है कि खान ने पीड़िता को बुर्का और पैगंबर मोहम्मद के जीवन पर किताबें दी थीं। मिश्र ने बताया कि उसने मोबाइल में मुस्लिम सिद्धांतों और धार्मिक गतिविधियों से संबंधित एप्लिकेशन भी इंस्टॉल किए थे। जांच का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि पीड़िता का नाम बदलकर हानिया रखा जाना था और उसे मलेशिया भेजा जाना था।