अब कौन संभालेगा अजित पवार की विरासत? ये लोग हैं 'दादा' की कुर्सी के असली दावेदार
अजित पवार के निधन के बाद कौन संभालेगा उनकी राजनीतिक विरासत? क्या पत्नी सुनेत्रा पवार होंगी उत्तराधिकारी या बेटे पार्थ और जय पवार? जानिए बारामती के 'दादा' के परिवार और सियासी भविष्य का पूरा समीकरण।

महाराष्ट्र की राजनीति के 'दादा' और बारामती के सबसे बड़े नेता अजित पवार (66) का आज सुबह एक विमान दुर्घटना में निधन हो गया। पुणे जिले के बारामती में अपने ही गढ़ में उतरते वक्त हुए इस हादसे ने न केवल उनके परिवार को बल्कि पूरे महाराष्ट्र की सियासत को झकझोर कर रख दिया है। अजित पवार महज एक नेता नहीं, बल्कि प्रशासन पर अपनी लोहे जैसी पकड़ और बेबाक शैली के लिए पहचाने जाने वाले एक 'पावर हाउस' थे।
उनके जाने के बाद सबसे बड़ा सवाल जो सियासी गलियारों में गूंज रहा है, वह यह है कि अब अजित पवार की विरासत कौन संभालेगा? क्या यह जिम्मेदारी उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार के कंधों पर आएगी या उनके बेटे पार्थ और जय पवार आगे आएंगे? आइए उनके परिवार और सियासी वारिसों का पूरा समीकरण समझते हैं।
माता-पिता:
पिता: अनंतराव पवार (दिवंगत)। उन्होंने प्रसिद्ध फिल्म निर्माता वी. शांताराम के साथ काम किया था। वे शरद पवार के बड़े भाई थे।
माता: आशाताई पवार (जिंदा हैं)।
पत्नी और बच्चे:
पत्नी सुनेत्रा पवार एक सामाजिक कार्यकर्ता हैं और राज्यसभा सांसद भी हैं। वे पूर्व मंत्री पद्मसिंह पाटिल की बहन हैं।
बेटे पार्थ पवार राजनीति में सक्रिय हैं और 2019 में मावल निर्वाचन क्षेत्र से लोकसभा चुनाव लड़ चुके हैं।
दूसरे बेटे जय पवार मुख्य रूप से पारिवारिक व्यवसाय संभालते हैं।
भाई-बहन:
- भाई: श्रीनिवास पवार एक व्यवसायी हैं।
- बहन: विजया पाटिल का निधन हो चुका है।
अन्य प्रमुख और करीबी रिश्तेदार
- चाचा: शरद पवार - राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के संस्थापक और वरिष्ठ नेता।
- चचेरी बहन: सुप्रिया सुले - शरद पवार की बेटी और सांसद।
- भतीजे: रोहित पवार (राजेंद्र पवार के बेटे) और युगेंद्र पवार (श्रीनिवास पवार के बेटे)।
कौन संभालेगा विरासत?
सुनेत्रा पवार: सबसे मजबूत और स्वाभाविक दावेदार
अजित पवार के बाद अगर कोई नाम सबसे पहले आता है, तो वह उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार का है। सुनेत्रा पवार वर्तमान में राज्यसभा सांसद (MP) हैं और बारामती की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय रही हैं। वे केवल अजित पवार की पत्नी नहीं हैं, बल्कि 'बारामती टेक्सटाइल पार्क' की चेयरपर्सन और 'एन्वायर्नमेंटल फोरम ऑफ इंडिया' की प्रमुख भी हैं। 2024 के लोकसभा चुनावों में भी उनकी सक्रियता देखी गई थी।
पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं को एकजुट रखने के लिए सुनेत्रा पवार एक 'आम सहमति' वाला चेहरा हो सकती हैं। अजित पवार के भावनात्मक और सियासी वोट बैंक को संभालने के लिए वे सबसे उपयुक्त मानी जा रही हैं।
पार्थ पवार: महत्वाकांक्षी लेकिन राह कठिन
अजित पवार के बड़े बेटे पार्थ पवार राजनीति में अपनी जगह बनाने के लिए लंबे समय से संघर्षरत हैं। पार्थ ने 2019 में मावल लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा था, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। वे अजित पवार की राजनीति में सक्रिय रूप से हाथ बंटाते रहे हैं। पार्थ पर अक्सर विपक्षी दलों द्वारा निशाना साधा जाता रहा है। उनकी स्वीकार्यता जमीनी कार्यकर्ताओं के बीच पिता जैसी 'करिश्माई' नहीं मानी जाती, लेकिन वे युवा चेहरा हैं और पार्टी के एक धड़े का समर्थन उनके साथ हो सकता है।
जय पवार: 'डार्क हॉर्स' या भविष्य के नेता?
अजित पवार के छोटे बेटे जय पवार अब तक सक्रिय राजनीति की मुख्यधारा से थोड़ा दूर रहे हैं, लेकिन वे पर्दे के पीछे की रणनीतियों में माहिर माने जाते हैं। जय पवार ज्यादातर पारिवारिक व्यवसाय और बारामती के स्थानीय आयोजनों में दिखते रहे हैं। हाल ही में उनकी शादी रुतुजा पाटिल से हुई थी, जो खुद एक राजनीतिक परिवार से आती हैं। अजित पवार अक्सर जय को अपने साथ कई कार्यक्रमों में ले जाते थे। कई जानकारों का मानना है कि पार्टी का एक बड़ा वर्ग जय पवार में 'दादा' की छवि देखता है।
युगेंद्र पवार और 'पवार बनाम पवार'
अजित पवार की विरासत की बात करते समय हम उनके भतीजे युगेंद्र पवार (श्रीनिवास पवार के बेटे) को नजरअंदाज नहीं कर सकते। 2024 के विधानसभा चुनाव में युगेंद्र ने शरद पवार गुट (NCP-SP) की तरफ से अजित पवार के खिलाफ चुनाव लड़ा था।
अब जब अजित पवार नहीं रहे, तो क्या बारामती की जनता वापस 'शरद पवार' की छत्रछाया में जाएगी? या फिर सहानुभूति की लहर अजित पवार के परिवार (सुनेत्रा/पार्थ/जय) को स्थापित करेगी? यह देखना दिलचस्प होगा।
फिलहाल अजित पवार का जाना 'महायुति' गठबंधन (बीजेपी-शिवसेना-एनसीपी) के लिए एक बड़ा झटका है। वे गठबंधन में एक प्रमुख स्तंभ थे जो मराठा वोट बैंक और पश्चिमी महाराष्ट्र की राजनीति को साधते थे। उनकी विरासत का असली वारिस वही होगा जो न केवल बारामती को संभाले, बल्कि राज्य स्तर पर पार्टी के विधायकों को टूटने से बचा सके। फिलहाल, सुनेत्रा पवार इस भूमिका के लिए सबसे आगे दिखाई दे रही हैं, लेकिन पार्थ और जय के बीच भूमिकाओं का बंटवारा कैसे होता है, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।




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